नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में नौकरी करता हूं लेकिन हर साल गर्मियों में अपने गांव जाता हूं। गांव का नाम है बिहार के एक छोटे से इलाके में, जहां खेतों के बीच हवा धीरे-धीरे बहती रहती है। इस बार जब मैं पहुंचा तो जून का महीना था। दोपहर की धूप तेज थी लेकिन शाम को हल्की हवा चलने लगती थी। वही gentle breeze जो पेड़ों की पत्तियों को सहलाती हुई आती थी।
मेरी उम्र 28 साल है। गांव में मेरे चाचा का घर है। चाचा शहर में रहते हैं इसलिए घर खाली रहता था। मैं अक्सर शाम को छत पर बैठकर हवा का मजा लेता। एक शाम मैं छत पर लेटा था। अचानक नीचे से आवाज आई। “राहुल भाई, चाय पी लोगे?”
आवाज सुनकर मैं नीचे झांका। नीचे खड़ी थी रानी भाभी। उम्र करीब 32-33 साल। गोरी चमड़ी, मोटे स्तन जो ब्लाउज में अटक से भर रहे थे। कमर पर साड़ी थोड़ी ढीली लपेटी हुई थी। उनकी आंखों में शरारत थी। उनके पति शहर में मजदूरी करते थे। अक्सर महीनों बाहर रहते।
मैं नीचे उतरा। “हां भाभी, चाय तो पीनी चाहिए।” हम दोनों आंगन में बैठ गए। हवा चल रही थी। रानी भाभी की साड़ी का पल्लू हवा में उड़ रहा था। उनका गहरा ब्लाउज दिख रहा था। मैं उनकी छाती की ओर देखता रहा। उन्होंने भी देख लिया। मुस्कुराई और बोली, “क्या देख रहे हो राहुल? हवा में सब उड़ रहा है ना?”
मैं शरमा गया लेकिन बोला, “भाभी आप बहुत सुंदर लग रही हो।” रानी भाभी हंस पड़ी। “अरे वाह, शहर वाला लड़का गांव की भाभी को तारीफ दे रहा है।” हम बातें करते रहे। अंधेरा होने लगा। हवा और तेज हो गई। अचानक बिजली चली गई। अंधेरा छा गया।
रानी भाभी बोली, “चलो अंदर बैठते हैं।” हम दोनों घर के अंदर गए। कमरा छोटा था। चारपाई पर हम बैठ गए। हवा खिड़की से आ रही थी। रानी भाभी का शरीर पास में था। उनकी सांसों की गर्माहट महसूस हो रही थी। मैंने हिम्मत करके उनका हाथ पकड़ लिया।
“भाभी, मुझे बहुत दिनों से आपकी इच्छा हो रही है।” रानी भाभी चुप रही। फिर बोली, “राहुल, मैं भी अकेली हूं। पति महीनों नहीं आते।” उसने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया। मेरा लंड पहले से ही खड़ा हो चुका था। उसने जोर से दबाया। “कितना मोटा है तेरा लंड।”
मैंने उनकी साड़ी खींची। ब्लाउज के हुक खोले। उनके स्तन बाहर निकल आए। बड़े, भारी, निप्पल सख्त। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। रानी भाभी सिसकारियां लेने लगी। “आह्ह… राहुल… चूस ले… मेरी चूत गीली हो रही है।”
मैंने उनकी साड़ी पूरी उतार दी। पेटीकोट भी। अब वो सिर्फ ब्लाउज में थी। मैंने उनकी टांगें फैलाईं। उनकी चूत देखकर मेरा लंड और सख्त हो गया। बालों वाली, मोटी चूत, रस टपक रहा था। मैंने उंगली डाली। “भाभी, कितनी गीली है तेरी चूत।”
रानी भाभी चीखी, “अंदर डाल लंड… चोद दे मुझे।” मैंने अपना लंड निकाला। सात इंच का मोटा लंड। उसने हाथ से पकड़ा और मुंह में ले लिया। चूसने लगी। “उम्म्म…

कितना स्वादिष्ट है।”
फिर मैंने उनकी चूत पर लंड रखा। धीरे से घुसाया। “आह्ह… राहुल… पूरा डाल… मेरी चूत फाड़ दे।” लंड आधा अंदर गया। फिर जोर लगाया। पूरा घुस गया। रानी भाभी चीख पड़ी। “मर गई… मोटा लंड… चोद मुझे जोर से।”
हम चोदने लगे। हवा बाहर चल रही थी। चारपाई हिल रही थी। मैं उनकी गांद सहला रहा था। उंगली गांद में डाली। “भाभी तेरी गांद भी कितनी नरम है।” रानी भाभी बोली, “बाद में गांद भी मार लेना। पहले चूत चोद।”
हम घंटों चोदते रहे। पोजीशन बदलते रहे। डॉगी स्टाइल में। ऊपर चढ़कर। नीचे लेटकर। हर बार हवा का झोंका आता और हम और जोश में आ जाते। रस निकल रहा था। चूत से आवाजें आ रही थीं। “छप छप… छप…”
रानी भाभी का पहला झड़ना हुआ। “आह्ह… मैं झड़ गई… राहुल… तेरे लंड से…” मैंने भी रस छोड़ा। उनकी चूत भर दी। लेकिन लंड फिर खड़ा हो गया।
दूसरी बार गांद मारी। थोड़ा तेल लगाया। लंड गांद में घुसाया। रानी भाभी चीख रही थी। “दर्द हो रहा… लेकिन मजा आ रहा… गांद चोद… चोद दे।”
रात भर चोदा। सुबह तक तीन बार झाड़ा। हवा अभी भी चल रही थी। gentle breeze जो हमारे पसीने को ठंडा कर रही थी।
अगले दिन भी हम मिले। खेतों में। पेड़ के नीचे। वहां भी चोदाई हुई। रानी भाभी की चूत हमेशा गीली रहती थी। मैंने उनकी गांद, चूत, मुंह सब चोदा।
गांव की हवा ने हमारी चुदाई को और रोमांचक बना दिया। हर झोंका आता तो हम और जोर से चोदते। रानी भाभी अब रोज आती। “राहुल, आज फिर चोदना। मेरी चूत तेरे बिना सूख जाती है।”
मैंने उनकी पूरी बॉडी चाटी। स्तन, चूत, गांद सब। रस पिया। उन्होंने भी मेरा लंड चूसा। अंडकोष चूसे। हम दोनों पागल हो गए थे।
एक बार बारिश में भी चोदा। हवा और बारिश मिलकर हमें और गीला कर रही थी। रानी भाभी की साड़ी भीग गई। शरीर चमक रहा था। मैंने पीछे से चोदा। पानी टपक रहा था।
गांव में दो हफ्ते रहे। हर रात चुदाई। हवा का साथ कभी नहीं छूटा। रानी भाभी बोली, “अगली बार जब आए तो फिर मिलना। तेरे लंड के बिना अब नहीं रह सकती।”
मैं शहर लौटा लेकिन यादें साथ थीं। गांव की gentle breeze और रानी भाभी की गर्म चूत।
(यह कहानी पूरी हुई। याद रखना कि ऐसी चुदाई गांव की हवा में ही मजेदार होती है।)