नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से देहाती गांव से हूं, जहां बिजली आती-जाती रहती है और रात को लोग खेतों में छुपकर मस्ती करते हैं। उम्र मेरी अट्ठाईस साल है और बचपन से ही गांव की लड़कियों पर नजर रखता आया हूं। लेकिन असली मज़ा तब आया जब मेरी मुलाकात रीमा से हुई। रीमा गांव की सबसे सुंदर और भरी-भरी लड़की थी, उम्र उसकी पच्चीस साल, गोरी चमड़ी, मोटी-मोटी जांघें, और ऐसे बड़े-बड़े स्तन कि देखकर लंड अपने आप खड़ा हो जाता।
एक शाम गांव के बाहर पुरानी स्कूल बिल्डिंग में देहाती लोग फिल्म दिखा रहे थे। पुरानी प्रोजेक्टर वाली फिल्म, रोमांटिक लव स्टोरी। अंधेरा था, लोग चटाई बिछाकर बैठे थे। मैं अकेला बैठा था जब रीमा मेरे पास आकर बैठ गई। उसकी साड़ी थोड़ी ऊपर चढ़ गई थी, जांघों का सफेद गोश्त चमक रहा था। फिल्म शुरू हुई, हीरो-हीरोइन गले मिल रहे थे। रीमा ने धीरे से मेरी तरफ देखा और मुस्कुराई।
“अर्जुन भाई, फिल्म अच्छी लग रही है?” उसने कान में फुसफुसाया। उसकी सांस गर्म थी। मैंने हिम्मत करके उसकी जांघ पर हाथ रख दिया। “बहुत अच्छी, खासकर तेरे साथ बैठकर।” रीमा हंस पड़ी और हाथ नहीं हटाया। फिल्म में जब हीरो लड़की को चूमने लगा, रीमा ने मेरी तरफ झुककर कहा, “हम भी कुछ ऐसा करें?”
मैंने तुरंत उसका मुंह अपने मुंह से चिपका लिया। उसकी जुबान मीठी थी, लार का स्वाद नमकीन। हम दोनों जोर-जोर से चूमने लगे। मेरे हाथ उसकी साड़ी के अंदर घुस गए। रीमा की चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने उसकी चूत के बालों को सहलाते हुए दो उंगलियां अंदर डाल दीं। “अरे वाह रीमा, तेरी चूत कितनी गर्म और गीली है।” रीमा सिसकते हुए बोली, “अर्जुन, उंगलियां मत निकाल, और अंदर डाल…

मेरी चूत फट रही है।”
फिल्म अभी चल रही थी, लेकिन हम दोनों फिल्म भूल चुके थे। रीमा ने मेरी पैंट का जिप खोला और मेरा मोटा लंड बाहर निकाल लिया। “कितना बड़ा लंड है तेरा, गांव में सबसे मोटा लगता है।” उसने लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। उसकी जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी, लार टपक रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से मुंह में ठेलना शुरू किया। “चूस रीमा, पूरा लंड निगल ले, तेरी मोटी-मोटी जुबान अच्छी लग रही है।”
दस मिनट चूसने के बाद रीमा उठी और साड़ी ऊपर चढ़ा दी। उसकी चूत बिल्कुल साफ दिख रही थी, गुलाबी रंग की, रस टपक रहा था। मैंने उसे घुटनों के बल बिठाया और पीछे से लंड घुसा दिया। “आह्ह्ह… अर्जुन, धीरे… तेरे लंड से मेरी चूत फट जाएगी!” लेकिन मैंने नहीं सुनी। जोर-जोर से धक्के मारने लगा। थाप-थाप की आवाज पूरे हाल में गूंज रही थी। रीमा चीख रही थी, “चोदो मुझे, गांव की चूत को फाड़ दो, अपना गरम रस अंदर डाल दो!”
हमने पोजीशन बदली। रीमा मेरे ऊपर चढ़ गई। उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने दोनों स्तनों को हाथों में लेकर जोर से दबाया, निप्पल चूसने लगा। रीमा अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ रही थी, “देख, मेरी चूत कैसे तेरे लंड को निगल रही है।” हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे। फिल्म खत्म होने वाली थी, लेकिन हम रुकने को तैयार नहीं।
मैंने रीमा को दीवार से टिका दिया और खड़े-खड़े चोदना शुरू किया। उसकी एक टांग मेरे कंधे पर। लंड पूरी गहराई तक जा रहा था। रीमा की चूत का रस मेरी जांघों पर बह रहा था। “अर्जुन, मैं झड़ने वाली हूं… अपना लंड और जोर से मार!” हम दोनों एक साथ झड़ गए। मेरा गरम-गरम रस उसकी चूत में भर गया। रीमा कांप रही थी, “बहुत मजा आया, तेरे लंड का रस मेरी चूत में भर गया।”
फिल्म खत्म हो चुकी थी, लोग उठने लगे थे। हम जल्दी से कपड़े ठीक करके बाहर निकल आए। लेकिन रात को रीमा मुझे अपने खेत के पास बुला ले गई। वहां हमने पूरी रात चोदाई की। पहले 69 पोजीशन में, रीमा मेरे लंड को चूस रही थी और मैं उसकी चूत चाट रहा था। उसकी चूत का स्वाद नमकीन और मीठा था। फिर मैंने उसकी गांद में उंगली डाली, “तेरी गांद भी बहुत तंग है रीमा।” रीमा बोली, “कल गांद में लंड डालना, आज सिर्फ चूत फाड़।”
दूसरी बार मैंने उसे कुत्ते वाली स्टाइल में चोदा। उसके स्तन लटक रहे थे, मैं पीछे से पकड़कर जोर-जोर से ठेल रहा था। “ले रीमा, ले मेरा लंड, तेरी देहाती चूत आज फट जाएगी।” रीमा चिल्ला रही थी, “हां चोद, मुझे अपनी रंडी बना ले, रोज चोदना मुझे!” हम तीन बार झड़ चुके थे, लेकिन लंड अभी भी खड़ा था।
सुबह होने तक हम थक चुके थे। रीमा ने कहा, “अर्जुन, ये हमारी फिल्मी लव स्टोरी है, लेकिन असली मजा चोदाई में है।” मैंने उसे गले लगाया और कहा, “अगली बार तेरी गांद भी मारूंगा।” रीमा हंस पड़ी और मेरे लंड को फिर से सहलाने लगी।
गांव में अब हम दोनों अक्सर छुपकर मिलते हैं। कभी खेत में, कभी पुरानी बिल्डिंग में, कभी फिल्म दिखाने वाले हाल में। हर बार नई-नई पोजीशन, नया मजा। रीमा की चूत अब मेरे लंड की आदी हो चुकी है। वो कहती है, “तेरा लंड मेरी चूत का राजा है।” और मैं कहता हूं, “तेरी चूत मेरा सबसे प्यारा देहाती खजाना।”
ये कहानी जारी है दोस्तों। देहाती मूवी लव स्टोरी ने हमें जो जोड़ा, वो सिर्फ प्यार नहीं, बल्कि गंदी, गर्म चोदाई थी। अगर आप भी ऐसी कहानी सुनना चाहते हो तो बताना, अगली किस्त में और ज्यादा डिटेल दूंगा। रीमा अभी भी मेरे पास बैठी है, साड़ी उठाए हुए, चूत दिखा रही है। मैं फिर से लंड अंदर डालने वाला हूं।
(शेष कहानी विस्तार से: अगली मुलाकात में रीमा ने मुझे बताया कि उसकी चूत रात भर मेरे रस की याद में गीली रहती है। हमने ट्रैक्टर पर चोदाई की, जहां रीमा मेरे लंड पर उछल रही थी, उसके स्तन मेरे मुंह में थे। फिर नहर के किनारे, जहां पानी में नंगे होकर हमने सेक्स किया। रीमा की गांद को पहले उंगलियों से तैयार किया, फिर धीरे-धीरे लंड घुसाया। “आह्ह, दर्द हो रहा है लेकिन मजा भी आ रहा है!” वो चीखी। मैंने उसकी गांद को थपथपाते हुए चोदा, रस निकालकर उसकी पीठ पर छिड़का। पूरी रात हमने चालीस से ज्यादा धक्के मारे, हर पोजीशन में। रीमा की चूत, गांद, मुंह सब मेरे लंड से भर गए। सुबह जब हम अलग हुए तो दोनों थके हुए लेकिन खुश थे। ये देहाती फिल्मी प्यार अब हमारी रोजमर्रा की चोदाई बन चुका है।)