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अभी देखें: Dehati Lok Geet Hindi Mein Gaon Ki Rasili Chudai — नई पसंद

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली से एक छोटे से देहाती गांव में छुट्टियां बिताने आया था। गांव की हवा, खेतों की महक और शाम को बजने वाले देहati lok geet hindi ने मुझे बिल्कुल मोह लिया। हर शाम गांव के चौपाल पर लोग इकट्ठा होते, महिलाएं और लड़कियां देहati lok geet hindi गातीं, ढोलक बजातीं और गाने में इतनी मस्ती होती कि पूरा गांव झूम उठता।

मैं भी वहां जाकर बैठ जाता। एक शाम की बात है जब बारिश हो रही थी। चौपाल पर सिर्फ कुछ लोग थे। गाने वाली औरत का नाम सीमा था। उम्र करीब ३२ साल, देहाती औरत लेकिन शरीर ऐसा कि देखते ही लंड खड़ा हो जाए। उसकी भारी भारी छातियां, मोटी कमर, गोल-गोल गांड और मोटी जांघें। वो देहati lok geet hindi गा रही थी, “मोरे पिया घर आए…” गाने के साथ वो कमर हिला रही थी, छाती उछाल रही थी।

मैं पास बैठा था। बारिश तेज हो गई तो सब लोग अपने घर चले गए। सिर्फ सीमा और मैं रह गए। वो मुझे देखकर मुस्कुराई और बोली, “राहुल भाई, गाना पसंद आया?” मैंने कहा, “बहुत, खासकर तुम्हारा अंदाज।” वो हंसी और बोली, “अकेले मत बैठो, बारिश रुकने तक यहां बैठो।”

हम बातें करने लगे। देहati lok geet hindi का जिक्र आया तो वो और जोश में आ गई। वो गाने लगी, “रात भर जागे रे…” गाते गाते उसकी सांस तेज हो गई, पसीना निकल रहा था। उसकी साड़ी की पल्लू सरक गई और उसकी गोरी-गोरी, भारी छाती का ऊपरी हिस्सा दिखने लगा। मेरी नजर वहीं टिक गई।

सीमा ने देख लिया। वो सीधी मेरी तरफ आई और बोली, “क्या देख रहे हो राहुल? देहati lok geet hindi सुनते सुनते मन में कुछ और आ रहा है क्या?” मैंने हिम्मत करके कहा, “तुम्हारी छाती देखकर लंड खड़ा हो रहा है।” वो हंसी और बोली, “तो छू ले, क्या हुआ?”

मैंने तुरंत उसकी छाती पर हाथ रख दिया। वो नरम, मोटी और गरम थी। मैंने दोनों हाथों से दबाया। सीमा सिसकारियां लेने लगी, “आह्ह्ह… राहुल, जोर से दबा, मेरी छाती का रस निकाल।” मैंने उसकी साड़ी उतारी, ब्लाउज खोला। उसके स्तन बाहर निकल आए, काले-काले निप्पल, बड़े-बड़े और भरे हुए। मैं मुंह लगाकर चूसने लगा।

सीमा ने मेरी पैंट खोल दी। मेरा लंड बाहर निकला, सख्त और मोटा। वो बोली, “वाह, कितना बड़ा लंड है। देहati lok geet hindi सुनकर ही इतना खड़ा हो गया?” उसने मेरे लंड को हाथ में लिया, ऊपर नीचे करने लगी। फिर मुंह में डालकर चूसने लगी, “चल… चल… पूरा मुंह में ले ले।” उसकी जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी, लार टपक रही थी।

बारिश का शोर और देहati lok geet hindi की याद में हम दोनों और उत्तेजित हो गए। मैंने उसे पीठ के बल लिटाया, उसकी साड़ी और पेटीकोट उतार दिए। उसकी फूली हुई, बालों वाली, गीली चूत सामने थी। मैंने उंगलियां डालीं, “आह्ह्ह… राहुल, उंगली से मत, लंड मार अंदर।” मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा, फिर एक जोरदार झटके से अंदर घुसा दिया।

“उफ्फ्फ… मर गई रे…

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कितना मोटा लंड… मेरी चूत फट रही है!” सीमा चीखने लगी। मैं जोर-जोर से चोदने लगा। उसकी चूत से “पचक-पचक” की आवाजें आ रही थीं। रस बह रहा था। मैंने उसकी जांघें उठाकर और गहराई तक लंड डाला। सीमा चिल्ला रही थी, “चोदो मुझे… देहati lok geet hindi गाते गाते चोदो… मेरी गांड भी मारो!”

मैंने उसे घुमाया, कुत्ते वाली मुद्रा में कर दिया। उसकी मोटी गांड मेरे सामने थी। मैंने लंड उसकी चूत में डाला और जोर से धक्के मारने लगा। साथ में उसकी गांड पर थप्पड़ मार रहा था। “थप्प… थप्प… ले रंडी, मेरी देहati लोक गीत वाली रंडी!” सीमा चीख रही थी, “हां… हां… और जोर से… मेरी चूत का पानी निकाल दो!”

हम दोनों पसीने से तर हो गए थे। मैंने उसे पीछे से पकड़कर चोदा, उसके स्तन दबाए, निप्पल खींचे। फिर उसे सामने करके मिशनरी पोजीशन में लिटाया। लंड अंदर बाहर कर रहा था, उसकी चूत लाल हो गई थी। सीमा का शरीर कांप रहा था, “आने वाला है… मेरी चूत झड़ने वाली है!”

मैंने भी तेजी बढ़ाई। “ले… ले… मेरा गरम पानी तेरी चूत में!” दोनों एक साथ झड़ गए। मेरा लंड फड़क रहा था, गरम-गरम वीर्य उसकी चूत में भर रहा था। सीमा का शरीर ऐंठ गया, “आह्ह्ह… भर दिया… मेरी चूत भर गई!”

बारिश रुक गई थी लेकिन हम रुके नहीं। सीमा ने कहा, “अभी खत्म नहीं हुआ, देहati lok geet hindi फिर गाती हूं, फिर चोदना।” वो गाने लगी और मैं फिर उसकी चूत चाटने लगा। उसका रस मीठा था। फिर उसने मेरे लंड को फिर से खड़ा किया और ऊपर चढ़कर बैठ गई। वो ऊपर नीचे होने लगी, “देख, मैं खुद चोद रही हूं!” उसकी छाती उछल रही थी, गांड थपथपा रही थी।

हम पूरी रात चोदते रहे। अलग-अलग पोजीशन में, चूत, मुंह, हाथ सब कुछ इस्तेमाल किया। सुबह होते-होते सीमा बोली, “राहुल, अब रोज शाम को देhati lok geet hindi सुनने आना, और मेरी चूत चोदना।”

मैं गांव से लौटने तक रोज यही करता रहा। देhati lok geet hindi की मिठास अब मेरे लिए चुदाई की मिठास बन गई। सीमा की चूत, गांड और छाती की याद आज भी मुझे सताती है।

(कहानी यहीं खत्म नहीं होती, लेकिन दोस्तों, इतनी लंबी चुदाई की रात के बाद मैं थक गया। अगर और डिटेल चाहिए तो बताना।)

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