
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विक्रम है। मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से देहाती गांव में रहता हूं जहां खेतों की हरियाली और लोक गीतों की मिठास हर तरफ फैली रहती है। मैं 32 साल का हूं, कद काठी अच्छी, और जिंदगी में कई बार ऐसी घटनाएं हुई हैं जो याद करके आज भी लंड खड़ा हो जाता है। आज मैं आपको अपनी एक सच्ची और बेहद गंदी कहानी सुनाता हूं जो देहती लोक गीत एमपी3 से जुड़ी हुई है।
एक दिन मैं अपने खेत से लौट रहा था। शाम का वक्त था, हवा में ठंडक थी और दूर से कोई देहाती लोक गीत का एमपी3 बज रहा था। गाना था “रंगीले रंगीले, मेरे बलम रंगीले” वाला। मैंने देखा कि पड़ोस की 28 साल की सुनीता अकेली अपने आंगन में गीत सुनते हुए नाच रही थी। उसकी देहाती चुन्नी उड़ रही थी और उसकी भारी भारी छातियां लहरा रही थीं। सुनीता की गांड बहुत बड़ी और गोल थी, जैसे दो बड़े आम। उसके बाल खुले थे और पसीने से उसकी पीठ चमक रही थी।
मैंने पास जाकर कहा, “सुनीता, ये लोक गीत एमपी3 कहां से लाई?” वो मुस्कुराई और बोली, “विक्रम भाई, मोबाइल में डाउनलोड किया है। सुनो ना, कितना मस्त लगता है।” मैं उसके घर में घुस गया। अंदर अंधेरा था, सिर्फ मोबाइल की स्क्रीन से रोशनी आ रही थी। गाना बज रहा था और सुनीता ने मुझे पानी पिलाया। पानी पीते हुए मेरी नजर उसकी काली चोली पर पड़ी जहां से उसकी मोटी मोटी चूचियां झांक रही थीं।
मैंने हिम्मत करके उसके कंधे पर हाथ रखा। वो सिहर गई। “विक्रम, क्या कर रहे हो?” मैंने कहा, “सुनीता, ये गाना सुनते सुनते मेरा लंड खड़ा हो गया है। तेरी गांड देख के तो और भी तंग हो रहा है।” वो शरमा गई लेकिन रोका नहीं। मैंने उसे दीवार से लगाया और उसके होठों पर अपना मुंह लगा दिया। हम दोनों के होंठ चिपक गए। उसकी सांस गर्म थी। मैंने उसकी चोली के बटन खोले। अंदर से उसकी नंगी छातियां निकल आईं। दोनों चूचियां बड़ी बड़ी, काले काले निप्पल के साथ। मैंने एक चूची मुंह में ली और जोर जोर से चूसने लगा। सुनीता चीखी, “आह्ह्ह विक्रम, चूस ले मेरी चूची, तेरी जीभ से मेरा पूरा बदन जल रहा है।”
मैंने उसकी साड़ी ऊपर उठाई। नीचे उसकी काली पैंटी थी जो उसकी गीली चुंत से चिपकी हुई थी। मैंने पैंटी उतारी और उसकी फटी हुई देहाती चूत देखी। चूत के बाल घने थे, होठ मोटे मोटे और बीच से चमकता हुआ रस निकल रहा था। मैंने अपनी उंगली उसकी चूत में डाली। “वाह सुनीता, तेरी चूत कितनी गरम और गीली है।” वो सिसक रही थी, “हां विक्रम, उंगली और डाल, मेरी चूत फाड़ दे।” मैंने दो उंगलियां अंदर बाहर करने लगा। उसका रस मेरे हाथ पर बह रहा था।
फिर मैंने अपना लंड निकाला। मेरा लंड 8 इंच का मोटा काला लंड था, नसें फूली हुई। सुनीता ने उसे हाथ में लिया और बोली, “कितना बड़ा लंड है तेरा, मेरी चूत में घुसा दे।” मैंने उसे घुटनों के बल बिठाया और अपना लंड उसके मुंह में ठुसा दिया। वो चूसने लगी, “चूस ले मेरे लंड को, तेरी जीभ से मेरा माल निकाल।” वो जोर जोर से चूस रही थी, थूक की आवाजें आ रही थीं।
उसके बाद मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। लोक गीत अभी भी एमपी3 में बज रहा था। मैं उसके ऊपर चढ़ गया और अपना लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा। एक झटके में पूरा लंड अंदर घुसा दिया। सुनीता चीख पड़ी, “आह्ह्ह्ह मर गई रे, इतना मोटा लंड मेरी चूत फाड़ देगा।” मैं जोर जोर से चोदने लगा। थाप थाप की आवाजें, उसकी चूत का रस मेरे लंड पर चिपक रहा था। मैं उसके स्तनों को निचोड़ता हुआ चोद रहा था। “ले ले मेरी रंडी, तेरी चूत आज फट जाएगी।” वो चिल्ला रही थी, “हां चोद मुझे, और जोर से चोद, मेरी गांड भी मार।”
मैंने उसे उल्टा किया। उसकी मोटी गांड ऊपर उठी हुई थी। मैंने उसकी गांड के छेद पर थूक लगाया और एक उंगली डाली। फिर अपना लंड उसकी चूत से निकालकर गांड में घुसाने लगा। पहले सिरा, फिर आधा, फिर पूरा लंड उसकी गांड में। सुनीता रो रही थी, “आह्ह्ह दर्द हो रहा है, लेकिन मस्त लग रहा है। गांड मार मेरी।” मैं उसकी गांड मारते मारते उसके बाल खींच रहा था।
हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे। गाना अभी भी चल रहा था। मैंने उसे फिर सामने से चोदा। इस बार धीरे धीरे, गहराई तक लंड घुसाते हुए। उसकी चूत का रस मेरे अंडों पर गिर रहा था। सुनीता बोली, “विक्रम, अब माल निकाल, मेरी चूत में अपना गरम माल भर दे।” मैंने तेजी से चोदा और जोर से चिल्लाते हुए उसकी चूत में माल छोड़ दिया। मोटा मोटा वीर्य उसकी चूत से बाहर निकल रहा था।
हम दोनों थक कर गिर पड़े। लेकिन गाना अभी खत्म नहीं हुआ था। सुनीता ने फिर से मेरा लंड मुंह में लिया और साफ करने लगी। “तेरा माल कितना स्वादिष्ट है।” मैंने फिर से उसकी चूत चाटी, उसका रस पिया। पूरी रात हम चोदते रहे, अलग अलग पोजीशन में। कभी वो मेरे ऊपर चढ़कर अपनी गांड हिलाती, कभी मैं पीछे से उसकी चूत फाड़ता।
सुबह होते होते हम दोनों पूरी तरह थक चुके थे। लेकिन ये यादें आज भी ताजा हैं। देहाती लोक गीत एमपी3 ने मेरी जिंदगी बदल दी। अब जब भी वो गाना सुनता हूं, सुनीता की नंगी देह और उसकी गीली चूत याद आ जाती है।
(यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती, लेकिन दोस्तों, इतनी लंबी चुदाई के बाद अब मैं थक गया हूं। अगर और डिटेल चाहिए तो बताना।)