नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं दिल्ली में नौकरी करता हूँ लेकिन हर साल गर्मियों में अपने गांव जाता हूँ। इस बार गांव पहुंचते ही मेरी नजर पड़ गई अपनी पुरानी दोस्त रिया पर। वो अब बीस साल की हो चुकी थी, गांव की सबसे सुंदर लड़की। गोरी चमड़ी, मोटी-मोटी जांघें, बड़ी-बड़ी छातियां जो ब्लाउज में अटक रही थीं, और गोल-गोल गांड जो चलते वक्त लहराती थी। रिया की शादी हो चुकी थी लेकिन उसका पति शहर में काम करता था, इसलिए वो अकेली रहती थी।
पहले दिन ही हम मिले तो बातें शुरू हो गईं। रिया हंसते हुए बोली, “अर्जुन भैया, शहर में तो बहुत मस्ती करते होगे। यहां गांव में तो सब सूखा-सूखा लगता है।” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “रिया, गांव की मिट्टी में ही असली मजा है। खासकर जब कोई सुंदर लड़की साथ हो।” वो शरमा गई लेकिन उसकी आंखों में कुछ और ही चमक थी।
दूसरे दिन शाम को बारिश शुरू हो गई। हम दोनों उसके घर में अकेले थे। बारिश की आवाज में रिया ने कहा, “अर्जुन, डर लग रहा है। अकेले मत जाना।” मैं उसके पास बैठ गया। उसकी साड़ी गीली हो चुकी थी, जिससे उसके स्तन साफ दिख रहे थे। मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ा। रिया ने आंखें बंद कर लीं। मैंने उसके होंठों पर अपना मुंह लगा दिया। वो भी चूमने लगी।
हमारी चुम्बन गहरी हो गई। मैंने उसकी साड़ी खींची और ब्लाउज के हुक खोले। उसकी बड़ी-बड़ी छातियां बाहर निकल आईं। काले निप्पल्स कड़े हो चुके थे। मैंने एक छाती को मुंह में लिया और चूसने लगा। रिया सिसकारियां लेने लगी, “अर्जुन… आह… चूसो ना… मेरी चूचियां चूसो… बहुत दिनों से कोई नहीं छुआ।” मैं दूसरी छाती भी चूसता रहा, जीभ से निप्पल्स को चाटता रहा। उसके शरीर से पसीने की खुशबू आ रही थी, जो मुझे और उत्तेजित कर रही थी।
रिया ने मेरी पैंट खोली और मेरा लंड बाहर निकाला। वो मोटा और सख्त हो चुका था। रिया बोली, “वाह… कितना बड़ा लंड है तेरा… गांव वाले लड़कों से तो दोगुना।” उसने उसे हाथ में लिया और ऊपर-नीचे करने लगी। फिर मुंह में डाल लिया। उसकी गर्म सांसें मेरे लंड पर पड़ रही थीं। वो जोर-जोर से चूस रही थी, जीभ से लंड के सिरे को चाट रही थी। “रिया… तेरी चूत चाटूं?” मैंने पूछा। वो सिर हिलाकर हां बोली।
मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट उतारे। उसकी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी। बालों वाली, मोटी चूत के होठ फूले हुए थे। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर लगाई और चाटने लगा। रिया चीखने लगी, “आह्ह्ह… अर्जुन… मेरी चूत चाटो… रस पी लो… गंदी चूत चूसो… हां और अंदर… उंगली भी डालो।” मैंने दो उंगलियां उसकी चूत में डालीं और ऊपर-नीचे करने लगा जबकि जीभ से उसकी चूत के फूल को चूस रहा था। रिया का शरीर कांप रहा था। उसका रस मेरे मुंह में आ रहा था, मीठा और चिपचिपा।
रिया ने मुझे लेटाया और खुद मेरे ऊपर बैठ गई। उसने मेरा लंड अपनी चूत पर रखा और धीरे-धीरे अंदर लेने लगी। “आह… फट रही है चूत… लेकिन मजा आ रहा है… पूरा लंड डाल दो अंदर।” उसकी चूत गर्म और तंग थी। लंड आधा अंदर गया तो वो चीख पड़ी। मैंने उसके कूल्हों को पकड़कर जोर से ऊपर उठाया और पूरा लंड अंदर घुसा दिया। रिया चिल्लाई, “मादरचोद… फाड़ डाला… लेकिन चोदो मुझे… जोर-जोर से चोदो।”
हम चोदने लगे। रिया ऊपर-नीचे हो रही थी, उसकी छातियां लहरा रही थीं। मैंने उसके निप्पल्स को चूसा और गांड पर थप्पड़ मारे। “रिया तेरी चूत कितनी गर्म है… लंड को निगल रही है।” वो बोली, “हां… तेरे लंड से चुदवाकर ही शांति मिलेगी… और जोर से… मेरी गांड भी मार… लेकिन पहले चूत भर दो।” हम घंटे भर चोदते रहे। अलग-अलग पोजीशन में। कुत्ते वाली स्टाइल में मैं उसके पीछे से लंड घुसाता, वो चीखती, “आह्ह… गांड भी दबा… चूत फाड़… रस निकाल।”
रिया का पहला झड़ना हुआ। उसकी चूत से रस निकलकर मेरे लंड पर बहने लगा। मैंने भी अपना गरम पानी उसकी चूत में छोड़ दिया। लेकिन हम रुके नहीं। रिया ने फिर मेरा लंड चूसा, साफ किया और दोबारा खड़ा कर दिया। इस बार मैंने उसे पीठ के बल लिटाया, उसकी टांगें अपने कंधों पर रखीं और लंड फिर से अंदर डाला।
“रिया… तेरी चूत आज पूरी तरह खोल दूंगा।” मैं जोर-जोर से धक्के मार रहा था। लंड की आवाज “पचक-पचक” हो रही थी। रिया के मुंह से गंदी गंदी बातें निकल रही थीं, “चोद… चोद… मेरी चूत का मालिक बन जा… हां और गहरा… मेरी गांड में उंगली डाल… आह्ह… मजा आ रहा है।” मैंने उसकी गांड में एक उंगली डाली, वो और जोर से चीखी।
हम तीन बार झड़ चुके थे लेकिन अभी भी भूख नहीं मिटी थी। बारिश रुक गई थी लेकिन हम रुक नहीं रहे थे। रिया ने मुझे खड़ा किया और खुद घुटनों के बल बैठ गई। उसने लंड फिर चूसा, अंडों को चाटा और बोली, “अब मेरी गांड मार… गांड फाड़ डाल।” मैंने उसकी गांड पर थूक लगाया और लंड घुसाने लगा। गांड बहुत तंग थी। धीरे-धीरे आधा लंड अंदर गया तो रिया रोने लगी, “दर्द हो रहा… लेकिन रुक मत… पूरा डाल… गांड चोद।”
गांड चुदाई और भी गंदी थी। लंड अंदर-बाहर होता, रिया की गांड लाल हो रही थी। मैंने उसके बाल पकड़े और जोर से चोदा। रिया बोली, “मैं तेरी गांव वाली रंडी बन गई…

चोदते रह… सीजन भर।”
आखिर में हम थककर गिर पड़े। रिया मेरी बाहों में लेटी, मेरे लंड को हाथ से सहला रही थी। “अर्जुन, ये village love season 6 शुरू हो चुका है। अगली बार और भी गंदा चोदना।”
हमने पूरी रात चोदा। सुबह तक रिया की चूत और गांड दोनों लाल हो चुकी थीं। रस से भरी चादर, पसीने से तर शरीर, और हम दोनों की सांसें अभी भी तेज थीं। गांव की हवा में हमारी चुदाई की खुशबू फैल रही थी। ये सिर्फ शुरुआत थी।
(कहानी जारी रखने के लिए अगली मुलाकात में और विस्तार से बताऊंगा, लेकिन इस बार इतना ही। कुल मिलाकर हमने चार बार चोदा, हर बार नई पोजीशन और नई गंदी बातें। रिया की चूत का रस पीना और उसका लंड चूसना दोनों का मजा अलग था। गांव की भाभी बनकर रिया ने मुझे पूरा मालिक बना लिया।)