नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं हैदराबाद में एक आईटी कंपनी में जॉब करता हूं। उम्र 32 साल है और मैं अकेला रहता हूं एक छोटे से फ्लैट में। हैदराबाद की गर्मी और बारिश दोनों ही मुझे पसंद हैं, लेकिन सबसे ज्यादा मुझे यहां की औरतें पसंद हैं। खासकर वो तेलुगु लड़कियां जिनकी त्वचा गेहूं जैसी, बड़ी-बड़ी आंखें और मोटी-मोटी गांड होती है।
एक दिन ऑफिस में नई लड़की आई। उसका नाम ममथा था। तेलुगु फैमिली से, हैदराबाद की लोकल। 28 साल की, शादीशुदा लेकिन पति दुबई में जॉब करता था। ममथा की बॉडी देखकर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। उसकी छाती पर दो बड़े-बड़े स्तन जैसे आम के फल लटक रहे थे, कमर पतली और गांड इतनी मोटी कि चलते वक्त लहराती थी। वो साड़ी में आती थी, नीचे से नाभि दिखती और ऊपर से ब्लाउज में उसकी चूचियां फटने को तैयार लगतीं।
पहले कुछ दिन हम बस हाई-हैलो करते रहे। फिर एक बार ऑफिस पार्टी में हम दोनों साथ बैठ गए। ड्रिंक के बाद ममथा थोड़ी खुल गई। उसने बताया कि पति महीनों से नहीं आया, वो अकेली है और शरीर में आग लगी रहती है। मैंने मजाक में कहा, “ममथा, अगर कोई मदद करे तो?” वो हंस पड़ी और बोली, “अर्जुन, तू मदद करेगा क्या? मेरी चूत को शांत करेगा?”
उस रात मैं उसे उसके फ्लैट ले गया। जैसे ही दरवाजा बंद हुआ, ममथा ने मुझे दीवार से लगाकर चूमना शुरू कर दिया। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई, लार का स्वाद मीठा था। मैंने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा, ब्लाउज के हुक खोले। उसके स्तन बाहर निकले – गोल, भारी, निप्पल सख्त और काले। मैंने एक चूची मुंह में ली और चूसने लगा। ममथा चीख पड़ी, “अर्जुन… चूस ले मेरी मोटी चूची… और जोर से काट…”
मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। साड़ी पूरी उतार दी। वो सिर्फ पेटीकोट में थी। मैंने पेटीकोट का नाड़ा खोला। उसकी चूत सामने थी – गहरी, बालों से घिरी, होंठ मोटे और अंदर से गुलाबी। चूत से रस टपक रहा था। मैंने उंगली डाली, गर्म और गीली थी। ममथा सिसक रही थी, “अर्जुन, मेरी चूत को चाट… तेलुगु चूत का स्वाद ले…”
मैंने उसकी टांगें फैलाईं और मुंह लगा दिया। जीभ से उसके चूत के होंठ चाटे, क्लिट को चूसा। ममथा की गांड उछल रही थी। वो चिल्ला रही थी, “हां… और गहरा… मेरी चूत फाड़ दे… लंड डाल… अब और नहीं सहा जाता…”
मैंने अपना लंड निकाला। 8 इंच का मोटा लंड, नसें उभरी हुई, सिरा लाल। ममथा ने उसे हाथ में लिया, “कितना बड़ा है तेरा लंड… मेरी चूत फट जाएगी…” उसने मुंह में लिया और चूसने लगी। थूक से लंड चमक रहा था। वो गले तक ले जा रही थी, “ग्लक… ग्लक…” आवाज आ रही थी।
फिर मैंने उसे घोड़ी बना दिया। गांड ऊपर, चूत खुली। मैंने लंड घुसाया। एक ही झटके में आधा अंदर। ममथा चीखी, “आह्ह्ह… धीरे… मेरा फट रहा है…” लेकिन मैंने जोर लगाया। पूरा लंड अंदर। चूत की दीवारें लंड को कस रही थीं। मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। “थप… थप…” की आवाज पूरे कमरे में। ममथा की गांड पर थप्पड़ मार रहा था, “ले… ले मेरी तेलुगु रांड… तेरी चूत आज फाड़ दूंगा…”
ममथा बोल रही थी, “हां अर्जुन… और जोर से चोद… मेरी चूत का रस निकाल…

मैं तेरी गुलाम हूं…” मैंने रफ्तार बढ़ाई। लंड पूरी तरह बाहर निकालकर फिर जोर से घुसा रहा था। चूत से सफेद रस निकल रहा था, मेरे लंड पर लग रहा था।
हमने पोजीशन बदली। ममथा ऊपर आई। उसने लंड पर बैठकर ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे। मैं उन्हें हाथों से दबा रहा था। “ममथा, तेरी गांड भी मारूं क्या?” वो बोली, “हां… पहले चूत भर ले… फिर गांड फाड़ना…”
हम घंटों चोदते रहे। ममथा कई बार झड़ चुकी थी। आखिर में मैंने लंड निकाला और उसके स्तनों पर झड़ गया। गर्म-गर्म वीर्य उसकी चूचियों पर फैल गया। ममथा ने उंगली से उठाकर मुंह में डाली, “स्वाद अच्छा है…”
लेकिन रात अभी खत्म नहीं हुई थी। हमने फिर शुरू किया। इस बार मैंने उसकी गांड में उंगली डाली। ममथा कराह रही थी, “धीरे… गांड तंग है…” लेकिन लंड घुसा दिया। गांड की मांसपेशियां लंड को निचोड़ रही थीं। मैं धीरे-धीरे चोद रहा था, “ले… तेरी गांड भी मेरी हो गई…”
सुबह तक हम थक चुके थे। ममथा ने कहा, “अर्जुन, ये हमारी सीक्रेट रहेगी… लेकिन जब मन करे, आ जाना… मेरी चूत और गांड दोनों तेरे लिए तैयार…”
उसके बाद से हम अक्सर मिलते हैं। ऑफिस के बाद, छुट्टियों में। ममथा की चूत का स्वाद अब मेरी आदत बन चुका है। तेलुगु लड़कियों की गर्मी सच में अलग होती है – रस ज्यादा, चीखें ज्यादा, और चूत हमेशा भूखी।
(कहानी जारी… ममथा के साथ और भी गंदी-गंदी रातें, अलग पोजीशन, और नई-नई जगहों पर चुदाई की कहानियां अगली बार सुनाऊंगा।)