नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विकास है। मैं दिल्ली में एक छोटी सी जॉब करता हूं लेकिन असली जड़ें मेरी उत्तर प्रदेश के एक छोटे से देहाती गांव में हैं। पिछले साल गर्मियों में जब मैं गांव गया तो वहां एक ऐसी घटना हुई जिसने मेरी जिंदगी बदल दी। गांव में हर साल लोक गीतों का मेला लगता है। वहां "देहाती लोक गीत superhit" वाली गायिका का नाम था राधा। वो बीस साल की सुंदर, गोल-मटोल देह वाली लड़की थी। उसकी आवाज में जादू था लेकिन उसका शरीर और भी ज्यादा जादुई।
राधा जब मंच पर गाती, "अरे मेरी रात कटे ना, सांवरे के बिना…" तो पूरा गांव झूम उठता। लेकिन उसकी आंखें हमेशा मेरी तरफ टिकी रहतीं। पहली रात मेला खत्म होने के बाद मैं उसके पीछे हो लिया। वो अकेली अपने खेत के पास झोपड़ी में रहती थी। मैंने दरवाजा खटखटाया। राधा ने दरवाजा खोला। वो सिर्फ पतली सी साड़ी में थी, पसीने से भीगी हुई। उसके बड़े-बड़े स्तन साड़ी के ब्लाउज से फटने को तैयार लग रहे थे। निप्पल साफ दिख रहे थे।
"विकास भैया, अंदर आओ," उसने मुस्कुराते हुए कहा। मैं अंदर गया। झोपड़ी छोटी थी, एक ही चारपाई। राधा ने पानी पिलाया और फिर गाना शुरू कर दिया, धीमी आवाज में। "तेरी लंड की प्यास लगी है राधा को…" उसने अचानक गंदा बोल बोल दिया। मैं चौंक गया। वो पास आ गई, मेरी जांघ पर हाथ रखा। "देहाती लोक गीत superhit सुनना है ना? पर असली मजा तो चुदाई में है।"
मैंने उसे खींच लिया। उसके होंठों पर अपना मुंह मार दिया। हम दोनों जोर-जोर से चूमने लगे। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई। मैंने उसके ब्लाउज के हुक खोले। दो मोटी, गोरी और भारी छातियां बाहर निकल आईं। निप्पल काले और सख्त। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। राधा चीखी, "आह्ह्ह… विकास, जोर से चूस, मेरी चूत गीली हो रही है।" मैंने दूसरी छाती भी दबाई, निचोड़ी। दूध जैसा सफेद रस नहीं निकला लेकिन पसीना और उसकी खुशबू ने मुझे पागल कर दिया।
राधा ने मेरी पैंट खोल दी। मेरा लंड बाहर आया, सात इंच का मोटा, नसों से भरा। वो घुटनों पर बैठ गई और लंड चूसने लगी। "चलो मेरा लंड चूस, राधा… तेरी देहाती चूत को आज फाड़ दूंगा," मैंने कहा। वो जोर-जोर से चूस रही थी, थूक लगा कर, गले तक ले जा रही थी। लार की धारें उसके मुंह से निकल कर मेरे अंडों पर गिर रही थीं। मैंने उसके बाल पकड़ कर मुंह में ठेला। "गले तक ले, रandi… dehati lok geet superhit गाने वाली, अब मेरे लंड का गाना गा।"
फिर मैंने उसे चारपाई पर लिटाया। साड़ी ऊपर उठाई। उसकी चूत पूरी तरह गंजी, मोटी और फूल रही थी। होंठ बाहर निकले हुए, चूत का रस टपक रहा था। मैंने उंगली डाली। "आह्ह… उंगली मत, सीधा लंड डाल," वो बोली। मैंने लंड चूत पर रगड़ा, फिर एक जोर का झटका मारा। आधा लंड अंदर घुस गया। राधा चीख पड़ी, "मर गई… मोटा लंड…

फाड़ दे मेरी चूत!" मैंने जोर-जोर से धक्के मारे। पूरी लंड अंदर-बाहर हो रही थी। चूत का रस मेरे लंड पर चिपक रहा था, आवाजें आ रही थीं "पच-पच-पच"।
हम घंटों चोदते रहे। पोजीशन बदलते रहे। पहले कुत्ते वाली, फिर वो ऊपर चढ़ी। उसकी भारी गांद मेरे पेट पर पटक रही थी। "चोद मुझे, गांव का लंड… मेरी गंदी चूत को फाड़ डाल," वो चिल्ला रही थी। मैंने उसकी गांद के छेद में उंगली डाली। वो और उत्तेजित हो गई। "हां, गांद भी मार… लेकिन पहले चूत भर दे मेरे रस से।" मैंने जोर से चोदा, उसकी छातियां उछल रही थीं। आखिर में मैंने अंदर ही झड़ दिया। गरम-गरम वीर्य उसकी चूत में भर गया। रस बाहर निकल आया, चूत से बह रहा था।
लेकिन रात अभी खत्म नहीं हुई। हम फिर शुरू हुए। इस बार वो मुंह नीचे, गांद ऊपर। मैंने उसकी गांद चाटी, फिर लंड डाला। गांद भी तंग थी। वो चीख रही थी, "दर्द हो रहा… लेकिन मजा आ रहा है।" हम दोनों पसीने से तर हो गए। लोक गीत की रिकॉर्डिंग बैकग्राउंड में चल रही थी, लेकिन हमारी चुदाई की आवाजें उससे ज्यादा तेज थीं।
सुबह तक हम तीन बार चोद चुके थे। राधा की चूत, मुंह और गांद सब मेरे रस से भरे हुए थे। वो बोली, "विकास, अगली बार फिर आना। देहाती लोक गीत superhit के साथ ये चुदाई भी superhit हो गई।" मैं दिल्ली लौट आया लेकिन यादें अब भी ताजा हैं। हर बार जब वो गाना सुनता हूं तो लंड खड़ा हो जाता है।
(यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है। 18+ केवल।)