
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में रहता हूँ, एक छोटे से फ्लैट में। उम्र मेरी 28 साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ। जिंदगी आम थी, सुबह ऑफिस, शाम को घर, कभी-कभी दोस्तों के साथ ड्रिंक। लेकिन फिर एक दिन मेरी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जिसने सब कुछ बदल दिया। वो मोड़ था फेसबुक की एक कवर पिक।
एक शाम मैं फेसबुक स्क्रॉल कर रहा था तो अचानक मेरी टाइमलाइन पर एक पिक्चर आई। नाम था अक्षरा सिंह। 25 साल की, बेहद खूबसूरत लड़की। उसकी कवर पिक में वो एक लाल साड़ी में खड़ी थी, कमर थोड़ी सी झुकी हुई, पीठ का बड़ा हिस्सा खुला हुआ, और पीछे से एक लड़का खड़ा था जिसका नाम नीटिक लिखा था। दोनों की पोज ऐसी थी कि लग रहा था जैसे कोई इंटीमेट मोमेंट कैप्चर किया गया हो। अक्षरा की आँखें बंद, होंठ हल्के खुले, और नीटिक के हाथ उसकी कमर पर। फोटो में इतना डिटेल था कि अक्षरा की गोरी त्वचा, उसके स्तनों की हल्की उभार और साड़ी के नीचे से दिख रही जांघें सब साफ दिख रही थीं।
मैंने तुरंत उसकी प्रोफाइल चेक की। अक्षरा दिल्ली में ही रहती थी, और नीटिक उसका बॉयफ्रेंड लगता था। लेकिन पिक में कुछ ऐसा सेक्सी वाइब था कि मैं कंट्रोल नहीं कर पाया। मैंने उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी। अगले दिन ही रिक्वेस्ट एक्सेप्ट हो गई।
हमारी बात शुरू हुई। पहले नॉर्मल, फिर धीरे-धीरे फ्लर्टिंग। अक्षरा बताती कि वो मॉडलिंग करती है और नीटिक फोटोग्राफर है। वो कवर पिक उन्हीं की शूटिंग की थी। बातें बढ़ीं तो अक्षरा ने मुझे बताया कि वो और नीटिक ओपन रिलेशनशिप में हैं। एक दिन अक्षरा ने मुझे मैसेज किया, “राहुल, तुम्हें मेरी वो कवर पिक पसंद आई ना? आओ मिलते हैं, कुछ और फोटोज दिखाती हूँ।”
मैं उसके घर पहुँचा। वो एक छोटे से अपार्टमेंट में रहती थी, साउथ दिल्ली में। दरवाजा खोला तो अक्षरा सामने खड़ी थी, सिर्फ एक शॉर्ट टॉप और टाइट जींस में। उसके स्तन टॉप में फिट नहीं हो पा रहे थे, निप्पल्स हल्के उभरे हुए। “आओ राहुल, अंदर आओ,” वो बोली।
हम अंदर गए। नीटिक भी वहाँ था, शर्टलेस, उसकी बॉडी पर मसल्स साफ दिख रहे थे। अक्षरा ने मुझे बैठाया और बोली, “राहुल, हमारी वो फोटो देखकर तुम्हारा क्या रिएक्शन था? सच बोलो।” मैंने हिचकिचाते हुए कहा, “बहुत हॉट लग रही थी अक्षरा, खासकर तुम्हारी गांड और चूत का आउटलाइन।”
अक्षरा हँसी और बोली, “आज हम तीनों मिलकर कुछ नया करते हैं।” वो मेरे पास आई और मेरे होंठों पर किस किया। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई। नीटिक पीछे से आया और अक्षरा की जींस उतारने लगा। अक्षरा की चूत साफ शेव की हुई थी, गीली हो चुकी थी।
मैंने अक्षरा को सोफे पर लिटाया। उसके टॉप उतारे तो उसके बड़े-बड़े स्तन बाहर निकल आए। निप्पल्स गुलाबी थे, मैंने एक को मुंह में लिया और चूसने लगा। अक्षरा चीख पड़ी, “आह्ह्ह राहुल, जोर से चूस, मेरे स्तन दुख रहे हैं।” नीटिक ने अपनी पैंट उतारी, उसका लंड 8 इंच का मोटा लंड था, खड़ा हो चुका था। वो अक्षरा की चूत में उंगली डालकर घुमाने लगा।
अक्षरा ने मुझे अपनी तरफ खींचा और बोली, “राहुल, पहले तुम मेरा मुंह चोदो।” मैं खड़ा हो गया, अक्षरा घुटनों के बल बैठ गई। उसने मेरा लंड निकाला, जो पहले से ही खड़ा था। उसने जीभ से लंड के सिरे को चाटा, फिर पूरा मुंह में ले लिया। “उम्म्म्म, राहुल तुम्हारा लंड स्वादिष्ट है,” वो बोली और जोर-जोर से चूसने लगी।
नीटिक पीछे से अक्षरा की गांड चाटने लगा। अक्षरा की चूत से रस टपक रहा था। “नीटिक, मेरी चूत चाट, अंदर तक जीभ डाल,” वो चिल्लाई। नीटिक ने उसकी चूत चाटी, फिर दो उंगलियां अंदर डाल दीं। अक्षरा का शरीर काँप रहा था।
फिर अक्षरा ने मुझे लेटाया और मेरे लंड पर बैठ गई। उसकी चूत गर्म और तंग थी। “आह्ह्ह, राहुल, पूरा लंड अंदर डाल, मेरी चूत फाड़ दो,” वो चीखी और ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने उसके स्तनों को पकड़कर दबाया।
नीटिक ने अक्षरा की गांड में अपनी उंगली डाली। “नीटिक, अब मेरी गांड मारो,” अक्षरा बोली। नीटिक ने लंड पर थूक लगाया और अक्षरा की गांड में घुसा दिया। अक्षरा दो लंडों के बीच सैंडविच हो गई। हम तीनों एक साथ चोदने लगे।
“चोदो मुझे, दोनों मिलकर मेरी चूत और गांड फाड़ दो,” अक्षरा चिल्ला रही थी। रस निकल रहा था, शरीर पसीने से तर हो गया था। मैंने अक्षरा को उल्टा करवाया, उसकी गांड ऊपर की और चूत में लंड घुसा दिया। नीटिक उसके मुंह में लंड डालकर चोदने लगा।
घंटों चला ये सेशन। अक्षरा को कई बार झड़ने का मजा आया। आखिर में मैंने अक्षरा की चूत में झड़ गया, नीटिक ने उसके स्तनों पर। अक्षरा ने सब चाट लिया।
हम तीनों थककर लेट गए। अक्षरा बोली, “ये हमारी नई फोटो शूट की शुरुआत है।”
(शेष विस्तार से: अगले हफ्ते हमने और शूटिंग की, जिसमें अक्षरा ने और भी गंदी पोज दीं। वो बार-बार मेरे और नीटिक के लंड चूसती, हम उसकी चूत और गांड बारी-बारी मारते। हर बार नई जगह पर – बालकनी पर, बाथरूम में, कार में। अक्षरा की चूत हमेशा गीली रहती, उसके स्तन लाल हो जाते चूसने से। नीटिक और मैं मिलकर उसे डबल पेनेट्रेशन देते। अक्षरा चीखती, “मेरी चूत का रस पी लो, गांड में और गहराई तक घुसाओ।” हमारी ये दोस्ती अब नियमित सेक्स में बदल चुकी थी। फेसबुक की वो कवर पिक ने मेरी जिंदगी बदल दी।)
(कहानी जारी रखते हुए विस्तार: हर मुलाकात पर अक्षरा नई-नई डर्टी बातें करती, जैसे “राहुल तुम्हारा लंड मेरी चूत में कितना अच्छा लगता है, नीटिक की लंड मेरी गांड में।” हम रात भर चोदते, पोज बदलते – डॉगी स्टाइल में अक्षरा की गांड थपथपाते, मिशनरी में उसके स्तनों पर झुककर चूमते। रस, पसीना, चीखें, सब कुछ मिलकर एक गर्म माहौल बनता। अक्षरा को मल्टीपल ऑर्गेज्म आते, वो बेहोश सी हो जाती। हम दोनों उसे संभालते और फिर से शुरू करते। दिल्ली की गर्म रातों में ये हमारी गुप्त दुनिया थी।)
(अंत: महीनों बाद अक्षरा ने नई कवर पिक लगाई जिसमें हम तीनों थे, लेकिन फेसबुक पर सिर्फ इशारा। असली मजा हम तीनों की निजी दुनिया में था।)