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Devon Ke Bhajan – Meri Chut Ki Aag — देखने योग्य

Devon Ke Bhajan – Meri Chut Ki Aag — देखने योग्य

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं दिल्ली के करोल बाग इलाके में रहता हूं। उम्र 32 साल, शादीशुदा लेकिन बीवी अक्सर मायके चली जाती है। घर में अकेला रहना मुझे बोर कर देता है। पिछले साल की बात है जब हमारे मोहल्ले में एक भजन मंडली शुरू हुई। हर शुक्रवार शाम को मंदिर में देवों के भजन गाए जाते थे।

मैं वहां जाता था क्योंकि आवाज सुनने में अच्छी लगती थी, लेकिन असली वजह थी रीमा। रीमा हमारे मोहल्ले की 28 साल की विधवा औरत थी। गोरी चमड़ी, भरे हुए स्तन जो ब्लाउज में अटे नहीं समाते थे, मोटी कमर और गोल-गोल नितंब जो साड़ी में लहराते रहते थे। उसकी आवाज भजन गाते समय इतनी मीठी लगती थी कि लंड खुद-ब-खुद खड़ा हो जाता।

एक शुक्रवार शाम भजन शुरू हुए। मंदिर में अंधेरा था, सिर्फ दीये जल रहे थे। रीमा देवों के भजन गा रही थी – “ओ प्रभु जी, तुम बिना जीना मुश्किल…” उसकी आंखें बंद, हाथ जोड़कर झूम रही थी। मैं उसके पीछे बैठा था। उसकी साड़ी की पल्लू सरक गई थी और ब्लाउज की चाक से सफेद चोली दिख रही थी। मेरी नजर उसकी छाती पर टिकी हुई थी।

भजन खत्म होने के बाद लोग चले गए। मैंने रुकने का बहाना किया। रीमा अकेली रह गई। मैंने कहा, “रीमा जी, आपका गाना सुनकर मन शांत हो जाता है।” वह मुस्कुराई और बोली, “अर्जुन भाई, आप भी अच्छा साथ देते हो।”

हम बातें करने लगे। अचानक बिजली चली गई। अंधेरा छा गया। रीमा डर गई और मेरी तरफ बढ़ी। उसका शरीर मुझसे सट गया। उसके स्तन मेरी छाती से दब गए। मैंने मौका देखते हुए उसकी कमर पकड़ ली। “रीमा, तुम्हारा शरीर बहुत गर्म है,” मैंने फुसफुसाया।

उसने कोई विरोध नहीं किया। मैंने उसका मुंह अपने मुंह से ढक लिया और जीभ से उसकी जुबान चूसने लगा। हम दोनों जोर-जोर से सांस ले रहे थे। मैंने उसके ब्लाउज के हुक खोले। दो भारी स्तन बाहर निकल आए। निप्पल सख्त और काले थे। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और जोर से चूसने लगा। रीमा आहें भरने लगी, “अर्जुन… धीरे…

Devon Ke Bhajan - Meri Chut Ki Aag — देखने योग्य

मंदिर में है ना… पर चूसो और जोर से… मेरी चूत गीली हो रही है।”

मैंने उसकी साड़ी ऊपर उठाई। अंदर पैंटी नहीं थी। उसकी गीली, बालों वाली चूत मेरी उंगलियों के नीचे आ गई। मैंने दो उंगलियां अंदर डालीं और तेजी से घुमाने लगा। रस बह रहा था। “देखो कितना पानी निकल रहा है तुम्हारी चूत से,” मैंने कहा। रीमा ने मेरी पैंट खोली और लंड बाहर निकाला। “कितना मोटा है तेरा लंड… देवों के भजन सुनते हुए ही चोद डाल मुझे,” वह बोली।

मैंने उसे मंदिर के फर्श पर लिटा दिया। उसकी टांगें फैलाईं। लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा और एक जोरदार झटके में पूरा अंदर घुसा दिया। “आह्ह्ह… फाड़ डाल मेरी चूत!” रीमा चीखी। मैंने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के में लंड पूरा बाहर निकालकर फिर अंदर मारता। उसकी चूत का रस मेरे लंड पर चिपक रहा था।

हम पांच मिनट तक इसी पोजीशन में चोदते रहे। फिर मैंने उसे घुमाया, कुत्ते वाली स्टाइल में। उसकी गोल गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने गांड के छेद में उंगली डाली और साथ ही चूत में लंड घुसाया। “तेरी गांड भी कितनी टाइट है… आज दोनों छेद चोदूंगा,” मैंने गंदी बातें करते हुए रफ चोदना शुरू किया।

रीमा जोर-जोर से चीख रही थी, “चोदो मुझे… भजन सुनते हुए चोदो… मेरी चूत फट रही है… लंड और गहरा मारो!” मैंने उसकी कमर पकड़कर तेजी से धक्के मारे। पसीना बह रहा था। हम दोनों की सांसें तेज थीं।

फिर मैंने उसे उठाया और दीवार से टिका दिया। उसकी एक टांग मेरी कमर पर। लंड फिर से चूत में घुसा। इस बार धीरे-धीरे घुमाते हुए चोदा ताकि हर इंच महसूस हो। रीमा के स्तन मेरे मुंह में थे। मैं चूसता और काटता। “तेरे स्तन दूध जैसे हैं… चूसूंगा पूरा,” मैंने कहा।

हम घंटे भर तक अलग-अलग पोजीशन में चोदते रहे। आखिर में मैंने उसकी चूत में ही झड़ने लगा। गर्म-गर्म वीर्य अंदर भर दिया। रीमा भी झड़ गई, उसकी चूत ने मेरे लंड को निचोड़ लिया।

हम दोनों थककर फर्श पर लेट गए। रीमा बोली, “अर्जुन, अब हर शुक्रवार को देवों के भजन के बाद ये ही होगा।”

उस रात के बाद से हर भजन सेशन के बाद हम मंदिर में ही छुपकर चुदाई करते। कभी उसकी गांड मारता, कभी मुंह में लंड डालकर चूसवाता। रीमा की चूत का स्वाद अब मेरी लत बन गई है। देवों के भजन सुनते हुए उसकी चूत चोदना सबसे बड़ा मजा है।

(कहानी यहीं खत्म नहीं होती, दोस्तों। अगले हफ्ते और भी गंदी चुदाई हुई जब बारिश में मंदिर बंद था और हम दोनों अकेले थे। रीमा ने मुझे अपनी गांड में लंड डालने को कहा और मैंने उसे चीख-चीखकर चोदा। उसकी चीखें भजन जैसी लग रही थीं। हम दोनों का पसीना, चूत का रस और वीर्य मिलकर फर्श गीला कर दिया। ये सिलसिला अभी भी चल रहा है।)

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