
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम श्याम है। मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव का रहने वाला हूं। उम्र मेरी पच्चीस साल है। गांव में जिंदगी बहुत सादी है, लेकिन यहां के रिश्ते और प्यार में इतनी गर्मी होती है कि कभी-कभी दिमाग घूम जाता है। आज मैं आपको अपनी एक सच्ची कहानी सुनाता हूं, जो पिछले साल की है। जब मैं गांव आया था छुट्टियों में, तभी मेरी मुलाकात हुई राधा से। राधा मेरी दूर की रिश्तेदार थी, उम्र उसकी बाईस साल। गांव में लोग उसे सुंदर और गोल-मटोल शरीर वाली लड़की कहते थे। उसके स्तन बड़े-बड़े थे, कमर पतली और गांड गोल-गोल। जब वह चलती थी तो उसके स्तन उछलते रहते थे और लोग पीछे से देखते रह जाते थे।
पहली मुलाकात गांव के कुएं के पास हुई। राधा पानी भर रही थी। मैंने नमस्ते किया तो उसने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। उसकी आंखों में कुछ अलग सी चमक थी। बातें शुरू हुईं। वह बताने लगी कि उसका पति शहर में काम करता है और महीने में एक बार आता है। राधा अक्सर अकेली रहती थी। धीरे-धीरे हमारी दोस्ती बढ़ी। गांव में प्यार करना आसान नहीं होता, जगह मिलना मुश्किल। लेकिन जब प्यार सिर चढ़कर बोलता है तो जगह ढूंढ ही लेते हैं। एक शाम हम दोनों खेतों के पास मिले। राधा ने कहा, “श्याम, मुझे बहुत अकेलापन लगता है।” मैंने उसके हाथ में हाथ डाला। उसका शरीर गर्म था। हम एक पुराने खेत के किनारे बने झोपड़ी में चले गए। वहां कोई नहीं था।
झोपड़ी के अंदर घुसते ही राधा ने मुझे गले लगा लिया। उसके बड़े स्तन मेरी छाती से सट गए। मैंने उसके होंठों पर अपना मुंह रखा और चूमने लगा। उसकी जुबान मेरी जुबान से लड़ने लगी। मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोले। अंदर से उसके काले ब्रा में बंद स्तन निकल आए। वे इतने बड़े थे कि मेरे दोनों हाथों में नहीं समा रहे थे। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। राधा सिसकारियां भरने लगी, “आह्ह श्याम, जोर से चूसो, मेरे स्तन फट रहे हैं।” मैं दूसरे स्तन को हाथ से दबा रहा था। उसके निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने उन्हें काटा तो वह चीख पड़ी, “अरे साले, दर्द हो रहा है लेकिन मजा भी आ रहा है।”
राधा ने मेरी पैंट खोली और मेरा लंड बाहर निकाला। मेरा लंड सात इंच का मोटा था, नसें उभरी हुई। राधा ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी। “कितना बड़ा है तेरा लंड, मेरे पति से दोगुना।” उसने उसे मुंह में लिया और चूसने लगी। उसकी जुबान मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी। लार टपक रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर उसके मुंह में जोर-जोर से ठेलना शुरू किया। “ले राधा, पूरा लंड ले, तेरी चूत आज फाड़ दूंगा।” वह गले तक ले रही थी।
फिर मैंने उसे लिटाया। उसकी साड़ी ऊपर उठाई। अंदर पेटीकोट था। मैंने उसे भी खींचा। उसकी चूत सामने थी, साफ शेव की हुई, होंठ गुलाबी और रस से भीगी हुई। मैंने अपनी उंगली उसके चूत के अंदर डाली। वह गीली थी। “आह्ह, श्याम, उंगली मत डाल, सीधा लंड डाल।” लेकिन मैंने पहले जीभ से चाटना शुरू किया। उसकी चूत का स्वाद खट्टा-मीठा था। मैंने उसके क्लिटोरिस को चूसा तो वह कांपने लगी। “मर गई रे, चाटते रह, तेरी जीभ से मेरा पानी निकल रहा है।”
मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और धीरे से धकेला। सिरा अंदर गया। राधा चीखी, “आह्हह, मोटा है तेरा, धीरे डाल।” मैंने जोर लगाया और पूरा लंड घुसा दिया। उसकी चूत गरम और तंग थी। मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। “थाप थाप” की आवाजें आने लगीं। राधा के स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें हाथों में लिया और दबाते हुए जोर-जोर से चोद रहा था। “ले ले मेरी राधा, तेरी चूत आज फट जाएगी।” वह बोल रही थी, “हां चोद मुझे, गांव में कोई नहीं है, जोर से चोद।”
हमने कई पोजीशन आजमाई। पहले मिशनरी में चोदा, फिर राधा को कुत्ते जैसी पोजीशन में किया। उसकी गांड मेरे सामने थी। मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारा, लाल निशान पड़ गए। फिर लंड उसकी चूत में डाला और पीछे से ठोकने लगा। “आह्ह श्याम, मेरी गांड भी मार, लेकिन पहले चूत फाड़।” मैंने उसकी गांड के छेद में उंगली डाली। वह और जोर से चीखी।
हम घंटों चोदते रहे। राधा का पानी तीन बार निकला। मेरे लंड पर उसका रस चिपक गया था। आखिर में मैंने उसके मुंह में लंड डालकर अपना माल निकाला। वह सब पी गई। “तेरा माल मीठा है।”
इसके बाद गांव में कई जगह मिलते रहे। खेतों में, उसके घर में जब पति नहीं होता, नहर के किनारे। हर बार नई-नई गंदी बातें, नई पोजीशन। एक बार बारिश में नंगे होकर चोदा। पानी गिर रहा था और हम चोद रहे थे। राधा बोलती, “जब प्यार करे तो गांव में जगह ढूंढनी पड़ती है, लेकिन मजा दोगुना आता है।”
हमारी ये कहानी कई महीनों चली। अब भी जब गांव जाता हूं तो राधा मिलती है और हम पुरानी यादें ताजा करते हैं। गांव का प्यार ऐसा होता है कि भूलता नहीं।
(कहानी पूरी हुई, लेकिन याद रखना दोस्तों, ये सब फिक्शन है और १८+ के लिए।)