
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अक्षत है। मैं दिल्ली में एक छोटे से फ्लैट में रहता हूं और एक आईटी कंपनी में जॉब करता हूं। उम्र मेरी 28 साल है। मेरी कहानी शुरू होती है वाटपैड पर एक रोमांटिक स्टोरी पढ़ने से, जहां मुझे गुड्डन नाम की एक लड़की मिली। उसकी कहानियां इतनी गर्म और गंदी थीं कि मैं हर रात उनको पढ़कर हिलाता था। लेकिन असली मजा तब आया जब हमने चैट से आगे बढ़कर मिलने का प्लान बनाया। गुड्डन असल में मेरी ऑफिस की ही एक सहकर्मी निकली, जिसका असली नाम गुड़िया था लेकिन वह खुद को गुड्डन कहती थी।
हम दोनों की पहली मुलाकात ऑफिस पार्टी में हुई। वो पहनी हुई थी टाइट जींस और ब्लाउज जिसमें उसके बड़े-बड़े स्तन साफ दिख रहे थे। उसकी कमर पतली थी और गोल-गोल गांड इतनी भारी कि देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया। हमने ड्रिंक की और बातें बढ़ीं। रात को जब सब चले गए तो हम दोनों उसके PG के पास वाले पार्क में बैठे। गुड्डन ने कहा, “अक्षत, तुम्हारी चैट्स पढ़कर मेरी चूत रोज भीग जाती है।” मैंने तुरंत उसका हाथ पकड़ा और बोला, “गुड्डन, आज रात तुम्हें चोदना है, तुम्हारी चूत फाड़ दूंगा।”
वो हंस पड़ी और बोली, “चलो मेरे रूम चलते हैं।” हम स्कूटर पर उसके PG पहुंचे। रूम छोटा था, बेड पर चादर बिछी हुई, बाहर मॉनसून की बारिश हो रही थी। जैसे ही दरवाजा बंद किया, मैंने उसे दीवार से लगाकर चूम लिया। उसके होंठ नरम थे, जीभ आपस में उलझ गई। मैंने उसका ब्लाउज उतारा, ब्रा के अंदर उसके मोटे स्तन थे, निप्पल सख्त और काले। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा, दूसरा हाथ से दबा रहा था। गुड्डन चीख रही थी, “अक्षत, और जोर से चूसो, मेरे स्तनों को काट लो।”
मैंने उसकी जींस उतारी, पैंटी गीली थी। मैंने उंगली डाली तो उसकी चूत से रस निकल रहा था। वो बोली, “मेरा लंड चूसो, जल्दी।” मैंने अपना लंड निकाला, 7 इंच का मोटा लंड, नसें उभरी हुई। उसने घुटनों के बल बैठकर लंड मुंह में लिया। उसकी जीभ लंड पर घूम रही थी, गला लगाकर पूरा अंदर ले रही थी। “गुड्डन, तेरी चूत में डालूं?” मैंने पूछा। वो बोली, “हां, मेरी चूत फाड़ दो, मुझे चोदो।”
मैंने उसे बेड पर लिटाया, टांगें फैलाईं। उसकी चूत गुलाबी थी, बाल कटे हुए। मैंने लंड सिर पर रखा और एक झटके में आधा अंदर घुसा दिया। गुड्डन चीखी, “आह्ह्ह, लंड मोटा है, धीरे।” लेकिन मैंने जोर लगाया और पूरा लंड अंदर कर दिया। चूत का रस लंड पर बह रहा था। मैं धीरे-धीरे चोदने लगा, फिर तेज। “चोदो मुझे, अक्षत, मेरी चूत तड़पा दो,” वो चिल्ला रही थी। मैंने उसकी गांड थपथपाई, लंड को पूरा बाहर निकालकर जोर से ठोकने लगा।
हम पोजीशन बदलते रहे। पहले मिशनरी, फिर डॉगी स्टाइल। मैंने उसकी गांड पकड़ी और लंड पीछे से मारा। उसकी गांड लाल हो गई थी थप्पड़ों से। “गुड्डन, तेरी गांड भी चोदूं?” मैंने कहा। वो बोली, “हां, लेकिन पहले चूत भर दो।” मैंने उसकी चूत में झड़ने लगा, गर्म रस अंदर भर दिया। लेकिन लंड अभी भी खड़ा था।
दूसरी राउंड में मैंने उसकी गांड में उंगली डाली, फिर लंड। वो चीख रही थी, “गांड फट रही है, लेकिन और जोर से।” लंड गांड में घुसा, वो टाइट थी। मैंने रस लगा कर चोदा। बाहर बारिश जोर से हो रही थी, कमरे में सिर्फ हमारी चुदाई की आवाजें आ रही थीं – “छप छप, थप थप”।
हम पूरी रात चोदते रहे। सुबह तक उसकी चूत और गांड दोनों लाल हो चुकी थीं, रस से भरी हुई। गुड्डन ने कहा, “अक्षत, ये वाटपैड वाली रोमांस असली बन गया। अब रोज चोदना।”
(कहानी जारी रखते हुए विस्तार से: अगले दिन ऑफिस में हमारी नजरें मिलतीं तो दोनों को याद आता वो रात। एक हफ्ते बाद फिर मिले उसके रूम में। इस बार वो लाल साड़ी में थी। साड़ी उठाकर मैंने सीधे चूत चाटी। उसका स्वाद खट्टा-मीठा। लंड चूसते हुए वो बोली, “तेरा लंड मेरी चूत का राजा है।” हमने सोफे पर चोदा, फिर फर्श पर। उसने ऊपर चढ़कर लंड पर कूदना शुरू किया, उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें दबाया। “जोर से कूद, मेरी रानी,” मैंने कहा। वो चीखती, “मेरा पानी निकाल दो।” हम दोनों एक साथ झड़ गए।
इसके बाद हमारी मुलाकातें बढ़ गईं। कभी उसके PG में, कभी मेरे फ्लैट में। एक बार मॉनसून में छत पर चोदा। बारिश में नंगे होकर, उसकी चूत में लंड डालकर खड़े-खड़े चोदा। पानी गिर रहा था हमारे शरीर पर, लेकिन अंदर की आग और बढ़ रही थी। गुड्डन की चूत हमेशा तैयार रहती, “अक्षत, लंड दे दो, मैं पागल हो रही हूं।”
हमने हर पोजीशन ट्राई की – 69, साइड में, दीवार से लगाकर। उसकी गांड में लंड डालते वक्त वो जोर-जोर से चीखती, “गांड़ मारो, मुझे गंदी लड़की बनाओ।” मैं उसकी चूत चाटता, रस पीता। वो मेरे अंडकोष चूसती। पूरी कहानी में हमारी चुदाई 5-6 बार हुई हर मुलाकात में, हर बार 2-3 घंटे लंबी।
अंत में, गुड्डन ने कहा, “अक्षत, ये रोमांस कभी खत्म न हो।” हम आज भी मिलते हैं और चोदते हैं, जैसे वाटपैड की कहानी असली जिंदगी बन गई।