नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में रहता हूँ, एक छोटे से फ्लैट में। उम्र मेरी पच्चीस साल की है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ। ये कहानी मेरी असली जिंदगी की है, जब मैं अपनी सबसे हॉट रमना आंटी के साथ चुदाई के उन लम्हों में खो गया था। रमना आंटी मेरी माँ की दूर की रिश्तेदार थीं, लेकिन घर में सब उन्हें आंटी ही कहते थे। वो तैंतीस साल की थीं, शादीशुदा लेकिन पति अक्सर विदेश में रहता था। उनका फिगर ऐसा था कि कोई भी मर्द एक नजर में उनकी तरफ खिंच जाए। भारी-भारी स्तन, मोटी-मोटी जांघें, गोल-गोल गाँड़ और चेहरा ऐसा कि जैसे कोई मॉडल हो।
एक दिन माँ ने मुझे कहा कि रमना आंटी के घर कुछ सामान ले जाना है। वो पास ही के सेक्टर में रहती थीं। मैं स्कूटर लेकर पहुँचा तो दरवाजा खुला और रमना आंटी सामने खड़ी थीं। साड़ी पहनी हुई थी, लेकिन ब्लाउज इतना टाइट कि उनके स्तन बाहर आने को बेताब लग रहे थे। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे राहुल, अंदर आ जा बेटा।” मैं अंदर गया तो एयर कंडीशनर चल रहा था, लेकिन उनकी गर्माहट पूरे कमरे में फैली हुई थी।
हम बातें करने लगे। रमना आंटी ने पूछा कि जॉब कैसी चल रही है। मैं जवाब दे रहा था लेकिन मेरी नजर बार-बार उनके स्तनों पर जा रही थी। उन्होंने देख लिया और हल्के से हँस पड़ीं। “क्या देख रहा है राहुल? आंटी को इस तरह घूर रहा है?” मैं शर्मा गया। उन्होंने कहा, “कोई बात नहीं, आंटी भी अकेली रहती है। पति महीनों नहीं आता।” फिर उन्होंने मेरे हाथ पर हाथ रखा। उनकी उंगलियाँ गर्म थीं।
धीरे-धीरे बातें गंदी होने लगीं। रमना आंटी ने कहा, “तुम्हारा लंड कितना बड़ा है बेटा? आंटी को दिखाओ ना।” मैं हैरान हो गया लेकिन लंड पहले से ही खड़ा हो चुका था। उन्होंने मुझे खींचकर सोफे पर लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर बैठ गईं। साड़ी ऊपर खिसक गई, उनकी चूत की गर्माहट मेरे लंड पर महसूस हुई। उन्होंने कहा, “आज आंटी तुझे अपनी चूत का स्वाद चखाती हूँ।”
रमना आंटी ने ब्लाउज के हुक खोले। उनके स्तन बाहर निकल आए, बड़े-बड़े, काले-काले निप्पल। उन्होंने मेरा सिर दबाकर अपने स्तन मुंह में ठूंस दिया। “चूस ले मेरे स्तन, चूस ले!” मैं जोर-जोर से चूस रहा था, दूध नहीं था लेकिन स्वाद ऐसा कि पागल हो रहा था। उन्होंने मेरी पैंट खोली और लंड बाहर निकाला। “वाह, कितना मोटा लंड है! आंटी की चूत फाड़ देगा ये।” उन्होंने लंड को हाथ में लिया और ऊपर-नीचे करने लगीं। फिर मुंह में ले लिया। जीभ घुमाते हुए चूस रही थीं, “उम्म्म… कितना स्वादिष्ट है तेरा लंड।”
मैंने भी उनकी साड़ी पूरी उतार दी। अब वो सिर्फ पेटीकोट में थीं। मैंने पेटीकोट का नाड़ा खोला। उनकी चूत सामने थी, गीली-गीली, बाल कटे हुए। मैंने उंगली डाली तो रस बह रहा था। “आंटी की चूत देख, कितनी गीली है तेरे लिए।” मैंने मुंह लगाया और चाटने लगा। उनकी चूत का स्वाद खट्टा-मीठा था। उन्होंने सिर दबाया, “और गहराई से चाट, हाँ… यहीं…

मेरी चूत फट रही है!”
फिर रमना आंटी ने मुझे लिटाया और खुद मेरे लंड पर बैठ गईं। लंड धीरे-धीरे उनकी चूत में घुसने लगा। “आह्ह… कितना मोटा है! आंटी की चूत फट जाएगी!” उन्होंने पूरी तरह बैठकर लंड अंदर ले लिया। फिर ऊपर-नीचे होने लगीं। उनके स्तन उछल रहे थे। मैं उनके स्तन दबा रहा था। “चोद मुझे राहुल, जोर से चोद! आंटी की चूत को फाड़ डाल!”
हमने पोजीशन बदली। मैंने उन्हें कुत्ते वाली स्टाइल में करवाया। उनकी गाँड़ ऊपर थी, चूत पीछे से साफ दिख रही थी। मैंने लंड पीछे से ठोंका। “आह्ह… गाँड़ भी मार ले बेटा!” उन्होंने कहा। मैंने उनकी गाँड़ के छेद में भी उंगली डाली। रमना आंटी चीख रही थीं, “दोनों छेद भर दे मेरे! चोद, चोद!”
हम घंटों चोदते रहे। रस निकल रहा था, चूत से और लंड से। रमना आंटी ने कहा, “मेरा मुँह में डाल, रस पी जाऊँगी!” मैंने लंड उनके मुंह में दिया और झड़ गया। उन्होंने सब पी लिया। फिर उन्होंने मुझे चाट-चाटकर साफ किया।
रात भर हमने अलग-अलग तरीकों से चोदा। सुबह तक रमना आंटी थक चुकी थीं लेकिन खुश। उन्होंने कहा, “अब ये आंटी तेरा ही रहेगा। जब चाहे आ जाना।”
ये मेरी सबसे हॉट याद है। रमना आंटी के साथ हर मुलाकात नई चुदाई की शुरुआत होती है। उनकी चूत, उनके स्तन, उनकी गाँड़… सब कुछ अब मेरा है।