नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में रहता हूं जहां खेतों की हरियाली और मिट्टी की खुशबू से पूरा माहौल भरा रहता है। मेरे परिवार के पास काफी जमीन है और खासकर दौड़े की खेती हम करते हैं। दौड़े यानी वो हरे-भरे लंबे सब्जी वाले पौधे जो फैलकर पूरे खेत को ढक लेते हैं। गर्मियों में जब फसल तैयार होती है तो खेत एकदम घना हो जाता है, अंदर छुपने की जगह ढेर सारी बन जाती है।
पिछले साल की बात है। मेरी उम्र इक्कीस साल की थी और मैं कॉलेज से छुट्टियों में गांव आया हुआ था। गांव में सब कुछ धीमा चलता है लेकिन मेरी चुदाई की भूख तेज थी। रोज सुबह खेतों में घूमता, मजदूरों को देखता और मन में सोचता कि काश कोई ऐसी औरत मिल जाए जो मेरे लंड को चूसे और अपनी गीली चूत में ठूसने दे।
एक दोपहर मैं दौड़े की क्यारी के पास गया। सूरज तेज था लेकिन खेत के अंदर छांव अच्छी थी। अचानक मुझे आवाज आई। पास ही एक औरत बैठी हुई थी। वो थी रेखा भाभी, हमारे पड़ोसी की पत्नी। उम्र करीब अट्ठाईस साल, शरीर भरा हुआ, मोटी मोटी जांघें, भारी भारी स्तन जो ब्लाउज में अटककर बाहर निकलने को बेताब लग रहे थे। पेटीकोट में उनकी गोल-गोल गांड साफ दिख रही थी। वो दौड़े तोड़ रही थीं और पसीने से उनका ब्लाउज गीला हो चुका था।
मैं पास गया और बोला, “भाभी, अकेली क्या कर रही हो?”
रेखा भाभी मुस्कुराई और बोली, “अरे राहुल, खेत में घूम रहा है क्या? दौड़े की क्यारी में छुपकर आराम कर ले।”
उनकी आवाज में कुछ नशा सा था। मैं उनके पास बैठ गया। बातें शुरू हुईं। उन्होंने बताया कि उनके पति शहर गए हुए हैं और वो अकेली खेत संभाल रही हैं। जैसे-जैसे बात आगे बढ़ी, उनकी नजर मेरे लंड पर पड़ने लगी जो पैंट में फूल रहा था।
रेखा भाभी ने अचानक हाथ बढ़ाकर मेरे लंड को छुआ और बोली, “अरे वाह, इतना सख्त हो गया है? दौड़े की क्यारी में तो कोई नहीं आएगा, चुपके से चोद ले मुझे।”
मैं हैरान रह गया लेकिन तुरंत उनके स्तनों पर हाथ मार दिया। ब्लाउज के बटन खोले तो अंदर से भारी-भारी, काले-काले निप्पल वाले स्तन बाहर निकल आए। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। रेखा भाभी सिसकारियां मारने लगीं, “आह्ह्ह…

राहुल, चूस ले मेरे मम्मे, तेरी भाभी की चूत प्यासी है।”
हम दोनों दौड़े के पौधों के बीच घुस गए जहां कोई देख नहीं सकता था। मैंने उनकी साड़ी ऊपर उठाई, पेटीकोट नीचे सरकाया। उनकी चूत पूरी तरह गंजी थी, होंठ मोटे और रस से चमक रहे थे। मैंने उंगली डाली तो अंदर से गरम-गरम रस बह रहा था। “भाभी, तुम्हारी चूत कितनी गीली है,” मैंने कहा।
रेखा भाभी ने मेरी पैंट खोली और मेरा लंड बाहर निकाला। वो मोटा, नसों से भरा और सिरे पर पानी छोड़ रहा था। उन्होंने तुरंत मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगीं। “चूस भाभी, पूरा लंड गले तक ले ले,” मैंने उनके बाल पकड़कर कहा। उनकी जीभ मेरे लंड के नीचे घूम रही थी, थूक से सब गीला हो रहा था।
फिर मैंने उन्हें पीठ के बल लिटाया, उनकी जांघें फैलाईं और अपना लंड उनकी चूत पर रगड़ने लगा। “डाल दे राहुल, अब और मत सत<|eos|>