नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली से हूँ लेकिन हर साल गर्मियों में अपने गाँव जाता हूँ। गाँव का नाम है बरेली के पास एक छोटा सा गाँव, जहाँ खेत, पेड़ और खुली हवा सब कुछ है। पिछले साल जब मैं गया तो मेरी जिंदगी ही बदल गई। वहाँ एक लड़की मिली, नाम था सीमा। उम्र उसकी बाईस साल थी, गाँव की सबसे सुंदर और गरम लड़की। गोरी नहीं, हल्की साँवली, लेकिन शरीर ऐसा कि देखते ही लंड खड़ा हो जाए। बड़ी-बड़ी आँखें, मोटे होंठ, और छाती पर दो भारी स्तन जो ब्लाउज में फटते लगते थे।
एक दोपहर मैं खेतों की तरफ घूम रहा था। गेहूँ के खेत हरे-भरे थे, हवा में मिट्टी की खुशबू। अचानक मुझे सीमा दिखी। वो अकेली खेत में पानी भर रही थी, नहर से। उसने साड़ी को घुटनों तक उठा रखा था, टाँगें चमक रही थीं, और पीछे से उसकी गोल-गोल गांड साफ दिख रही थी। मैं रुक गया। उसने मुझे देखा और मुस्कुराई।
“अरे राहुल भैया, आ गए गाँव?” उसने कहा, आवाज में कुछ शरारत थी।
“हाँ सीमा, तू यहीं है?” मैं पास गया। हम बातें करने लगे। धीरे-धीरे बातें गंदी होने लगीं। सीमा ने बताया कि वो अक्सर खेत में अकेली आती है क्योंकि घर में सब नाक-भौं सिकोड़ते हैं। “यहाँ खुली हवा में मन करता है कुछ करने को,” उसने कहा और मेरी तरफ आँख मार दी।
मैं समझ गया। मैंने उसका हाथ पकड़ा। “सीमा, तू बहुत हॉट है।” उसने हँसते हुए कहा, “तो फिर क्या इंतजार कर रहा है? कहीं कोई देख लेगा तो?”
हम दोनों गेहूँ के खेत में घुस गए। पेड़ों की छाँव में एक जगह थी जहाँ कोई नहीं आता। सीमा ने साड़ी नीचे गिरा दी। उसका ब्लाउज और पेटीकोट ही बचा था। मैंने तुरंत उसे खींचा और चूमने लगा। उसके होंठ नरम और गर्म थे। जीभ से जीभ लड़ रही थी। मैंने उसके स्तनों को हाथ में लिया। भारी थे, जैसे दो बड़े आम। निप्पल सख्त हो चुके थे। ब्लाउज के बटन खोले तो सीमा की नंगी छाती सामने आ गई। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। “आह्ह्ह राहुल… चूस ले, और जोर से,” वो चीखी।
मैंने उसकी साड़ी पूरी उतार दी। अब वो सिर्फ पेटीकोट में थी। मैंने पेटीकोट भी खींचा। उसकी चूत साफ नजर आई। बाल कटे हुए थे, होंठ फूले हुए, और अंदर से गीली चमक रही थी। “देख, कितनी गीली हो गई हूँ तेरे लिए,” सीमा ने कहा। मैंने अपनी उंगली उसकी चूत में डाली। गरम और चिपचिपी। “उम्म्म… और डाल,” वो बोली। मैं दो उंगलियाँ डालकर अंदर-बाहर करने लगा। सीमा की सांस तेज हो गई। “अब लंड निकाल, मुझे चोद,” उसने सीधा कहा।
मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड खड़ा था, नसें फूली हुई, सिरा लाल। सीमा ने उसे हाथ में लिया। “कितना मोटा है, गाँव के लड़कों से तो बड़ा है।” उसने मुंह में लिया। जीभ से चाटते हुए चूसने लगी। “थूक लगा के चूस,” मैंने कहा। वो थूक लगाकर जोर-जोर से चूसने लगी। लंड पूरा गला तक ले जा रही थी।
फिर मैंने उसे नीचे लिटाया। खेत की मिट्टी नरम थी। मैं उसके ऊपर चढ़ा। लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा। “डाल दे, फाड़ दे मेरी चूत,” सीमा चीखी। मैंने एक झटका मारा। लंड आधा अंदर घुस गया। “आह्ह्ह… दर्द हो रहा,” वो बोली। मैं रुका, फिर धीरे-धीरे पूरा डाल दिया। चूत तंग थी, मसल्स लंड को कस रही थीं। “बड़ी तंग चूत है तेरी,” मैंने कहा।
अब जोर-जोर से चोदने लगा। “छोड़… छोड़… छोड़,” सीमा चिल्ला रही थी। हर धक्के पर उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें हाथों से दबाया। पसीना दोनों के शरीर पर बह रहा था। मिट्टी और पसीने की महक। “और जोर से चोद मुझे, गांड भी मार,” सीमा ने कहा। मैंने उसे घुमाया, कुत्ते वाली स्टाइल में। गांड ऊपर उठा के रखी। लंड पीछे से डाला। “गांड़ मार, पूरी गांड़ फाड़,” वो बोली। मैंने गांड के छेद में उंगली डाली, फिर लंड निकालकर थोड़ा गांड़ में लगाया। “धीरे,” वो बोली, लेकिन मैंने धक्का मारा। गांड़ भी तंग थी।
हम दोनों खेत में घंटों चोदते रहे। सीमा ने मुझे उल्टा लिटाया और मेरे ऊपर चढ़ गई। “अब मैं चोदूंगी,” उसने कहा। वो मेरे लंड पर बैठ गई और कूदने लगी। स्तन उछल रहे थे। “ले, ले मेरा लंड पूरी चूत में,” मैं बोल रहा था। सीमा चीख रही थी, “मेरा रस निकल रहा है… आह्ह्ह… चोद…

चोद।”
हमने कई पोजीशन आजमाई। खड़े होकर, बैठकर, और लेटकर। आखिर में मैंने सीमा की चूत में झड़ने लगा। गरम-गरम माल अंदर भर दिया। सीमा भी झड़ गई, उसकी चूत सिकुड़ रही थी। “बहुत मोटा माल भरा है,” वो बोली।
फिर हम दोनों नंगे लेटे रहे। हवा ठंडी लग रही थी। सीमा ने कहा, “कल फिर आना, खेत में मिलेंगे।”
ये कहानी सच है दोस्तों। उस दिन से हर बार गाँव जाता हूँ तो सीमा से मिलता हूँ। खेत हमारा गुप्त जगह बन गया। सीमा की चूत, गांड़, स्तन सब याद हैं। अगर और डिटेल चाहिए तो बताना।