
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली के करोल बाग इलाके में रहता हूँ और एक छोटी सी प्रोडक्शन कंपनी में असिस्टेंट डायरेक्टर की जॉब करता हूँ। आज मैं आपको अपनी असली कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो मेरी जिंदगी का सबसे गंदा और मस्त चुदाई वाला एपिसोड है। सब कुछ शुरू हुआ अक्षरा नाम की लड़की से। अक्षरा हमारे टीवी सीरियल की हीरोइन थी, उम्र करीब २८ साल, गोरी चमड़ी, भारी-भरी छातियाँ, गोल-गोल गांड और वो चलते वक्त इतना झूम-झूम के चलती कि कोई भी मर्द उसकी तरफ देखे बिना नहीं रह सकता।
आज का एपिसोड शूटिंग के लिए हम लोग स्टूडियो में थे। सीरियल का नाम था “अक्षरा का नाटक” और आज का शूट काफी लंबा था। रात के १० बजे तक शूटिंग चली। सब लोग थक चुके थे। अक्षरा भी थकी हुई लग रही थी। वो लाल रंग की टाइट टॉप और जींस पहने हुई थी। टॉप इतना टाइट था कि उसकी ब्रा की लाइन साफ दिख रही थी और छातियों के ऊपर दो मोटी-मोटी उभार साफ नजर आ रहे थे।
शूटिंग खत्म होने के बाद सब लोग चले गए। सिर्फ मैं और अक्षरा स्टूडियो में रह गए क्योंकि उसको अपने डायलॉग्स रिवाइज करने थे। मैंने लाइट्स बंद कर दीं और सिर्फ एक छोटी सी टेबल लैंप जला के रखी। अक्षरा सोफे पर बैठी थी और स्क्रिप्ट पढ़ रही थी। मैं उसके पास बैठ गया।
“राहुल, आज का एपिसोड कैसा लगा?” उसने पूछा। उसकी आवाज थोड़ी भारी थी।
“बहुत अच्छा लगा अक्षरा, खासकर जब तुम रो रही थीं तो तुम्हारी छातियाँ इतनी हिल रही थीं कि मेरा लंड खड़ा हो गया,” मैंने सीधा बोल दिया।
अक्षरा हंस पड़ी और बोली, “साली, तुम भी ना। हमेशा गंदी बातें करते हो।”
लेकिन वो हट नहीं रही थी। मैंने उसका हाथ पकड़ा और कहा, “अक्षरा, आज तुम्हें सच में चोदना है। तुम्हारी ये मोटी छातियाँ और ये रसीली गांड देख के मैं कंट्रोल नहीं कर पा रहा।”
उसने कोई जवाब नहीं दिया, बस मेरी तरफ देखती रही। मैंने हिम्मत करके उसके होंठों पर अपना मुंह लगा दिया। वो भी गर्म हो चुकी थी। हम दोनों जोर-जोर से चूमने लगे। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस आई और हम दोनों एक दूसरे का लार पीने लगे।
मैंने उसकी टॉप ऊपर उठाई। अंदर काली ब्रा थी। मैंने ब्रा का हुक खोला और उसकी दोनों भारी छातियाँ बाहर आ गईं। गोरे-गोरे, निप्पल्स गुलाबी और खड़े हो चुके थे। मैंने एक छाती मुंह में ली और चूसने लगा। अक्षरा सिसकारियां मारने लगी, “आह्ह्ह राहुल… चूसो मेरी छाती को… और जोर से काटो निप्पल को…”
मैंने दूसरी छाती भी चूस ली और हाथ से उसकी जींस का बटन खोला। जींस नीचे उतारी तो अंदर पिंक कलर की पैंटी थी। पैंटी के बीचों-बीच गीला धब्बा लग चुका था। मैंने पैंटी उतारी और उसकी चूत देखी। चूत पूरी गंजी थी, होंठ मोटे-मोटे, और बीच में से चमकता हुआ रस बह रहा था।
“अक्षरा, तेरी चूत कितनी गीली है,” मैंने कहा और उंगली अंदर डाल दी। वो चीख पड़ी, “आह्ह्ह… उंगली मत डाल… सीधा लंड डाल ना… आज मुझे अच्छे से चोद।”
मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड ७ इंच का, मोटा और खड़ा हो चुका था। अक्षरा ने उसे हाथ में लिया और ऊपर-नीचे करने लगी। “कितना मोटा है तेरा लंड… आज मेरी चूत फाड़ देगा,” वो बोली।
मैंने उसे सोफे पर लिटाया, उसके पैर फैलाए और अपना लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा। धीरे से दबाया। लंड का सिरा अंदर घुसा। अक्षरा चीखी, “आह्ह्ह… धीरे… मोटा है…” लेकिन मैंने जोर लगाया और आधा लंड अंदर घुस गया। उसकी चूत बहुत टाइट थी। रस बह रहा था।
मैंने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। “चोद रहा हूँ तेरी चूत… ले… ले मेरा लंड…” अक्षरा भी चिल्ला रही थी, “हाँ राहुल… और जोर से चोद… मेरी चूत फाड़ डाल… आज का एपिसोड पूरा चोद के खत्म कर…”
हम १० मिनट तक इसी पोजीशन में चोदते रहे। फिर मैंने उसे उल्टा कर दिया। उसकी गांड ऊपर उठ गई। मैंने उसकी गांड के छेद पर थूक लगाया और लंड घुसा दिया। अक्षरा चीख पड़ी, “आह्ह्ह… गांड मत मार… दर्द हो रहा…” लेकिन मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे लंड पूरी गांड में घुसा और मैं गांड मारने लगा।
“ले… तेरी गांड चोद रहा हूँ… कितनी टाइट है तेरी गांड…” मैं बोलता रहा। अक्षरा का सर हिल रहा था। वो चीख रही थी, “हाँ… गांड चोद… मेरा रस निकाल दो…”
फिर मैंने उसे घुमाया और मिशनरी पोजीशन में चोदा। उसके पैर मेरे कंधों पर रखे। लंड चूत में पूरा घुस-घुस के निकालता। चूत से “चप-चप” की आवाज आ रही थी। अक्षरा का रस मेरे लंड पर लग चुका था।
“अक्षरा, मैं झड़ने वाला हूँ,” मैंने कहा।
“अंदर ही झड़… मेरी चूत में अपना गरम माल भर दे…” वो बोली।
मैंने आखिरी जोरदार धक्का मारा और अपना सारा माल उसकी चूत में छोड़ दिया। गरम-गरम वीर्य उसकी चूत में भर गया। अक्षरा भी झड़ गई। उसकी चूत सिकुड़ रही थी और रस निकल रहा था।
हम दोनों थक चुके थे। लेकिन अक्षरा ने कहा, “राहुल, एक बार और… आज का एपिसोड पूरा करना है।”
मैंने फिर लंड खड़ा किया। इस बार उसने ऊपर चढ़ के चोदना शुरू किया। उसकी छातियाँ मेरे मुंह के सामने लटक रही थीं। वो ऊपर-नीचे हो रही थी और बोल रही थी, “ले… ले मेरा वजन… चोद ले मेरी चूत…”
हमने पूरी रात चोदा। सोफे पर, फर्श पर, यहां तक कि स्टूडियो के मेकअप रूम में भी। अक्षरा की चूत, गांड, मुंह सब जगह मेरा लंड गया। वो बार-बार झड़ती रही।
सुबह ५ बजे जब हम अलग हुए तो अक्षरा ने कहा, “राहुल, ये हमारा सीक्रेट रहेगा। अगले एपिसोड में भी ऐसे ही मस्ती करेंगे।”
मैं घर आ गया। आज भी याद करके मेरा लंड खड़ा हो जाता है। अक्षरा का नाटक आज का एपिसोड सच में यादगार बन गया।
(कहानी पूरी हुई।)