नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम नितिन है। मैं दिल्ली में रहता हूँ और एक छोटी सी आईटी कंपनी में जॉब करता हूँ। मेरी उम्र 28 साल है। आज मैं आपको अपनी जिंदगी की सबसे गंदी और मस्त चुदाई की कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो अक्षरा और नैतिक के बीच हुई। अक्षरा मेरी ऑफिस की सहकर्मी है, 26 साल की, बेहद गोरी, मोटी-मोटी जांघें, 36 साइज के भारी-भरे स्तन और गोल-गोल गुलाबी निप्पल्स वाली औरत। उसकी गांड इतनी मोटी है कि जब वो चलती है तो दोनों गाल अलग-अलग हिलते हैं। नैतिक मेरा सबसे पुराना दोस्त है, लेकिन उस रात सब कुछ बदल गया।
वो शाम को बारिश हो रही थी। हम तीनों मिलकर मेरे फ्लैट में पार्टी कर रहे थे। अक्षरा ने टाइट टॉप पहना हुआ था जिससे उसके स्तन साफ उभर रहे थे। नैतिक शराब पी रहा था और अक्षरा भी थोड़ी-थोड़ी ले रही थी। मैं भी पी रहा था। बातें बढ़ीं तो अक्षरा ने कहा, “नितिन, तू तो हमेशा चुप रहता है, आज कुछ बोल ना।” मैंने मजाक में कहा, “अक्षरा तेरी गांड देखकर तो मन करता है हाथ मार दूं।” सब हंस पड़े लेकिन अक्षरा की आंखों में कुछ और चमक आई।
धीरे-धीरे नैतिक ने अक्षरा को छेड़ना शुरू किया। उसने अक्षरा की जांघ पर हाथ रखा। अक्षरा ने विरोध नहीं किया। मैं भी पास बैठा था। अक्षरा ने मुझे देखा और मुस्कुराई। “नितिन, तू भी शामिल हो जा,” उसने कहा। मेरे लंड में तुरंत खून दौड़ गया। मैंने अक्षरा के स्तन पर हाथ रखा। वो नरम और भारी थे। अक्षरा ने सांस ली और कहा, “दोनों मिलकर मुझे चोदो आज।”
हम तीनों बेडरूम में चले गए। अक्षरा ने अपना टॉप उतारा। उसके काले ब्रा के अंदर 36डी साइज के स्तन जेली की तरह लहरा रहे थे। नैतिक ने ब्रा का हुक खोला और स्तनों को मुंह में भर लिया। मैंने अक्षरा की जींस उतारी। अंदर पिंक कलर की पैंटी थी जो पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी को साइड में किया और अक्षरा की गुलाबी, बालों वाली चूत देखी। चूत के होठ मोटे थे और बीच में चमकदार रस टपक रहा था।
नैतिक ने अपना लंड निकाला। वो 7 इंच का मोटा लंड था। अक्षरा ने उसे हाथ में लिया और चूसने लगी। “हां नैतिक, मेरी चूत को याद कर रहा है ना?” अक्षरा बोली। मैंने भी अपना 6.5 इंच का लंड निकाला और अक्षरा की गांड पर हाथ फेरा। गांड नरम और गोल थी। मैंने एक उंगली अक्षरा की चूत में डाली। अंदर से गर्म और चिपचिपा रस निकल रहा था। अक्षरा चिल्लाई, “आह्ह्ह…

नितिन, उंगली और गहरी डाल।”
नैतिक ने अक्षरा को पीठ के बल लिटाया और उसके स्तनों को जोर-जोर से दबाते हुए चोदना शुरू किया। उसका लंड अक्षरा की चूत में पूरा घुस रहा था। “ले ले मेरी रंडी, तेरी चूत कितनी टाइट है,” नैतिक बोल रहा था। अक्षरा की चूत से “पच-पच” की आवाजें आ रही थीं। मैं अक्षरा के मुंह में अपना लंड डालकर चूसवा रहा था। अक्षरा की जीभ मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी।
फिर हमने पोजीशन बदली। अक्षरा ने घुटनों के बल बैठकर नैतिक का लंड चूसा जबकि मैं उसके पीछे से उसकी गांड चाटने लगा। अक्षरा की गांद की दरार में जीभ डालकर चाटता रहा। वो चीख रही थी, “नितिन, मेरी गांड चाट, और जोर से।” मैंने दो उंगलियां उसकी चूत में डाल दीं और तेजी से उंगलियां चलाईं। अक्षरा का रस मेरे हाथ पर बह रहा था।
नैतिक ने अक्षरा को उठाया और दीवार से टिका कर चोदना शुरू किया। अक्षरा की जांघें उसके कूल्हों पर लिपटी हुई थीं। लंड अंदर-बाहर हो रहा था। मैं अक्षरा के स्तनों को पीछे से दबा रहा था। “अक्षरा तेरी चूत का रस मेरे हाथों पर लग रहा है,” मैंने कहा। अक्षरा ने जवाब दिया, “हां नितिन, आज दोनों से चुदवाकर ही मानूंगी।”
हम बेड पर आए। अक्षरा ने मुझे लेटाया और मेरे लंड पर बैठ गई। उसकी चूत ने मेरे लंड को निगल लिया। अक्षरा ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे। नैतिक अक्षरा के पीछे आया और उसकी गांड में उंगली डालने लगा। “नैतिक, मेरी गांड भी चोद,” अक्षरा ने कहा। नैतिक ने लंड पर थूक लगाया और अक्षरा की गांड में घुसाने लगा। अक्षरा चीख पड़ी, “आह्ह्ह… दर्द हो रहा है, धीरे।” लेकिन जल्दी ही गांड में लंड घुस गया। अब दोनों लंड अक्षरा के दोनों छेदों में एक साथ घुस रहे थे।
अक्षरा की चूत और गांड दोनों से “थप-थप” की आवाजें आ रही थीं। उसका शरीर पसीने से तर हो गया था। स्तनों से पसीने की बूंदें टपक रही थीं। मैं अक्षरा के स्तन चूस रहा था जबकि नैतिक उसकी गांड मार रहा था। “ले रंडी, दोनों लंड एक साथ ले ले,” नैतिक बोल रहा था। अक्षरा का ऑर्गेज्म आ गया। उसकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया और गरम रस निकल पड़ा।
हमने पोजीशन बदली। अक्षरा ने कुत्ते वाली स्टाइल में घुटने टेके। मैं उसके सामने मुंह में लंड डालकर चोद रहा था जबकि नैतिक पीछे से चूत मार रहा था। अक्षरा की लंबी काली बाल पीछे झूल रहे थे। मैंने अक्षरा के बाल पकड़कर मुंह में लंड और गहरा डाला। अक्षरा का गला “गग-गग” कर रहा था।
रात के 2 बजे तक हम तीनों चोदते रहे। अक्षरा की चूत और गांड दोनों लाल हो गई थीं। उसकी जांघों पर हमारे दोनों का वीर्य और उसका रस फैला हुआ था। आखिर में नैतिक ने अक्षरा की चूत में झड़ दिया। मैंने अक्षरा के मुंह में झड़कर उससे सब पीने को कहा। अक्षरा ने मेरे वीर्य को चाट लिया।
उसके बाद हम तीनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े। अक्षरा ने कहा, “ये रोमांस सीन कभी भूल नहीं पाऊंगी।” मैंने उसे गले लगाया। नैतिक भी पास लेटा था। बारिश अभी भी बाहर हो रही थी।
(कहानी यहीं खत्म नहीं होती, लेकिन दोस्तों, ये थी हमारी पहली अक्षरा नैतिक रोमांस सीन। उसके बाद भी कई बार मिले और और भी गंदी चुदाई की। अक्षरा की चूत का स्वाद आज भी याद आता है।)