नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं मुंबई में एक छोटी सी आईटी कंपनी में काम करता हूँ। उम्र 28 साल, शादीशुदा नहीं हूँ, लेकिन जिंदगी में काफी चुदाई के किस्से हो चुके हैं। आज मैं आपको अपनी सबसे गंदी और हॉट वाली कहानी सुनाता हूँ, जो मेरी ऑफिस वाली हॉट ममथा मोन्हंदास के साथ हुई। ममथा 32 साल की है, शादीशुदा, लेकिन पति अक्सर विदेश रहता है। उसका फिगर देखकर कोई भी लड़का अपना लंड हाथ में ले ले। उसकी मोटी-मोटी गांड, 36 इंच की भारी छातियां, और चिकनी गोरी त्वचा… बस याद करके ही लंड खड़ा हो जाता है।
एक दिन ऑफिस में बारिश बहुत तेज हो रही थी। सब लोग जल्दी घर चले गए, सिर्फ ममथा और मैं रह गए। वो अपनी डेस्क पर काम कर रही थी, टाइट ब्लाउज में उसकी छातियां उभरी हुई थीं। मैंने पानी पिलाने के बहाने उसके पास जाकर बात शुरू की। “ममथा, आज बारिश में फंस गए ना?” उसने मुस्कुराते हुए कहा, “हां राहुल, पति भी नहीं है घर पर।” उसकी आवाज में कुछ कमी थी। मैंने हिम्मत करके उसके कंधे पर हाथ रखा। वो हटी नहीं।
धीरे-धीरे हम बातों में खो गए। मैंने कहा, “तुम्हारी बॉडी देखकर मन करता है कि तुम्हें चोद दूं।” ममथा शरमा गई लेकिन आंखों में चमक थी। “राहुल, ऐसा मत बोलो, लेकिन सच बोलूं तो मुझे भी बहुत दिनों से चुदवाने का मन कर रहा है।” ये सुनकर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने उसे अपनी तरफ खींच लिया और उसके होठों पर जोर से किस किया। वो भी जोश से चूमने लगी। हम दोनों की जुबानें एक-दूसरे के मुंह में घुस रही थीं।
मैंने उसका ब्लाउज उतारा। अंदर काला ब्रा था, जिसमें उसकी बड़ी-बड़ी छातियां दब रही थीं। मैंने ब्रा का हुक खोला और उन मोटी, मुलायम छातियों को हाथों में लिया। निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। ममथा सिसकारियां भरने लगी, “आह्ह्ह राहुल… चूसो ना… मेरी छातियां चूस लो।” मैंने दूसरी छाती भी चूसी, काटा, और जीभ से घुमाया। उसकी सांसें तेज हो गईं।
फिर मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट उतारे। नीचे पैंटी थी, जो पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी खींची और उसकी चिकनी, गंजी चूत देखी। लेबिया फूली हुई थी, और चूत के रस बह रहे थे। मैंने उंगली डाली तो “आह्ह्ह” की आवाज निकली। “ममथा, तेरी चूत कितनी गर्म और गीली है।” मैंने अपनी उंगली अंदर-बाहर की, फिर दो उंगलियां डालकर तेजी से फिंगरिंग की। वो चीखने लगी, “राहुल…

और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो उंगलियों से!”
उसके बाद मैंने अपना लंड निकाला। 7 इंच का मोटा, नसों से भरा लंड खड़ा था। ममथा ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी। “कितना बड़ा लंड है तेरा… आज मेरी चूत में डाल।” उसने मुंह में लिया और चूसने लगी। उसकी जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी, गले तक ले जा रही थी। थूक से लंड चमक रहा था। मैंने उसके बाल पकड़कर मुंह चुदवाया। “ले ममथा… मेरा लंड चूस… तेरे होंठों पर लंड की रस डाल दूंगा।”
फिर मैंने उसे सोफे पर लिटाया। उसकी टांगें फैलाईं और लंड चूत के मुंह पर रखा। धीरे से धक्का मारा। “आह्ह्ह… राहुल… धीरे… मेरा चूत फट जाएगा!” लेकिन मैंने जोर से धक्का दिया। पूरा लंड अंदर घुस गया। चूत का रस निकल रहा था। मैंने तेजी से चोदना शुरू किया। “चोद रहा हूं तेरी चूत… ले… ले मेरा लंड!” ममथा चीख रही थी, “हां… और जोर से चोद… मेरी चूत फाड़ डाल… मैं तेरी रंडी हूं आज!”
हमने पोजीशन बदली। वो ऊपर आई, मेरे लंड पर बैठ गई। उसकी गांड ऊपर-नीचे हो रही थी। छातियां उछल रही थीं। मैंने उन्हें हाथों में लिया और दबाया। “ममथा, तेरी गांड भी चोदनी है।” मैंने उसे घुमाया और डॉगी स्टाइल में डाला। गांड के छेद को देखकर लंड और सख्त हो गया। मैंने थूक लगाकर गांड में उंगली डाली, फिर लंड चूत से निकालकर गांड में घुसाया। “आह्ह्ह… दर्द हो रहा… लेकिन मजा आ रहा है!” वो चीखी। मैंने दोनों छेद बारी-बारी से चोदा।
लंबे समय तक हम चोदते रहे। मैंने उसकी चूत में झड़ने से पहले निकाला और उसके मुंह में डाला। वो पूरा रस पी गई। उसके बाद हम फिर से चोदने लगे। बारिश की आवाज के साथ हमारी चुदाई की आवाजें “पट-पट” गूंज रही थीं। ममथा कई बार झड़ चुकी थी। आखिर में मैंने उसकी चूत में ही झड़ गया। गर्म रस अंदर भर दिया।
हम थककर गिर पड़े। ममथा बोली, “राहुल, ये रात मेरी जिंदगी की सबसे हॉट रात थी। अब रोज चोदना।” ये कहानी यहीं खत्म नहीं होती, लेकिन आज के लिए इतना ही। अगर और डिटेल चाहिए तो बताना।