नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन में एक छोटे से फ्लैट में अकेला रहता हूं। उम्र मेरी पैंतीस साल है, जॉब एक आईटी कंपनी में अच्छी चल रही है लेकिन जिंदगी में कोई साथी नहीं। रातें अक्सर अकेली और सूनी गुजरती थीं। एक शाम बोरियत में मैंने एक ऐप पर “Indian Call Girls Romance” सर्च किया। प्रोफाइल्स देखते देखते एक लड़की की तस्वीर ने मुझे खींच लिया। नाम था प्रिया, उम्र छब्बीस, गोरी चमड़ी, बड़ी-बड़ी आंखें और मोटे होंठ। मैंने तुरंत बुकिंग कर दी।
दो घंटे बाद दरवाजे की घंटी बजी। मैंने खोला तो सामने खड़ी थी प्रिया। लाल रंग की टाइट टॉप और जींस पहने, बाल खुले, हल्की सी महक। वो मुस्कुराई और बोली, “हैलो राहुल, मैं प्रिया।” मैंने उसे अंदर बुलाया। फ्लैट छोटा था लेकिन बेडरूम में डबल बेड लगा था। हम दोनों सोफे पर बैठे। पहले कुछ सामान्य बातें हुईं। प्रिया ने बताया वो मुंबई से दिल्ली शिफ्ट हुई है, फैमिली के लिए पैसे कमाने आई है। उसकी बातों में एक अजीब सी मासूमियत थी जो मुझे और आकर्षित कर रही थी।
धीरे धीरे माहौल गर्म होने लगा। मैंने उसे पानी पेश किया। पानी पीते हुए उसके होंठों पर बूंदें चमक रही थीं। मैंने कहा, “प्रिया, तुम बहुत खूबसूरत हो।” वो शरमा गई लेकिन आंखों में चमक आ गई। मैंने उसके हाथ पकड़े और होंठों पर किस किया। वो भी किस करने लगी। उसकी जीभ मेरी जीभ से उलझ गई। किस करते करते मैंने उसकी टॉप ऊपर खींची। उसके स्तन ब्रा में बंद थे, बड़े और फूले हुए। मैंने ब्रा का हुक खोला और वे बाहर निकल आए। गोल-गोल, निप्पल सख्त। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। प्रिया सिसकारियां भरने लगी, “आह्ह राहुल… चूसो और जोर से… मेरे स्तन तुम्हारे हैं आज।”
मैंने उसकी जींस उतारी। अंदर काली पैंटी थी जो पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी हटाई तो उसकी चूत सामने थी। गुलाबी, बाल कटे हुए, होंठ फूले और रस टपक रहा था। मैंने उंगली घुमाई तो प्रिया कांप गई। “अरे वाह, कितनी गीली है तेरी चूत।” मैंने कहा। फिर मुंह लगाकर चाटने लगा। उसका स्वाद नमकीन और मीठा था। जीभ से क्लिट को रगड़ रहा था। प्रिया चीखने लगी, “हां राहुल, मेरी चूत चाटो… जीभ अंदर डालो… आह्ह मैं झड़ने वाली हूं!” वो झड़ गई, गरम रस मेरे मुंह में आया।
अब मेरी बारी थी। मैंने अपनी पैंट उतारी। लंड खड़ा था, सात इंच लंबा, मोटा, नसें उभरी हुई। प्रिया ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी। “क्या मोटा लंड है तुम्हारा… आज मेरी चूत फाड़ दोगे।” उसने मुंह में लिया। चूसने लगी, जीभ से नीचे तक चाटती। मैं उसके बाल पकड़कर मुंह में धकेल रहा था। “हां प्रिया, और गहरा… मेरे लंड को चूस।” दस मिनट बाद मैंने उसे बेड पर लिटाया। टांगें फैलाईं और लंड उसकी चूत पर रखा। एक जोर का झटका मारा तो आधा अंदर घुस गया। प्रिया चीख पड़ी, “आह्ह… धीरे… मोटा है!” लेकिन मैंने रुकना नहीं, धीरे धीरे पूरा अंदर कर दिया। चूत गर्म और कसी हुई थी।
हम चोदने लगे। मैं जोर जोर से धक्के मार रहा था। प्रिया की गांद उछल रही थी। “चोदो मुझे राहुल…

मेरी चूत फाड़ दो… मैं तुम्हारी रंडी हूं आज!” मैंने उसकी टांगें कंधों पर रखीं और गहराई तक घुसा। पसीना बह रहा था। प्रिया के स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें मसलते हुए चोदा। बीस मिनट बाद मैं झड़ने लगा। “प्रिया, मैं निकालता हूं!” लेकिन वो बोली, “अंदर ही छोड़ दो… मुझे भरो!” मैंने गरम वीर्य उसकी चूत में भर दिया।
थोड़ी देर बाद हम गले मिलकर लेटे। प्रिया ने कहा, “राहुल, ये सिर्फ काम नहीं लग रहा… तुम्हारे साथ कुछ अलग है।” मैंने उसे किस किया। फिर दूसरा राउंड शुरू हुआ। इस बार उसने ऊपर चढ़कर लंड अपनी चूत में लिया। वो ऊपर नीचे होने लगी। उसकी गांद मेरे हाथों में थी। मैंने उंगली उसकी गांद में डाली। प्रिया मचल गई, “आह्ह… गांद मत छेड़ो… पर अच्छा लग रहा है!” हमने घंटों चोदा। तीसरे राउंड में मैंने उसे कुत्ते वाली पोज में लिया। गांद को थपथपाते हुए लंड चूत में मारा। प्रिया की चीखें पूरी फ्लैट में गूंज रही थीं।
सुबह होने तक हम थक चुके थे। प्रिया ने कहा वो अगली बार फ्री में आएगी क्योंकि उसे भी मेरा साथ पसंद आया। हमने नंबर एक्सचेंज किए। वो चली गई लेकिन मेरे मन में उसकी यादें और उसकी गीली चूत की याद बाकी रह गई।
(कहानी यहीं खत्म नहीं होती। अगली मुलाकात में और भी गंदा रोमांस हुआ लेकिन वो अगली कहानी में।)