
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम रोहन है। मैं दिल्ली में रहता हूँ और एक छोटी सी IT कंपनी में जॉब करता हूँ। उम्र मेरी पच्चीस साल है। रोज शाम को ऑफिस से लौटकर मैं टीवी पर यही रिश्ता क्या कहलाता है देखता था। खासकर नायरा और अक्षरा वाली सीरीज। दोनों बहनें इतनी हॉट लगती थीं कि मेरा लंड खड़ा हो जाता। नायरा की बड़ी-बड़ी चूचियाँ, अक्षरा की गोल-गोल गांड, दोनों की चूतों की कल्पना करके मैं रात भर हिलाता। एक दिन मेरी किस्मत खुल गई।
मेरा दोस्त विक्रम की पार्टी में दोनों असली नायरा और अक्षरा से मिलना हुआ। सीरियल वाली एक्ट्रेस नहीं, बल्कि दो असली लड़कियाँ जिनके नाम नायरा और अक्षरा थे। दोनों मुंबई से दिल्ली आई थीं और विक्रम की फ्लैट में रुक रही थीं। नायरा पच्चीस साल की, गोरी, मोटी-मोटी जांघें, 36 साइज के भारी स्तन जो टीशर्ट में फटते लगते। अक्षरा उन्नीस की, slim लेकिन गांड बड़ी, पतली कमर, लंबे बाल। दोनों ने शॉर्ट्स और टॉप पहना था। पार्टी में शराब पीते-पीते बात आगे बढ़ी।
मैंने नायरा से कहा, “तुम दोनों सीरियल जैसी लग रही हो।” नायरा हँसी और बोली, “रोहन, सीरियल छोड़ो, असली मजा तो यहाँ है।” अक्षरा ने मेरी जांघ पर हाथ रखा। रात को तीनों विक्रम के फ्लैट में अकेले रह गए। विक्रम बाहर चला गया। नायरा ने दरवाजा बंद किया और बोली, “आज हम तीनों मिलकर नायरा अक्षरा सीरियल की असली चुदाई करेंगे।”
मैंने नायरा को दीवार से लगाकर चूमा। उसकी जुबान मेरी जुबान से लिपट गई। मैंने उसके टीशर्ट उतारा। उसकी ब्रा के अंदर से दो भारी चूचियाँ निकलीं। निप्पल सख्त और गुलाबी। मैंने एक चूची मुंह में ली और चूसने लगा। नायरा चीखी, “आह्ह्ह रोहन, मेरी चूची चूस, और जोर से काट।” अक्षरा पीछे से मेरे लंड पर हाथ फेरने लगी। उसने मेरी पैंट खोली और मेरा मोटा लंड बाहर निकाला। अक्षरा बोली, “वाह, कितना बड़ा लंड है, आज हम दोनों की चूत फाड़ दोगे।”
नायरा घुटनों पर बैठ गई। उसने मेरा लंड मुंह में लिया। उसकी गर्म सांसें, गीली जुबान लंड पर घूम रही थी। “चूस नायरा, पूरा गला तक ले,” मैंने कहा। नायरा गला दबाकर पूरा लंड निगल गई। थूक की आवाज आ रही थी। अक्षरा ने अपनी शॉर्ट्स उतारी और मेरे मुंह पर अपनी चूत रख दी। उसकी चूत गीली और गुलाबी थी, बाल कटे हुए। मैं उसकी चूत चाटने लगा। अक्षरा चिल्लाई, “रोहन, मेरी चूत चाट, जीभ अंदर डाल।”
तीनों बेडरूम में चले गए। नायरा बेड पर लेट गई, पैर फैलाए। मैंने उसकी चूत में उंगली डाली। अंदर गर्म और गीला। “चोद मुझे रोहन, मेरी चूत फाड़ डाल,” नायरा बोली। मैंने लंड उसकी चूत पर रगड़ा और एक जोर का झटका मारा। लंड आधा अंदर घुस गया। नायरा चीख पड़ी, “आह्ह्ह मादरचोद, कितना मोटा है, धीरे।” मैंने जोर लगाया। पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया। चूत का रस लंड पर बह रहा था। मैं तेज चोदने लगा। थप-थप की आवाज पूरे कमरे में। नायरा की चूचियाँ उछल रही थीं।
अक्षरा ने मेरा मुंह अपनी गांड पर रखा। मैं उसकी गांड चाटने लगा। उसकी गांड की दरार में जीभ डाली। अक्षरा बोली, “मेरी गांड चाट, फिर मेरी चूत में लंड डाल।” नायरा की चूत से रस निकल रहा था। मैंने लंड बाहर निकाला और अक्षरा की चूत में घुसा दिया। अक्षरा की चूत ज्यादा टाइट थी। “बहनचोद, फाड़ डाली मेरी चूत,” अक्षरा चीखी। मैं दोनों को बारी-बारी चोद रहा था। नायरा की गांड पर थप्पड़ मारता, “ले रंडी, ले मेरा लंड।”
घंटे भर चुदाई चली। नायरा ने डॉगी स्टाइल में घुटने टेके। मैंने उसकी गांड में उंगली डाली और चूत में लंड। “दोनों छेद भर दो,” नायरा बोली। अक्षरा मेरे नीचे लेट गई, मैं उसकी चूत चोदता और नायरा की चूची चूसता। तीनों के शरीर पसीने से तर। चूत का रस, लंड का प्री-कम, सब मिलकर बेड गीला।
आखिर में दोनों घुटनों पर बैठ गईं। मैंने अपना लंड हिलाया और दोनों के मुंह पर झाड़ दिया। गाढ़ा वीर्य उनके चेहरों पर, जुबान पर, चूचियों पर गिरा। नायरा ने वीर्य चाटा और बोली, “स्वादिष्ट है।” अक्षरा ने भी चूसा।
रात भर हम तीनों नंगे लेटे रहे। सुबह फिर शुरू हुआ। नायरा ने कहा, “ये नायरा अक्षरा सीरियल अब असली बन गई।” मैंने फिर दोनों की चूतें चोदीं। दिल्ली की सुबह में तीनों थके हुए लेकिन खुश थे।
(कहानी यहीं पूरी होती है लेकिन याद रखना, असली मजा तो कल्पना में ही है।)