नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विक्रम है। मैं दिल्ली में रहता हूँ और एक छोटी सी प्रोडक्शन कंपनी में काम करता हूँ। मेरी उम्र 32 साल है। दो साल पहले की बात है जब मैं एक टीवी सीरियल की शूटिंग में शामिल हुआ था। सीरियल का नाम था “नए रिश्ते” और उसमें मुख्य हीरोइन अक्षरा थी। अक्षरा सीरियल ना गीत… यही कीवर्ड मेरे दिमाग में घूम रहा था जब पहली बार मैंने उसे देखा। वो 28 साल की थी, गोरी चमड़ी, भारी-भरे स्तन, मोटी गोल गांड और कमर इतनी पतली कि देखते ही लंड खड़ा हो जाए। सीरियल में वो एक संगीतकार की पत्नी का रोल निभा रही थी, लेकिन असल जिंदगी में वो बहुत ही सेक्सी और फ्रैंक थी।
शूटिंग मुंबई के एक स्टूडियो में हो रही थी। बारिश का मौसम था। एक दिन शूटिंग लेट चल रही थी। सब चले गए थे, सिर्फ मैं, अक्षरा और डायरेक्टर रह गए। डायरेक्टर ने कहा, “विक्रम, अक्षरा को घर छोड़ देना, मैं आगे निकलता हूँ।” मैंने हाँ कर दी। कार में अक्षरा मेरे पास बैठी। उसने टाइट टॉप पहना हुआ था जिससे उसके स्तन साफ दिख रहे थे। बातचीत शुरू हुई। “विक्रम, सीरियल में मेरा रोल अच्छा है ना?” उसने पूछा। मैंने कहा, “बहुत अच्छा, लेकिन असल में तुम और भी ज्यादा हॉट लगती हो।” वो हँसी और बोली, “अरे वाह, सीधे-सीधे बात कर रहे हो।”
कार में ही उसने अपना हाथ मेरी जांघ पर रख दिया। मैं समझ गया कि आज कुछ होने वाला है। मैंने उसे अपने फ्लैट ले जाने का ऑफर दिया जो अंधेरी में था। वो मान गई। फ्लैट में घुसते ही उसने दरवाजा बंद किया और मेरे गले लग गई। “विक्रम, आज मुझे अच्छे से चोदना। सीरियल की शूटिंग में इतना टेंशन है कि चूत में आग लग रही है।” ये सुनकर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने उसे दीवार से लगाकर चूमा। उसकी जीभ मेरी जीभ से लड़ रही थी। मैंने उसके टॉप उतारा। अंदर लाल ब्रा थी। स्तन इतने बड़े कि ब्रा से बाहर निकलने को थे। मैंने ब्रा उतारी और एक स्तन मुंह में ले लिया। चूसा जोर से। अक्षरा चीखी, “आह… विक्रम, और जोर से चूस, मेरे निप्पल को काट।”
मैंने दूसरे स्तन को हाथ से दबाया। दूध जैसा सफेद रस नहीं था लेकिन पसीने की महक आ रही थी। अक्षरा ने मेरी पैंट खोली और लंड बाहर निकाला। “वाह, कितना मोटा लंड है! सीरियल वाले हीरो से भी बड़ा।” वो घुटनों पर बैठ गई और लंड चूसने लगी। उसकी जीभ लंड के नीचे घूम रही थी। “चूस, अक्षरा, पूरा गले तक ले।” मैंने उसके बाल पकड़कर लंड उसके मुंह में ठेला। वो गला दबाकर चूस रही थी। थूक से लंड चमक रहा था।
फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। उसकी सलवार उतारी। चूत पर हल्का बाल था। चूत के होठ फूल चुके थे और रस बह रहा था। मैंने उंगली डाली। “आह… विक्रम, उंगली और अंदर डाल। मेरी चूत को फाड़ दे।” मैंने दो उंगलियां डालीं और अंदर-बाहर करने लगा। अक्षरा तड़प रही थी। “अब लंड डाल, प्लीज चोद मुझे।” मैंने लंड उसकी चूत पर रखा और एक जोरदार झटका मारा। लंड आधा अंदर घुस गया। “उफ्फ…

कितना मोटा है! धीरे… आह!” मैंने और जोर से धक्का दिया। पूरा लंड चूत में समा गया।
अब चुदाई शुरू हुई। मैं तेज-तेज चोद रहा था। “ले, अक्षरा, ले मेरा लंड। तेरी चूत आज फट जाएगी।” अक्षरा चीख रही थी, “हाँ, चोद मुझे, और जोर से! मेरी गांड भी मारना बाद में।” मैंने उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रखे और लंड और गहराई तक ठेला। चूत से “पच-पच” की आवाज आ रही थी। रस लंड पर बह रहा था। मैंने झुककर उसके स्तन चूसे। पसीना दोनों के शरीर पर था।
बीस मिनट बाद मैंने पोजीशन बदली। अक्षरा को कुत्ते वाली पोजीशन में कर दिया। गांड ऊपर करके। मैंने लंड पीछे से डाला। गांड के छेद को देखकर मन हुआ लेकिन पहले चूत ही चोदी। “विक्रम, मेरी गांड में उंगली डाल।” मैंने एक उंगली उसकी गांड में डाली। वो और जोर से चीखी। “दोनों छेद भर दो!” मैंने लंड चूत में और उंगली गांड में घुमाई। अक्षरा का शरीर कांप रहा था।
फिर मैंने लंड निकाला और गांड पर लगाया। “अब गांड मारूं?” “हाँ, मार! लेकिन धीरे से।” मैंने थूक लगाकर लंड गांड में घुसाया। अक्षरा चीख पड़ी, “आह… दर्द हो रहा! लेकिन अच्छा लग रहा है। पूरा डाल!” लंड आधा अंदर गया। मैंने धीरे-धीरे धक्के मारे। गांड लंड को निगल रही थी। पांच मिनट बाद तेज चोदना शुरू किया। “ले, तेरी गांड फाड़ दूंगा!” अक्षरा का सर बिस्तर में दबा हुआ था, “चोद, चोद, और चोद!”
हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे। मैंने उसे पीठ के बल लिटाया और फिर चूत में लंड डाला। इस बार दोनों एक साथ झड़ने वाले थे। “विक्रम, अंदर ही निकाल! मेरी चूत में अपना माल भर दे।” मैंने दस-बारह जोरदार झटके मारे और गरम-गरम वीर्य अक्षरा की चूत में छोड़ दिया। अक्षरा भी झड़ गई। उसकी चूत सिकुड़ रही थी। दोनों थककर गिर पड़े।
लेकिन रात अभी खत्म नहीं हुई। आधे घंटे बाद अक्षरा ने फिर लंड मुंह में लिया। हमने पूरी रात चोदाई की। सुबह तक तीन बार और चूदा। अक्षरा बोली, “विक्रम, ये सीरियल ना गीत हमारी गंदी चुदाई की याद दिलाएगा।”
(शेष कहानी विस्तार से: अगले दिनों शूटिंग के दौरान हम छुप-छुपकर मिलते। एक बार स्टूडियो के बैकस्टेज पर ही अक्षरा ने मुझे चूसा। उसने अपने स्तन मेरे मुंह में दबाए और कहा, “चूस, कल रात जैसा।” मैंने उसकी चूत चाटी। रस मीठा था। फिर लंड डालकर चोदा। सीरियल की सीन में वो गाना गाती थी लेकिन असल में उसकी चीखें “आह-आह” ही होती थीं। एक बार बारिश में हम बाहर निकले। कार में ही पिछली सीट पर चुदाई की। अक्षरा की गांड पर पानी की बूंदें गिर रही थीं। लंड उसकी चूत में घुसा हुआ था। वो बोली, “विक्रम, तू मेरा असली हीरो है।” हमने और कई पोजीशन ट्राई कीं – 69, स्टैंडिंग, वॉल से लगाकर। हर बार अक्षरा चीखती, “जोर से चोद, मेरी चूत फट रही है!”
कहानी का अंत इस तरह हुआ कि सीरियल खत्म होने के बाद भी हम मिलते रहे। अक्षरा अब मेरी नियमित पार्टनर है। वो कहती है, “अक्षरा सीरियल ना गीत की याद में आज भी तेरे लंड से चुदवाती हूँ।” हम दोनों की जिंदगी सेक्स से भरी हुई है। दोस्तों, ये मेरी सच्ची कहानी है। अगर पसंद आई तो कमेंट करना।