नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं दिल्ली में रहता हूँ और एक छोटी सी IT कंपनी में जॉब करता हूँ। उम्र मेरी 28 साल है। आज मैं आपको एक ऐसी सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूँ जो मेरी जिंदगी में कभी नहीं भूल पाएगा। बात उस समय की है जब मेरी ममी, यानी मामatha, हमारे घर आई थीं। मामatha मेरी असली माँ की छोटी बहन हैं, उम्र करीब 42 साल, लेकिन शरीर देखकर कोई 30 का कहेगा। उनकी चोली में भरे हुए बड़े-बड़े स्तन, गोल-गोल कूल्हे और वो नाजुक कमर…

बस देखते ही लंड खड़ा हो जाता था।
वो आए थे हमारे फ्लैट में, क्योंकि उनके पति विदेश चले गए थे कुछ महीनों के लिए। घर में सिर्फ मैं और वो थे, क्योंकि माँ-बाप गांव गए हुए थे। पहली रात को बारिश हो रही थी। दिल्ली की मॉनसून की बारिश, ठंडी हवा और अंधेरा। मामatha रसोई में चाय बना रही थीं। वो पहन रखा था एक पतला सा नाइट सूट, जिससे उनकी गांड की लाइन साफ दिख रही थी। मैं सोफे पर बैठा टीवी देख रहा था, लेकिन नजर बार-बार उन पर जा रही थी।
"अर्जुन, चाय पी ले बेटा," उन्होंने कहा। आवाज में वो गर्माहट थी जो दिल को छू गई। मैं उठा और रसोई में गया। जैसे ही मैं उनके पास पहुंचा, उनकी खुशबू ने मुझे घेर लिया। उन्होंने चाय का कप बढ़ाया तो उनका हाथ मेरा हाथ छू गया। एक झटका सा लगा। मैंने कप लिया और कहा, "ममी, आप भी बैठो ना।"
वो मुस्कुराईं और पास बैठ गईं। बातें शुरू हुईं। पहले सामान्य, फिर धीरे-धीरे वो रोमांटिक हो गईं। "अर्जुन, तू बड़ा हो गया है। अब शादी कर ले," उन्होंने कहा। मैंने हिम्मत करके कहा, "ममी, शादी तो कर लूंगा, लेकिन पहले कोई ऐसी औरत चाहिए जो मुझे सिखाए।" उनकी आंखें चमक उठीं। "क्या मतलब?"
मैंने सीधा जवाब दिया, "मतलब… तुम जैसी औरत।" चुप्पी छा गई। बारिश की आवाज के अलावा कुछ नहीं। फिर मामatha ने हाथ बढ़ाया और मेरे गाल पर थपकी मारी। "पागल है क्या? मैं तेरी ममी हूं।" लेकिन उनकी आवाज में कोई रोक नहीं थी। मैंने उनकी कमर पकड़ ली। "ममी, तुम्हारा शरीर देखकर कंट्रोल नहीं होता।"
उन्होंने कोई विरोध नहीं किया। मैंने उन्हें उठाया और बेडरूम में ले गया। दरवाजा बंद किया। मामatha की सांस तेज हो गई थी। मैंने उनका सूट उतारा। अंदर ब्रा और पैंटी थी। उनके स्तन ब्रा से बाहर निकलने को बेताब थे। मैंने ब्रा खोली तो दो बड़े, गोल, सफेद स्तन सामने थे, निप्पल सख्त और गुलाबी। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। मामatha चीख पड़ी, "आह्ह… अर्जुन… धीरे… मम्मी की छाती चूस रहा है।"
मैंने उनकी पैंटी उतारी। उनकी चूत पूरी गीली थी, बाल हल्के-हल्के, और फूल चुकी थी। मैंने उंगली डाली तो रस बह निकला। "ममी, तुम्हारी चूत कितनी गर्म है।" उन्होंने मेरी पैंट खोली। मेरा लंड 7 इंच का खड़ा हो चुका था, मोटा और नसों से भरा। उन्होंने हाथ में लिया और सहलाने लगीं। "बेटा, इतना बड़ा लंड… ममी को चोद दे।"
मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया। सबसे पहले उनकी चूत चाटी। जीभ से क्लिट को चूसा, फिर अंदर तक जीभ डाली। मामatha की कमर उछल रही थी। "ओह्ह… अर्जुन… चूत चाट… मेरा रस पी ले।" उनका पहला ऑर्गेज्म आ गया, चूत से गरम-गरम रस निकला जो मैंने पी लिया।
फिर मैंने लंड उनकी चूत पर रखा और धीरे से घुसाया। "आह्ह… धीरे… ममी की चूत फट जाएगी।" लेकिन मैंने जोर से धक्का मारा। पूरा लंड अंदर चला गया। मामatha चीख उठीं, "चोदो मुझे… जोर से चोदो!" मैंने रफ चोदना शुरू किया। उनकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए लंड अंदर-बाहर कर रहा था। उनकी चूत का रस लंड पर चिपक रहा था। हर धक्के पर उनकी छाती उछल रही थी।
हमने पोजीशन बदली। वो ऊपर आईं। मेरे लंड पर बैठ गईं और कूदने लगीं। उनकी गांड मेरे हाथों में थी। मैं उनकी गांड सहला रहा था और कभी-कभी उंगली डाल रहा था। "ममी, तुम्हारी गांड भी कितनी नरम है।" उन्होंने कहा, "कल गांड भी मार लेना बेटा। आज तो चूत ही फाड़ डाल।"
हम घंटों चोदते रहे। दूसरी बार मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में लिया। पीछे से लंड घुसाया, एक हाथ से उनकी छाती दबा रहा था, दूसरा हाथ क्लिट पर। मामatha चिल्ला रही थीं, "हार्डर… और जोर से… मेरा पानी निकाल दो!" उनका दूसरा ऑर्गेज्म आया, चूत कस गई और रस निकला।
मैं भी झड़ने वाला था। मैंने लंड बाहर निकाला और उनके स्तनों पर झड़ गया। गरम-गरम वीर्य उनकी छाती पर फैल गया। मामatha ने उंगली से उठाकर मुंह में डाला। "स्वाद अच्छा है बेटा।"
रात भर हम चोदते रहे। सुबह होने तक तीन बार चोदा। उनकी चूत लाल हो गई थी, फूल गई थी। लेकिन दोनों को और चाहिए था। अगली सुबह भी हमने नहाते समय फिर चोदा।
ये कहानी अभी खत्म नहीं हुई। मामatha अब अक्सर आती रहती हैं, और हर बार नई पोजीशन, नया मजा। लेकिन ये थी पहली रात की ममatha hot romantic short film जैसी कहानी।