नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में एक छोटी सी जॉब करता हूँ लेकिन असली मज़ा तो मुझे अपने गाँव में आता है। पिछले महीने छुट्टियाँ लेकर मैं अपने गाँव गया था। गाँव छोटा सा है, खेतों के बीच बसा। वहाँ मेरी एक पुरानी दोस्त रानी रहती है। रानी बीस साल की देहाती लड़की है, गाँव की सबसे सुंदर औरतों में से एक। उसकी गोरी चमड़ी, भारी भारी स्तन और चौड़ी कमर देखकर कोई भी आदमी पागल हो जाए।
एक शाम मैं खेतों के पास घूम रहा था कि अचानक मुझे रानी की आवाज़ सुनाई दी। वह नदी के किनारे नहा रही थी। मैं छुपकर देखने लगा। रानी ने अपनी साड़ी उतार दी थी। उसकी नंगी देह पानी में चमक रही थी। उसके बड़े बड़े स्तन पानी की बूंदों से भीगे हुए थे, निप्पल सख्त खड़े हो चुके थे। उसकी जांघों के बीच की चूत हल्की सी बालों से ढकी थी, पानी बह रहा था तो चूत के होठ फूलकर बाहर निकल आए थे। मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और धीरे धीरे सहलाने लगा।
रानी ने पानी में डुबकी लगाई। जब वह उठी तो उसके बाल उसके स्तनों पर लिपटे हुए थे। उसने अपने स्तनों को दोनों हाथों से दबाया और सहलाने लगी। “आह… कितना अच्छा लग रहा है” वह खुद से बोल रही थी। मैं और पास गया। अचानक उसकी नज़र मुझ पर पड़ गई। पहले तो वह शर्माई लेकिन फिर मुस्कुराई। “राहुल, तुम यहाँ? चुपके से देख रहे हो?”
मैंने कहा, “रानी, तुम्हारी देह देखकर कंट्रोल नहीं हो रहा।” वह पानी से बाहर आई, पूरी तरह नंगी। उसके स्तन झूल रहे थे, चूत से पानी टपक रहा था। उसने मुझे अपनी तरफ खींचा और बोली, “तो फिर चोद दो मुझे।”
हम दोनों नदी के किनारे घास पर लेट गए। मैंने उसके स्तनों को मुँह में लिया और जोर जोर से चूसने लगा। रानी चीखने लगी, “आह… राहुल, मेरे स्तनों को और जोर से काटो, चूसो!” उसके निप्पल मेरी जीभ के नीचे फड़फड़ा रहे थे। मैंने एक हाथ उसकी चूत पर रखा। चूत गीली और गर्म थी। उंगलियाँ अंदर डाली तो “छिक” की आवाज़ आई। रानी की चूत का रस मेरी उंगलियों पर लग गया।
“रानी, तेरी चूत कितनी गीली है” मैंने कहा। वह बोली, “तेरा लंड अंदर डाल, चोद मुझे!” मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा। लंड का सिरा चूत के होठों पर फिसल रहा था। फिर एक जोरदार झटके से पूरा लंड अंदर घुसा दिया। रानी चीख पड़ी, “आह्ह्ह… लंड फट गई मेरी चूत! और जोर से चोद!”
हम दोनों पसीने से तर हो गए। मैं उसकी चूत में जोर जोर से धक्के मार रहा था। हर धक्के पर “प्लच प्लच” की आवाज़ आ रही थी। रानी के स्तन मेरे हाथों में उछल रहे थे। मैंने उसे उल्टा कर दिया और पीछे से चोदने लगा। उसकी गोल गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने गांड के छेद में उंगली डाली तो रानी और जोर से चीखी। “राहुल, मेरी गांड भी चोद!”
मैंने लंड निकालकर सीधा उसकी गांड में ठूंस दिया। गांड बहुत तंग थी, लेकिन रस से फिसल गया। रानी का शरीर काँप रहा था। “आह…

गांड फाड़ दी, मेरा रस निकाल!” हम दोनों चरम सीमा पर पहुँच गए। मेरा गरम गरम वीर्य उसकी गांड में भर गया। रानी का चूत का रस मेरी जांघों पर बह रहा था।
इसके बाद हम नदी में फिर नहाए। रानी ने मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाया और बोली, “अब रोज़ नहाने आऊँगी, तू वीडियो बना लेना जैसे देहाती नहाती हुई लड़की की।” मैंने हाँ कहा और हमने फिर चुदाई शुरू कर दी। पूरी रात हम खेतों में चोदते रहे। उसके स्तन, चूत, गांड सब कुछ चखा। रानी की चीखें पूरी रात गूँजती रहीं।
(यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। अगले दिन भी हम मिले, नहाते हुए, चोदते हुए, रस निकालते हुए। देहाती लड़की की नंगी देह का मजा सच में अलग होता है।)
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