नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में नौकरी करता हूँ लेकिन हर साल गर्मियों में अपने गांव जाता हूँ। इस बार भी जब मैं गांव पहुंचा तो पूरा मौसम गर्म और उमस भरा था। मेरे गांव का नाम है बरेली के पास एक छोटा सा गांव जहां खेतों की हरियाली और मिट्टी की खुशबू सब तरफ फैली रहती है। मेरी उम्र 28 साल है और मैं कद में लंबा और तगड़ा हूं। गांव में सब मुझे बचपन से जानते हैं।
वहां मेरी बचपन की दोस्त थी प्रिया। अब वो 25 साल की हो चुकी थी। प्रिया गांव की सबसे सुंदर लड़की थी। उसकी गोरी रंगत, बड़ी-बड़ी आंखें, मोटे होंठ और भरपूर शरीर देखकर कोई भी लड़का पागल हो जाए। उसके स्तन इतने बड़े और भारी थे कि ब्लाउज में अटते नहीं थे। उसकी कमर पतली लेकिन नितंब चौड़े और गोल थे। जब वो चलती तो उसकी गांड हिलती हुई लगती थी जैसे कोई आमंत्रण दे रही हो।
हम दोनों बचपन से दोस्त थे लेकिन अब कुछ और ही महसूस हो रहा था। एक शाम खेतों के पास नहर के किनारे मिले। प्रिया अकेली थी। उसने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो उसके शरीर पर चिपकी हुई थी। मैंने कहा, “प्रिया, तू कितनी बदल गई है।” वो मुस्कुराई और बोली, “राहुल, तू भी तो बहुत मर्द बन गया है।”
हम बातें करते-करते नहर के पास बैठ गए। अंधेरा होने लगा। प्रिया ने बताया कि उसकी शादी की बात चल रही है लेकिन वो किसी और को चाहती है। मैंने पूछा, “कौन?” उसने मेरी तरफ देखा और सीधे कहा, “तू।”
मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने उसका हाथ पकड़ा। प्रिया ने हिचकिचाते हुए कहा, “राहुल, यहां कोई आ जाएगा।” लेकिन मैंने उसे खींचकर अपने पास किया। उसकी सांसें तेज हो गईं। मैंने उसके होंठों पर अपना मुंह रख दिया और चूमने लगा। वो भी चूमने लगी। हमारी जीभें एक-दूसरे से लड़ रही थीं।
मैंने उसके ब्लाउज के ऊपर से उसके स्तनों को दबाया। वो इतने नरम और भारी थे कि हाथ में नहीं समाते थे। प्रिया चीख पड़ी, “आह्ह… राहुल, धीरे से।” मैंने ब्लाउज के हुक खोले और उसके स्तन बाहर निकाल लिए। काले-काले निप्पल खड़े हो चुके थे। मैंने एक को मुंह में लिया और चूसने लगा। प्रिया का सिर पीछे झुक गया। वो moans कर रही थी, “हां… चूस ले मेरे स्तन… तेरी जुबान अच्छी लग रही है।”
मैंने उसकी साड़ी ऊपर उठाई। उसकी जांघें मोटी और गोरी थीं। उसके पैंटी के अंदर से उसकी चूत की खुशबू आ रही थी। मैंने पैंटी हटाई। उसकी चूत पूरी तरह गंजी थी, होंठ मोटे और अंदर से गुलाबी। चूत से रस टपक रहा था। मैंने उंगली डाली। प्रिया की चूत गर्म और गीली थी। वो चीखी, “आह्ह… उंगली मत डाल, लंड डाल।”
मैंने अपना लंड निकाला। मेरा लंड 7 इंच का मोटा और नसों से भरा हुआ था। प्रिया ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी। “कितना बड़ा है तेरा लंड, गांव के लड़कों से दोगुना।” मैंने उसे लेटाया। खेत की मिट्टी पर उसकी साड़ी बिछा दी। प्रिया की टांगें फैलाईं। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और धीरे से दबाया।
लंड का सिरा अंदर घुसा। प्रिया चीख पड़ी, “आह्ह… दर्द हो रहा है…

धीरे… पूरा मत घुसा।” लेकिन मैंने जोर लगाया। आधा लंड अंदर चला गया। उसकी चूत बहुत टाइट थी। रस निकल रहा था। मैंने धीरे-धीरे धक्के मारे। प्रिया की आवाजें बढ़ गईं, “हां… चोद मुझे… तेरे लंड से मेरी चूत फट रही है… गांड भी मार।”
मैंने उसकी टांगें अपने कंधों पर रखीं और जोर-जोर से चोदने लगा। हर धक्के पर उसकी चूत से चप-चप की आवाज आ रही थी। प्रिया के स्तन उछल रहे थे। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसता रहा। 10 मिनट तक ऐसे ही चोदा। फिर प्रिया बोली, “अब मेरी गांड मार।”
मैंने उसे घुमाया। उसकी गांड ऊपर उठा दी। गांड के छेद छोटा और गुलाबी था। मैंने थूक लगाया और लंड घुसाया। प्रिया चीखने लगी, “आह्ह… गांड फट जाएगी… धीरे… लेकिन जोर से चोद।” मैंने उसकी गांड मारी। लंड अंदर-बाहर हो रहा था। प्रिया की चूत से रस बह रहा था।
हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे। मैंने उसे कुत्ते की तरह चोदा। फिर सामने से। प्रिया ने मुझे ऊपर चढ़ाया और खुद बैठकर चोदने लगी। उसकी चूत मेरे लंड को निगल रही थी। वो चिल्ला रही थी, “राहुल… मैं झड़ने वाली हूं… तेरे लंड में मेरा रस भर दे।”
हम दोनों एक साथ झड़ गए। मेरा गरम-गरम वीर्य उसकी चूत में भर गया। प्रिया का शरीर कांप रहा था।
इसके बाद हम पूरे हफ्ते हर रात मिलते। खेत में, नहर किनारे, उसके घर के पीछे। हर बार नई पोजीशन। कभी वो मेरे मुंह में लंड डालती, कभी मैं उसकी चूत चाटता। एक बार बारिश में नंगे होकर चोदा। पानी की बूंदें हमारे शरीर पर गिर रही थीं और हम चोद रहे थे।
प्रिया की चूत का स्वाद अभी भी याद है। उसकी गांड की टाइटनेस। गांव की वो रातें कभी नहीं भूलूंगा। अब जब भी गांव जाता हूं, प्रिया इंतजार करती है। हमारी village love story novels जैसी ही है – गंदी, गर्म और लंबी चुदाई से भरी।
(शेष कहानी विस्तार से: अगली रात हम फिर मिले। प्रिया ने मुझे बुलाया अपने कमरे में। उसने सिर्फ पेटीकोट पहना था। मैंने उसे दीवार से टिका कर चोदा। उसके स्तन दीवार से रगड़ खा रहे थे। लंड उसकी चूत में पूरा घुसा हुआ था। प्रिया बोली, “राहुल, तू मेरा पति बन जा। तेरे लंड के बिना जिंदा नहीं रह सकती।” मैंने 20 मिनट तक लगातार धक्के मारे। उसकी चूत से सफेद रस निकल रहा था। फिर मैंने उसका मुंह अपने लंड पर रखा। प्रिया चूसने लगी। उसकी जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी। मैंने उसके मुंह में झड़ दिया। वो सब पी गई।
दूसरे दिन खेत में दोपहर को। गर्मी में पसीना बह रहा था। प्रिया ने साड़ी उतारी। मैंने उसकी जांघों को चाटा, चूत चाटी। उसका क्लिट फूल गया था। मैंने उंगली और जीभ से उसकी चूत को मसल डाला। प्रिया चीख-चीख कर झड़ गई। फिर उसने मुझे लेटाया और मेरे लंड पर बैठ गई। वो ऊपर-नीचे हो रही थी। उसके स्तन मेरे मुंह के सामने झूल रहे थे। मैं चूसता रहा।
तीसरी रात हम तालाब किनारे गए। पानी में नंगे उतरकर चोदा। पानी की ठंडक और लंड की गर्मी का मजा अलग था। प्रिया की गांड पानी में लहरा रही थी। मैंने पीछे से घुसाया।
इस तरह पूरे हफ्ते हमने 8-10 बार चोदा। हर बार नई जगह, नई स्टाइल। कभी standing, कभी doggy, कभी 69। प्रिया की चूत हमेशा गीली रहती। उसका रस मेरे लंड पर चिपक जाता।
अंत में जब मैं दिल्ली लौटा तो प्रिया ने कहा, “जल्दी आना, मेरी चूत तेरे लंड का इंतजार करेगी।” ये हमारी गंदी लेकिन प्यारी village love story novels है। अब भी जब याद आती है तो लंड खड़ा हो जाता है।)