नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव का रहने वाला हूँ। उम्र मेरी पच्चीस साल है और मैं खेती-बाड़ी का काम करता हूँ। आज मैं आपको अपनी असली कहानी सुनाता हूँ जो मेरी बीवी प्रिया के साथ हुई। प्रिया भी मेरी उम्र की है, गाँव की सबसे सुंदर लड़की। उसकी गोरी चमड़ी, मोटी-मोटी जाँघें, भारी-भारी स्तन और गोल-गोल गाँड ने मुझे पहले दिन से ही पागल कर रखा था। हमारी शादी को दो साल हो चुके थे लेकिन हमारी चुदाई की भूख कभी कम नहीं होती।
गाँव में हमारा घर छोटा सा है, मिट्टी की दीवारें, खपरैल की छत। रात को जब सब सो जाते तो हम दोनों अकेले हो जाते। प्रिया अक्सर मुझे छेड़ती, “अर्जुन, आज रात तू मुझे कितना चोदेगा? मेरी चूत में आग लग रही है।” मैं भी गंदी बातें करके उसे गरम करता, “तेरी चूत का रस पीऊँगा आज, लंड घुसा के फाड़ दूँगा तेरी फट्टी हुई चूत को।”
एक बार की बात है, मानसून का मौसम था। बारिश जोरों से हो रही थी। हम दोनों खेत से लौटे थे। प्रिया की साड़ी पूरी भीग चुकी थी। उसके स्तन साफ दिख रहे थे, निप्पल खड़े हो गए थे। मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया और कान में फुसफुसाया, “प्रिया, आज तुझे चोदने का मन कर रहा है। तेरी गीली चूत में अपना मोटा लंड डालूँ?” वह मुस्कुराई और मेरी जाँघ पर हाथ फेरते हुए बोली, “हाँ अर्जुन, चोद मुझे। मेरी चूत सूखी पड़ी है तेरे लंड के बिना।”
हम घर के अंदर आए। दरवाजा बंद किया। प्रिया ने साड़ी उतार दी। सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। उसके स्तन ब्लाउज से फटते लग रहे थे। मैंने उसे दीवार से लगाकर चूमना शुरू किया। जीभ से उसकी गर्दन चाटी, फिर ब्लाउज के अंदर हाथ डालकर स्तनों को दबाया। “अह्ह्ह…

अर्जुन, दबा जोर से। मेरे स्तन तेरे हाथों में मर जाएँ,” वह चीखी। मैंने ब्लाउज फाड़ दिया। उसके नंगे स्तन बाहर आ गए, बड़े-बड़े, गोरे, निप्पल गुलाबी। मैंने एक निप्पल मुँह में लिया और चूसने लगा। दूसरा हाथ उसके पेटीकोट में घुसा दिया। उसकी चूत गीली हो चुकी थी। उंगलियाँ घुसा के हिलाने लगा। “तेरी चूत कितनी गरम है प्रिया, रस बह रहा है।”
प्रिया ने मेरी पैंट उतारी। मेरा लंड खड़ा हो चुका था, मोटा, लंबा, नसों से भरा। वह घुटनों के बल बैठ गई और लंड चूसने लगी। “चूस प्रिया, पूरा मुँह में ले।” वह लंड को चाटती, चूसती, गले तक ले जाती। लार और रस से मेरा लंड चमक रहा था। “तेरा लंड स्वादिष्ट है अर्जुन, आज रात मुझे मार डाल,” वह बोल रही थी।
फिर मैंने उसे खाट पर लिटाया। पेटीकोट उतार दिया। उसकी चूत साफ, बाल कटे हुए, होंठ मोटे, अंदर से गुलाबी। मैंने उसकी जाँघें फैलाईं और चूत चाटने लगा। जीभ अंदर घुसा के रस पी रहा था। प्रिया चीख रही थी, “ओह्ह्ह अर्जुन, चाट मेरी चूत, उँगली भी डाल। मैं झड़ने वाली हूँ।” उसका शरीर काँप रहा था। मैंने दो उँगलियाँ अंदर डालीं और तेजी से हिलाने लगा। वह चीखती रही, “चोद मुझे, लंड डाल अब!”
मैं ऊपर चढ़ गया। लंड को चूत के मुँह पर रखा और एक जोर का धक्का मारा। लंड आधा अंदर घुस गया। प्रिया चीख पड़ी, “आह्ह्ह… मोटा है तेरा लंड, फाड़ देगा चूत को!” मैं धीरे-धीरे पूरे लंड को अंदर घुसा दिया। फिर तेजी से चोदने लगा। “थप थप” की आवाजें घर में गूँज रही थीं। प्रिया के स्तन उछल रहे थे। मैं उन्हें दबा रहा था। “ले प्रिया, मेरा लंड ले, तेरी चूत फट जाएगी आज।” वह भी कमर उठा के साथ दे रही थी, “हाँ चोद, जोर से चोद, मेरी गाँड भी मार लेना आज।”
हमने घंटों चोदा। पहले मिशनरी पोज में, फिर कुत्ते वाली स्टाइल में। मैंने उसकी गाँड के दोनों गाल फैलाए और लंड चूत में घुसा के पीछे से चोदा। प्रिया की गाँड लाल हो गई थी थप्पड़ मारने से। “मार मेरी गाँड, चोद मेरी चूत,” वह बोल रही थी। रस बह रहा था, लंड पर चिपचिपा हो गया था।
फिर मैंने उसे उल्टा लिटाया और गाँड में उँगली डाली। “आज तेरी गाँड मारूँगा प्रिया।” वह सहमत हो गई। थोड़ा तेल लगाया और लंड गाँड में घुसाने लगा। पहले दर्द हुआ लेकिन फिर मजा आने लगा। “ओह्ह्ह, गाँड फट रही है लेकिन अच्छा लग रहा है,” वह बोली। मैंने गाँड भी चोदी और चूत में उँगली डाली। दोनों छेदों से खेल रहा था।
हम दोनों झड़ गए कई बार। मेरा वीर्य उसकी चूत और गाँड में भर गया। प्रिया थक गई लेकिन फिर भी बोली, “एक बार और चोद अर्जुन।” हमने पूरी रात चोदा। सुबह तक थककर सो गए।
यह थी मेरी village ciuple romance की कहानी। गाँव में ऐसी चुदाई का मजा ही अलग है। प्रिया आज भी मेरी चूत की भूख मिटाती है। अगर आपको और कहानियाँ चाहिए तो बताना।