नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं मध्य प्रदेश के देवास शहर में एक छोटे से प्रोजेक्ट के सिलसिले में आया था। ऑफिस का काम खत्म करके शाम को होटल लौट रहा था जब अचानक एक मधुर लेकिन बेहद सेक्सी आवाज कानों में पड़ी। कोई औरत “देवास का गाना” गा रही थी, वो लोकगीत जो यहां के त्योहारों में गाया जाता है लेकिन उसकी आवाज में कुछ ऐसा जादू था कि मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया।
मैं रुक गया। सामने वाली गली में एक पुराने मकान की छत पर एक औरत खड़ी गा रही थी। नाम था उसका मीरा। उम्र करीब 32 साल, शादीशुदा भाभी टाइप, गोरी चमड़ी, भारी-भारी स्तन जो ब्लाउज में बंद होने की कोशिश कर रहे थे, और पीछे से देखने पर गोल-गोल गोलियां जैसी गांड। गाना गाते हुए वो कमर हिला रही थी, जैसे कोई नाच रही हो। मैं चुपके से पास गया और देखता रहा।
उसने मुझे देख लिया। मुस्कुराई और गाना बंद करके नीचे उतर आई। “अरे भाई, अकेले घूम रहे हो? देवास का गाना सुनके मन नहीं भरा क्या?” उसकी आवाज में पहले से ही गंदी हंसी थी। मैंने कहा, “भाभी, गाना तो सुन लिया, लेकिन आपकी आवाज ने कुछ और ही हालत कर दी।” वो हंसी और बोली, “आओ अंदर, और सुनाते हैं।”
हम उसके छोटे से फ्लैट में गए। अंदर जाते ही उसने दरवाजा बंद किया और सीधे मेरे पास आकर खड़ी हो गई। “देवास का गाना सुनके लंड खड़ा हो गया ना?” उसने सीधे मेरे लंड पर हाथ रख दिया। मैंने भी हिम्मत करके उसके एक स्तन को दबा लिया। “हां भाभी, अब चुप नहीं बैठ सकता।”
मीरा ने ब्लाउज के हुक खोले। उसके स्तन बाहर निकल आए, बड़े-बड़े, काले-काले निप्पल, और नीचे से पसीने की बूंदें टपक रही थीं। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। वो सिसकारियां मारने लगी, “अर्जुन, जोर से चूस, मेरी चूत गीली हो रही है।” मैंने दूसरे स्तन को हाथ से दबाया, उंगलियों से निप्पल को मरोड़ा। मीरा ने मेरी पैंट खोल दी और लंड बाहर निकाल लिया। “वाह, कितना मोटा और लंबा लंड है। देवास का गाना सुनके इतना तना हुआ?”
उसने घुटनों के बल बैठकर लंड मुंह में ले लिया। जीभ से लंड के सिरे को चाटते हुए वो बोली, “कितना गर्म है, अब चूसूं?” मैंने उसके बालों में हाथ डाला और जोर से मुंह में ठेल दिया। “चूस भाभी, पूरा लंड गले तक ले।” वो गले तक ले गई, थूक की आवाजें आने लगीं, “ग्लुक-ग्लुक।” लंड पर उसकी लार की परत चढ़ गई। मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारा, “और गहराई तक ले, रंडी।”
मीरा उठी और साड़ी ऊपर चढ़ा दी। उसकी चूत साफ दिख रही थी, बाल कटे हुए, होंठ फूले हुए, और चूत का रस जांघों तक बह रहा था। “देख, कितनी गीली हो गई हूं तेरे लंड के लिए।” मैंने उंगली अंदर डाली, दो उंगलियां, और जोर-जोर से हिलाने लगा। “आह्ह्ह, अर्जुन, उंगली से मत मार, लंड से चोद।”
हम बेड पर चढ़ गए। मीरा ने लेटकर टांगें फैला दीं। मैंने लंड चूत के मुंह पर रखा और एक झटके में पूरा अंदर घुसा दिया। “आह्ह्ह साली, कितनी टाइट चूत है!” मीरा चीख पड़ी, “जोर से चोद, देवास का गाना सुनके आज रात भर चोदना है!” मैंने जोर-जोर से धक्के मारे। “थप-थप” की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। उसके स्तन उछल रहे थे, मैंने एक हाथ से दबाया और दूसरी तरफ मुंह लगाया। चूत का रस मेरे लंड पर बह रहा था, बेड गीला हो रहा था।
मीरा ने मुझे पलट दिया और ऊपर चढ़ गई। “अब मैं चोदती हूं।” वो लंड पर बैठ गई और कमर हिलाने लगी। “देख, मेरा गांड कैसे हिल रहा है?” मैंने उसकी गांड को हाथों से पकड़कर ऊपर-नीचे करने लगा। “भाभी, तेरी चूत में लंड डूब रहा है।” वो गाना गाने लगी, वही देवास का गाना, लेकिन गंदे शब्दों के साथ, “देवास का गाना…

तेरे लंड से चूत फट जाए…”
हमने पोजीशन बदली। डॉगी स्टाइल में। मीरा ने मुंह नीचे और गांड ऊपर उठा ली। मैंने पीछे से लंड घुसाया। गांड पर थप्पड़ मारते हुए चोदने लगा। “थप-थप-थप”, उसकी गांड लाल हो गई। “अर्जुन, गांड भी मार, लेकिन पहले चूत भर दे!” चूत से “चप-चप” की आवाजें आ रही थीं। मीरा चिल्ला रही थी, “मेरा पानी निकल रहा है, जोर से!”
मैंने उसे पीठ के बल लिटाया और फिर से चोदना शुरू किया। लंड अंदर-बाहर हो रहा था, चूत का रस निकलकर मेरे अंडों तक आ रहा था। “भाभी, अब मेरा भी निकलने वाला है।” “अंदर ही छोड़, मेरी चूत भर दे!” मैंने जोर का झटका मारा और गरम-गरम वीर्य उसकी चूत में भर दिया। वो भी झड़ गई, शरीर कांपने लगा।
लेकिन रात अभी खत्म नहीं हुई। हमने फिर शुरू किया। इस बार मीरा ने मुझे चूसकर लंड फिर खड़ा किया। “देवास का गाना सुनके आज तू मेरी चूत का मालिक बन गया।” हम पूरे फ्लैट में घूम-घूमकर चोदते रहे, किचन में, सोफे पर, यहां तक कि बालकनी पर भी जहां बाहर से गाना सुनाई दे रहा था। हर पोजीशन में वही गंदी बातें, वही “चोद मुझे”, “मेरा लंड ले”, “गांड मार”, “चूत फाड़” जैसे शब्द।
सुबह तक हम थक चुके थे। मीरा ने कहा, “अर्जुन, जब भी देवास आना, मेरे पास आना। ये गाना अब सिर्फ तेरे लिए है।”
(कहानी समाप्त)