
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली के करोल बाग इलाके में रहता हूँ। उम्र मेरी पच्चीस साल है और मैं एक छोटी सी आईटी कंपनी में जॉब करता हूँ। मेरे सबसे करीबी दोस्त का नाम विक्रम है। विक्रम और मैं बचपन से साथ पढ़े हैं। उसकी गर्लफ्रेंड का नाम अनन्या है। अनन्या मुंबई से दिल्ली शिफ्ट हुई थी जॉब की वजह से। वो बेहद खूबसूरत है। गोरी चमड़ी, बड़ी-बड़ी आँखें, मोटे होंठ, और सबसे खास बात उसकी छाती। उसकी छाती इतनी बड़ी है कि टी-शर्ट में भी फटने को तैयार लगती है। विक्रम अक्सर मुझे उसकी फोटो दिखाता और बताता कि वो कितनी अच्छी चोदती है। लेकिन मुझे कभी उम्मीद नहीं थी कि एक दिन मैं खुद उसकी चूत में अपना लंड डालूँगा।
ये कहानी शुरू हुई पिछले साल की मॉनसून में। विक्रम की जॉब में ट्रांसफर हो गया था बैंगलोर। वो दो महीने के लिए चला गया। अनन्या अकेली दिल्ली में रह गई। वो हमारे फ्लैट के पास ही PG में रहती थी। एक शाम विक्रम ने मुझे फोन किया और बोला, “राहुल, अनन्या अकेली है। अगर कोई मदद चाहिए तो देख लेना।” मैंने हाँ कर दी। अगले दिन मैं उसके PG पहुँच गया। बारिश हो रही थी। अनन्या ने दरवाजा खोला। वो शॉर्ट्स और टाइट टॉप में थी। उसके निप्पल टॉप से साफ दिख रहे थे। उसने मुझे अंदर बुलाया। हम चाय पीने लगे। बातें होती गईं। अनन्या ने बताया कि विक्रम ने उसे दो महीने तक नहीं छुआ। वो बहुत हॉर्नी है।
धीरे-धीरे बातें सेक्स पर आ गईं। अनन्या ने कहा, “राहुल, तू विक्रम का दोस्त है लेकिन मुझे सच में कोई चाहिए जो मुझे अच्छे से चोदे।” मैं चुप रहा। उसने मेरी जांघ पर हाथ रखा। फिर वो मेरे पास आ गई और मेरे होंठों पर किस करने लगी। मैंने भी उसे पकड़ लिया। हम दोनों सोफे पर लिपट गए। मैंने उसका टॉप उतारा। उसकी ब्रा के अंदर से दो मोटी-मोटी छातियाँ निकलीं। निप्पल गुलाबी और खड़े हुए थे। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। अनन्या चीखने लगी, “आह्ह्ह राहुल, और जोर से चूस, मेरी चूत गीली हो गई है।”
मैंने उसकी शॉर्ट्स भी उतार दी। अंदर पैंटी गीली थी। मैंने पैंटी हटाई। उसकी चूत बिल्कुल साफ, गुलाबी और बाल रहित थी। चूत के होठ मोटे थे और बीच से रस टपक रहा था। मैंने उंगली डाली। चूत बहुत टाइट थी। अनन्या बोली, “अपना लंड निकाल।” मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड सात इंच का, मोटा और नसों से भरा हुआ खड़ा था। अनन्या ने उसे हाथ में लिया और मसलने लगी। फिर मुंह में लिया। वो चूसने लगी जैसे आइसक्रीम खा रही हो। “उम्म्म्म, तेरा लंड बहुत स्वादिष्ट है राहुल। विक्रम का तो छोटा है।”
मैंने उसे सोफे पर लिटाया। उसकी टाँगें फैलाईं। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर रखी। चूत का स्वाद खट्टा-मीठा था। मैं चाटने लगा। अनन्या चीख रही थी, “हाँ राहुल, मेरी चूत चाट, और अंदर जीभ डाल।” मैंने जीभ अंदर डाली। फिर दो उंगलियाँ डालकर फिंगरिंग करने लगा। उसकी चूत से पानी निकल रहा था। वो झड़ गई। “आह्ह्ह्ह मैं झड़ गई राहुल!”
अब मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा। धीरे से दबाया। लंड का सिरा अंदर गया। अनन्या चीखी, “आह्ह साला, धीरे, बहुत मोटा है।” मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर घुसा दिया। चूत गर्म और गीली थी। मैंने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। “थप थप थप” की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। अनन्या बोली, “चोद मुझे राहुल, अपनी दोस्त की गर्लफ्रेंड को चोद।” मैं और जोर से चोदने लगा। उसकी छातियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं। मैंने उन्हें हाथ में लिया और निचोड़ा।
हम पोजीशन बदलते गए। पहले डॉगी स्टाइल में। मैंने उसकी गाँड पकड़ी और लंड पीछे से घुसाया। गाँड मोटी और नरम थी। मैंने गाँड पर थप्पड़ मारे। “थप थप”। अनन्या चीख रही थी, “मेरी गाँड मार, मेरी चूत फाड़ दे।” फिर वो ऊपर आई और मेरे ऊपर बैठ गई। वो ऊपर-नीचे होने लगी। उसकी चूत मेरे लंड को निगल रही थी। रस नीचे बह रहा था। मैंने उसकी कमर पकड़ी और ऊपर से धक्के मारे।
हम दो घंटे तक चोदते रहे। मैंने तीन बार झड़ाया। पहली बार उसकी चूत में। दूसरी बार उसके मुँह में। तीसरी बार उसकी गाँड में। अनन्या भी चार बार झड़ चुकी थी। उसकी चूत और गाँड लाल हो गई थी। रस से पूरा बिस्तर गीला था।
बाद में हम नहाए। नहाते वक्त भी मैंने उसे दीवार से लगाकर चोदा। पानी के नीचे उसकी गीली चूत में लंड डाला। अनन्या बोली, “राहुल, अब तू ही मेरा असली दोस्त है। विक्रम को कभी मत बताना।”
ये दो महीने तक चला। जब विक्रम लौटा तो हमने सब बंद कर दिया, लेकिन वो रातें कभी नहीं भूलूँगा। अनन्या की चूत का स्वाद, उसकी चीखें, और वो गंदी बातें। दिल्ली की मॉनसून की बारिश में हमने जो मस्ती की, वो दोस्त की गर्लफ्रेंड के साथ “friend with girlfriend india” का असली मजा था।
(कहानी यहीं खत्म नहीं होती। हमने और भी कई बार मिलकर चोदाई की, लेकिन वो अलग कहानियाँ हैं।)