नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम नितिन है। मैं दिल्ली में रहता हूँ और एक छोटे से फ्लैट में अकेला रहता हूँ। मेरी उम्र 32 साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ। आज मैं आपको अपनी एक सच्ची और बेहद गंदी कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो मेरे और मेरी पड़ोस वाली आक्षरा के बीच हुई। आक्षरा मेरी पड़ोसन है, उसकी उम्र 29 साल है, शादीशुदा लेकिन पति नौकरी के सिलसिले में अक्सर बाहर रहता है। उसका पति नितिक है, इसलिए हम मजाक में कहते हैं यही रिश्ता क्या कहलाता है। लेकिन वो रिश्ता धीरे-धीरे इतना गंदा और चुदाई भरा हो गया कि आज भी याद करके मेरा लंड खड़ा हो जाता है।
आक्षरा का फिगर देखकर कोई भी आदमी पागल हो जाए। उसकी छाती पर 36 इंच के भारी-भरे स्तन लटकते हैं, काली निप्पल्स वाली गोल-गोल चूचियाँ जो छूने पर गर्म-गर्म लगती हैं। उसकी कमर पतली है, लेकिन नितंब 40 इंच के मोटे और गोले हैं जिन्हें देखकर मन करता है कि तुरंत उनको चाट लूँ। उसकी चूत पूरी तरह गंजी रखी होती है, होंठ मोटे और गुलाबी, अंदर से गुलाबी रस से भरी। जब वो सलवार सूट पहनती है तो उसके स्तनों के नीचे का क्लीवेज और चूत के पास की फटी हुई लाइन साफ दिखती है।
एक दिन शाम को बारिश हो रही थी। मैं छत पर कपड़े सुखा रहा था। आक्षरा भी वहाँ आई थी। उसका पति बाहर गया हुआ था। हमारी बातें शुरू हुईं। वो बोली, “नितिन भाई, ये बारिश में अकेले रहना कितना मुश्किल है।” मैंने कहा, “आक्षरा, तुम्हें भी तो अकेलापन सताता होगा ना?” उसकी आँखों में चमक थी। धीरे-धीरे बातें गंदी होने लगीं।
उसने बताया कि नितिक उसे ठीक से नहीं चोदता। “उसका लंड छोटा है, जल्दी झड़ जाता है। मेरी चूत को असली मर्दाना लंड की जरूरत है।” ये सुनकर मेरा लंड सूट के अंदर खड़ा हो गया। आक्षरा ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराई। “नितिन, तुम्हारा तो बड़ा लग रहा है।”
हम नीचे उसके फ्लैट में चले गए। दरवाजा बंद करते ही आक्षरा ने मेरी जिप खोली और मेरा 8 इंच का मोटा लंड बाहर निकाल लिया। “वाह, कितना गर्म और मोटा है!” उसने तुरंत घुटनों के बल बैठकर मेरे लंड को मुँह में ले लिया। उसकी गर्म साँसें लंड पर पड़ रही थीं। वो बोली, “नितिन, मेरी चूत चाटो, मुझे अपनी जुबान से रस निकालो।”
मैंने उसकी सलवार उतारी। उसकी चूत पहले से ही गीली थी। मैंने उसके मोटे चूत के होंठ फैलाए और जीभ से अंदर तक चाटा। आक्षरा चीखने लगी, “आह्ह्ह… नितिन, मेरी चूत को चूसो, रस पी लो!” उसके स्तन दबाते हुए मैंने उसकी चूत चाटी, क्लिटोरिस को काटा, अंदर उंगली डाली। वो झड़ गई, उसकी चूत से सफेद-गाढ़ा रस निकला जिसे मैंने चाट लिया।
फिर आक्षरा ने मुझे बिस्तर पर लिटाया। वो मेरे ऊपर चढ़ी, अपने मोटे नितंब हिलाती हुई मेरे लंड को अपनी चूत में उतारने लगी। “ले, नितिन, मेरी चूत में अपना लंड घुसेड़!” उसकी चूत टाइट थी, लंड धीरे-धीरे अंदर जाता गया। जब पूरा लंड घुस गया तो आक्षरा चीख पड़ी, “आह्ह्ह…

फट गई मेरी चूत! चोदो मुझे, जोर-जोर से!”
हम घंटों चोदते रहे। मैंने उसे डॉगी स्टाइल में चोदा, उसके बाल खींचे, गालों पर थप्पड़ मारे। “ले रंडी, मेरे लंड का मजा!” आक्षरा चिल्लाती, “हाँ, मुझे अपनी रंडी बना लो, मेरी गंदी चूत को फाड़ दो!” उसके स्तन लटकते हुए झूल रहे थे, मैं उन्हें दबाता, निप्पल्स चूसता।
फिर मैंने उसकी गांड पर हमला किया। आक्षरा ने कहा, “नितिन, मेरी गांड भी फाड़ दो, आज नितिक के रिश्ते को भूल जाओ।” मैंने उसकी गांड में उंगली डाली, फिर लंड घुसाया। वो दर्द से चीखी लेकिन मजा भी ले रही थी। “आह्ह… गांड फट रही है, लेकिन चोदते रहो!”
हमने कई पोजीशन आजमाईं। आक्षरा ने मेरे लंड पर बैठकर ऊपर-नीचे हिलना शुरू किया। उसकी चूत का रस मेरे लंड पर बह रहा था। मैंने उसकी कमर पकड़कर जोर-जोर से ऊपर धक्का मारा। “ले, आक्षरा, तेरी चूत अब मेरी है!” वो चीखती रही, “हाँ, चोद मुझे, रस निकाल मेरी चूत से!”
आखिर में मैंने उसकी चूत में झड़ने लगा। गरम-गरम वीर्य उसकी चूत भर गया। आक्षरा ने सब चाट लिया। “नितिन, ये रिश्ता क्या कहलाता है? नितिक-आक्षरा का समय अब तुम्हारा हो गया।”
हम पूरी रात चोदते रहे। सुबह तक आक्षरा की चूत, गांड और मुँह सब मेरे लंड से भर चुके थे। उसके स्तनों पर काट के निशान थे। वो बोली, “नितिन, अब रोज आना, मेरी चूत की प्यास बुझाना।”
ये कहानी यहीं खत्म नहीं होती। अगले दिन भी हमने नहाते हुए चुदाई की, उसकी गीली चूत में लंड डाला, पानी में झड़ गए। आक्षरा अब मेरी पर्सनल चूत बन चुकी थी। नितिक को पता नहीं चला, लेकिन हमारा ये गंदा रिश्ता चलता रहा।
(शेष विस्तार: हमने रसोई में, बालकनी में, कार में भी चुदाई की। आक्षरा की चूत हमेशा मेरे लंड के लिए तैयार रहती। उसकी गांड में रोज लंड घुसता, वो चीखती, “चोदो, और जोर से!” उसके स्तनों का दूध जैसे रस मेरे मुँह में भरता। ये रिश्ता अब सिर्फ चुदाई का था, नैतिकता भूल चुके थे। पूरी रात की चुदाई में आक्षरा तीन-चार बार झड़ती, मैं उसकी चूत चाटता। अंत में वो बोली, “नितिन, तू मेरा असली मर्द है।”)
ये मेरी कहानी थी दोस्तों। आक्षरा अब भी मेरे पास आती है जब नितिक बाहर होता है। उसकी चूत अब मेरे लंड की गुलाम है।