नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं दिल्ली के एक मध्यम वर्गीय परिवार से हूं और पिछले दो साल से एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूं। लेकिन आज मैं आपको अपनी एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूं जो मेरी जिंदगी बदल गई। ये कहानी मेरी पड़ोस वाली अक्षरा और उसके पति नैतिक की है। नैतिक और अक्षरा सीरियल की तरह ही दोनों एक-दूसरे को बहुत प्यार करते थे, लेकिन सीरियल में जो दिखता है वो असल जिंदगी में कभी-कभी बहुत अलग होता है। अक्षरा उम्र में मेरे ही बराबर थी, करीब पच्चीस साल की, गोरी चमड़ी, मोटे-मोटे स्तन जो टी-शर्ट में फटे पड़ते थे, और गोल-गोल गोलियां जैसी गांड। नैतिक ऑफिस जाता था और अक्सर लेट आता था।
एक बार बारिश का मौसम था। दिल्ली में मॉनसून की बारिश जोरों पर थी। मैं अपने फ्लैट में अकेला था। अक्षरा का फ्लैट मेरे बगल में था। शाम को करीब सात बजे दरवाजे पर दस्तक हुई। जब मैंने खोला तो अक्षरा खड़ी थी, भीगी हुई, उसकी साड़ी शरीर से चिपकी हुई थी। उसके स्तन साफ दिख रहे थे, निप्पल्स खड़े हो चुके थे। उसने कहा, “अर्जुन भाई, बिजली चली गई है हमारे फ्लैट में, नैतिक अभी आएंगे नहीं, क्या आप मदद कर सकते हो?”
मैंने उसे अंदर बुलाया। हम बातें करने लगे। वो सीरियल की बात कर रही थी जिसमें नैतिक और अक्षरा के बीच रोमांस दिखाया जाता है। अचानक अक्षरा ने कहा, “अर्जुन, तुम्हें पता है सीरियल में सब झूठा है। असल में नैतिक मुझे ठीक से चोदते ही नहीं।” मैं हैरान रह गया। उसकी आंखों में एक अलग सी चमक थी। वो करीब आ गई। उसकी सांसों की गर्माहट मेरे चेहरे पर पड़ रही थी। “मैं भूखी हूं अर्जुन, बहुत दिनों से।”
उसने खुद ही अपना ब्लाउज खोल दिया। उसके बड़े-बड़े स्तन बाहर आ गए, निप्पल्स गुलाबी और सख्त। मैंने तुरंत एक स्तन मुंह में ले लिया और चूसने लगा। अक्षरा चीख पड़ी, “आह्ह्ह… अर्जुन, जोर से चूसो, नैतिक कभी ऐसे नहीं चूसता।” मैंने दूसरा स्तन भी हाथ में लिया और मसलने लगा। उसकी साड़ी नीचे सरक गई। मैंने उसकी पेटीकोट खींची तो उसकी चूत सामने थी, बालों से भरी, लेकिन गीली-गीली। मैंने उंगली डाली तो अक्षरा कांप गई। “ओह्ह्ह… मेरी चूत देखो कितनी गीली है, तुम्हारे लंड का इंतजार कर रही है।”
मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड खड़ा हो चुका था, सात इंच लंबा और मोटा। अक्षरा ने उसे हाथ में लिया और बोली, “वाह, नैतिक का तो इससे छोटा है।” उसने मुंह में लिया और चूसने लगी। उसकी जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी, लार टपक रही थी। मैं उसके बालों में हाथ डालकर जोर-जोर से धक्के मारने लगा। “ले अक्षरा, पूरा लंड निगल ले, तेरी चूत फाड़ दूंगा।” वो गले तक ले रही थी, आंखों से आंसू आ रहे थे लेकिन वो रुक नहीं रही थी।
फिर मैंने उसे बेड पर लिटाया। उसकी टांगें फैलाईं और चूत चाटने लगा। उसका रस मीठा था, मैं जीभ अंदर डालकर चाट रहा था। अक्षरा चीख रही थी, “अर्जुन… हां… चूत चाटो… नैतिक कभी चाटता नहीं… ओह माँ… मैं झड़ने वाली हूं!” वो झड़ गई, उसकी चूत से रस निकलकर मेरे मुंह में आ गया। मैंने सब पी लिया।
अब मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा। लंड आधा अंदर चला गया। अक्षरा चीखी, “आह्ह्ह… धीरे… मोटा है तेरा… मेरी चूत फट जाएगी!” लेकिन मैं रुका नहीं। दो-तीन धक्कों में पूरा लंड अंदर घुस गया। अक्षरा की आंखें बंद हो गईं, मुंह खुला था। मैं जोर-जोर से चोदने लगा। “ले रंडी, ले मेरा लंड, तेरी चूत को फाड़ दूंगा!” अक्षरा भी चिल्ला रही थी, “हां चोदो मुझे… नैतिक से बेहतर चोदो… मेरी गांड भी मारो!”
हम पोजीशन बदलते रहे। पहले मिशनरी में, फिर डॉगी स्टाइल में। डॉगी में मैंने उसकी गांड थपथपाई और लंड उसकी चूत में घुसाया। थप-थप की आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। अक्षरा की गांड लाल हो गई थी। “मारो थप्पड़… गांड लाल कर दो!” फिर वो ऊपर चढ़ गई और मेरे ऊपर बैठकर चोदने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे, मैं उन्हें हाथों से दबा रहा था। वो बोली, “देखो कैसे चोद रही हूं… नैतिक को कभी नहीं बताना।”
हम घंटों चोदते रहे। तीन बार झड़ चुके थे लेकिन लंड फिर खड़ा हो जाता था। आखिर में मैंने उसकी गांड में लंड डालने की कोशिश की। अक्षरा डरी, “नहीं… गांड में दर्द होगा!” लेकिन मैंने लुब्रिकेंट लगाकर धीरे-धीरे डाला। पहला धक्का और अक्षरा चीख पड़ी, “आह्ह्ह… फट गई…

लेकिन अच्छा लग रहा है!” मैं धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ाता गया। उसकी गांड भी टाइट थी। हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे।
आखिरकार मैं झड़ने वाला था। अक्षरा बोली, “मेरे मुंह में डालो!” मैंने लंड उसके मुंह में डाला और गरम-गरम वीर्य निकाल दिया। अक्षरा ने सब निगल लिया। हम दोनों थककर लेट गए। अक्षरा ने कहा, “अर्जुन, ये सीक्रेट रहेगा। नैतिक और अक्षरा सीरियल जैसा प्यार तो दिखावा है, असल में चुदाई चाहिए।”
उस रात के बाद कई बार मिले। हर बार नई पोजीशन, नया मजा। अक्षरा की चूत अब मेरे लंड की आदि हो चुकी थी। नैतिक को कभी शक नहीं हुआ।
(कहानी यहीं खत्म नहीं होती, लेकिन दोस्तों, असली जिंदगी में ऐसे मौके मिलना मुश्किल है। अगर आपको और डिटेल चाहिए तो बताना।)