नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में रहता हूँ, एक छोटे से फ्लैट में। उम्र मेरी २८ साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ। ये कहानी मेरी असली जिंदगी की है, जब मेरी पड़ोस वाली अक्षरा भाभी ने अपना नया नाटक शुरू किया। अक्षरा भाभी की उम्र ३२ साल है, शादीशुदा लेकिन पति अक्सर बाहर रहते हैं। वो बेहद खूबसूरत है – गोरी चमड़ी, बड़े-बड़े स्तन जो टी-शर्ट में फिट नहीं होते, मोटी गोल गांड और पतली कमर। उसकी आँखें हमेशा शरारत भरी रहती हैं।
एक शाम की बात है। बारिश हो रही थी और मैं अकेला फ्लैट में बैठा पोर्न देख रहा था। अचानक दरवाजे पर दस्तक हुई। मैंने खोला तो अक्षरा भाभी खड़ी थी, भीगी हुई, उसका व्हाइट टॉप शरीर से चिपका हुआ था और ब्रा का निशान साफ दिख रहा था। “राहुल, लाइट चली गई है मेरे फ्लैट में, क्या तुम्हारे पास कैंडल है?” उसने पूछा। मैंने अंदर बुलाया। जैसे ही वो अंदर आई, उसकी नजर मेरे लैपटॉप पर पड़ी जहां एक लड़की चूत चाट रही थी। वो मुस्कुराई और बोली, “अरे वाह, नया नाटक चल रहा है क्या?”
मैं शर्मा गया लेकिन वो सीधे सोफे पर बैठ गई। “राहुल, मुझे पता है तुम मुझे देखते हो। मेरे स्तन, मेरी गांड। आज मैं तुम्हें अपना नया नाटक दिखाती हूँ।” उसने टॉप उतारा। उसके बड़े स्तन ब्रा से बाहर निकल आए, निप्पल्स सख्त और गुलाबी। मैंने तुरंत उसके पास जाकर एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। “आह्ह्ह… राहुल, जोर से चूस, मेरी चूत गीली हो रही है,” वो चीखी।
मैंने उसकी ब्रा फेंकी और उसके स्तनों को दोनों हाथों से दबाया। दूध जैसा रस नहीं लेकिन पसीना और उसकी खुशबू मुझे पागल कर रही थी। फिर मैंने उसके पजामे का नाड़ा खोला। अंदर से उसकी चूत साफ शेव की हुई थी, होंठ फूले हुए और चमकदार रस बह रहा था। “देखो ना, भाभी की चूत कितनी प्यासी है,” मैंने कहा और दो उंगलियां अंदर डाल दीं। “हाँ राहुल, उंगलियां घुसा, मेरी चूत फाड़ दो,” वो कराहने लगी।
मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड ७ इंच का खड़ा हो चुका था, नसें फूल रही थीं और सिरे से प्री-कम टपक रहा था। अक्षरा भाभी ने उसे हाथ में लिया और बोली, “कितना मोटा लंड है यार, आज मेरी चूत फट जाएगी।” उसने मुंह में लिया और चूसने लगी। “ग्लुक ग्लुक” की आवाजें आ रही थीं। मैं उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। “ले भाभी, पूरा लंड गले तक ले, तेरी रंडी वाली चूत को आज चोदूंगा,” मैं बोल रहा था।
फिर मैंने उसे सोफे पर लिटाया और उसकी टांगें फैलाईं। मेरी जीभ उसकी चूत पर फिरने लगी। “आह्ह्ह… चाटो राहुल, मेरी चूत का रस पी लो,” वो चिल्ला रही थी। मैंने उसका क्लिट चूसा और उंगलियां अंदर-बाहर कीं। उसका शरीर काँप रहा था। “मैं झड़ने वाली हूँ!” उसने कहा और गरम-गरम रस मेरे मुंह में छोड़ दिया।
अब बारी थी असली चुदाई की। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा। “डालो ना, फाड़ दो मेरी चूत,” अक्षरा ने कहा। मैंने एक जोरदार धक्का मारा। “आह्ह्ह…

माँ!” वो चीखी। मेरा लंड आधा अंदर चला गया। फिर दूसरा धक्का और पूरा लंड उसकी गर्म चूत में घुस गया। “तेरी चूत कितनी टाइट है भाभी,” मैंने कहा और जोर-जोर से चोदने लगा। “प्लाप प्लाप” की आवाजें, उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें हाथों से दबाया और निप्पल्स चूसे।
हमने पोजीशन बदली। वो मेरे ऊपर चढ़ गई। “अब मैं नाटक करूंगी,” वो बोली और अपने कूल्हे घुमाते हुए लंड पर बैठने लगी। उसकी गांड मेरे हाथों में थी, मैं उसे थपथपा रहा था। “मारो मेरी गांड, चोदो मुझे,” वो बोल रही थी। मैंने उल्टा कर दिया और डॉगी स्टाइल में चोदने लगा। उसकी गांड के छेद को देखकर मैंने उंगली डाल दी। “नहीं राहुल, गांड मत मारो अभी,” वो बोली लेकिन मैंने लंड निकालकर थोड़ा सा गांड में घुसा दिया। “आह्ह्ह… धीरे,” वो कराह रही थी।
हम घंटों चोदते रहे। फर्श पर, दीवार से टेक कर, किचन में। हर बार वो नया नाटक करती – कभी रंडी बनती, कभी भाभी। “मेरा रस निकाल दो राहुल, मेरी चूत भर दो,” वो चीख रही थी। आखिर में मैंने उसके मुंह में लंड डाला और गरम-गरम वीर्य निकाल दिया। वो सब पी गई।
ये नाटक कई बार दोहराया। अक्षरा भाभी अब मेरी नियमित पार्टनर है। उसकी चूत, गांड, स्तन – सब मेरे हैं।
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