नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में रहता हूँ और एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ। उम्र मेरी २८ साल है। आज मैं आपको अपनी जिंदगी की सबसे गंदी और मजेदार चुदाई की कहानी सुनाता हूँ। कहानी है मेरी पड़ोस वाली लड़की अक्षरा की। अक्षरा २५ साल की है, गोरी चमड़ी, मोटे-मोटे स्तन, चौड़ी कमर और गोल-गोल गांड वाली। उसकी आँखें बड़ी-बड़ी हैं और होंठ लाल-लाल। हम दोनों एक ही बिल्डिंग में रहते हैं। अक्सर सीढ़ियों पर या लिफ्ट में मुलाकात हो जाती थी। शुरू-शुरू में सिर्फ हाई-हैलो होती थी, लेकिन धीरे-धीरे बातें बढ़ने लगीं।
एक दिन बारिश में हम दोनों एक साथ लिफ्ट में फंस गए। अक्षरा की साड़ी थोड़ी भीग गई थी, जिससे उसके स्तन साफ दिख रहे थे। मैंने देखा तो मेरा लंड खड़ा हो गया। अक्षरा ने भी मेरी तरफ देखा और मुस्कुराई। “राहुल, तुम इतने घबरा क्यों रहे हो?” उसने पूछा। मैंने कहा, “अक्षरा, तुम्हारी साड़ी देखकर कुछ हो रहा है।” वो हँसी और बोली, “तो फिर रोमांटिक सीन शूट कर लेते हैं ना?” यही वो पल था जब हमारी अक्षरा romantic scenes शुरू हुईं।
उसी शाम मैं उसके फ्लैट पर चला गया। अक्षरा अकेली थी। उसने दरवाजा खोला तो सिर्फ एक पतली नाइट suit पहनी हुई थी। उसके स्तन साफ उभर रहे थे। मैंने अंदर आते ही उसे दीवार से लगाकर चूम लिया। उसके होंठ नरम और मीठे थे। जीभ से जीभ लड़ाने लगे। मेरे हाथ उसके स्तनों पर घूमने लगे। अक्षरा सिसकारियाँ ले रही थी, “आह्ह… राहुल, धीरे से दबाओ… मेरा माल फूल रहा है।” मैंने उसकी नाइट suit उतारी। अंदर ब्रा और पैंटी थी। ब्रा के नीचे से उसके गुलाबी निप्पल दिख रहे थे। मैंने ब्रा का हुक खोला और दोनों स्तन बाहर निकाल लिए। बड़े-बड़े, गोल और भारी। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। अक्षरा चीख रही थी, “हाँ… चूसो… मेरी चूची चूसो… लंड खड़ा कर दो मेरा।”
मैंने उसकी पैंटी भी उतार दी। उसकी चूत पूरी तरह साफ शेव की हुई थी। फूल गई थी और रस टपक रहा था। मैंने उंगली डाली तो अक्षरा काँप गई। “राहुल, उंगली मत डाल… सीधा लंड डाल दे… मेरी चूत फटने को है।” मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड ७ इंच का मोटा खड़ा था। अक्षरा ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी। “कितना बड़ा है तेरा लंड… मेरी चूत में पूरा घुस जाएगा।” वो घुटनों पर बैठ गई और लंड मुंह में ले लिया। चूसने लगी, “चल… चूस… पूरा निगल लूँगी।” उसकी जीभ मेरे लंड के नीचे फिर रही थी। लार टपक रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर मुंह चोदना शुरू कर दिया। “ले… ले मेरी रांड… अक्षरा… तेरी मुँह चुदाई कर रहा हूँ।”
फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। उसके पैर फैलाए और चूत चाटने लगा। उसकी चूत का स्वाद खट्टा-मीठा था। रस पी रहा था। अक्षरा चीख रही थी, “आह्ह… चाट… मेरी चूत चाट… जीभ अंदर डाल… मैं झड़ने वाली हूँ।” मैंने जीभ अंदर डाली और चूसने लगा। अक्षरा का शरीर काँप रहा था। “राहुल… अब चोद… चोद मुझे… मेरी चूत फाड़ दे।” मैं ऊपर आया और लंड उसकी चूत पर रखा। धीरे से दबाया। लंड का सिरा अंदर घुसा। अक्षरा चीख पड़ी, “आह्ह… धीरे… मोटा है तेरा… पूरा डाल… चोद मुझे।” मैंने एक जोर का झटका मारा। लंड आधा अंदर घुस गया। फिर दूसरा झटका और पूरा लंड उसकी चूत में समा गया। अक्षरा की आँखें बंद हो गईं। “हाँ… चोद… जोर से चोद… मेरी गांड भी मारना।”
मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। थप-थप की आवाजें आ रही थीं। अक्षरा के स्तन उछल रहे थे। मैं उन्हें दबा रहा था। “ले… ले रंडी… तेरी चूत का रस निकाल रहा हूँ।” अक्षरा बोल रही थी, “हाँ… और जोर से… मेरी चूत फट रही है… तेरा लंड बहुत मोटा है… आह्ह… मैं मर गई।” हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे। मैंने उसे उल्टा कर दिया। गांड ऊपर करके पीछे से चोदने लगा। उसकी गांड के छेद को देखकर मेरा मन हुआ। मैंने उंगली गांड में डाली। अक्षरा बोली, “नहीं… गांड मत मार…

चूत मार… पर अगर चाहे तो थोड़ा सा डाल।” मैंने लंड निकाला और थोड़ा सा तेल लगा<|eos|>