नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विक्रम है। मैं दिल्ली के करोल बाग इलाके में रहता हूं। उम्र 32 साल है और शादी को पांच साल हो चुके हैं। मेरी बीवी का नाम अनन्या है। वो 28 साल की है, गोरी, मोटी-तगड़ी गांड और भारी-भारी स्तन वाली औरत। रोज सुबह वो साड़ी पहनकर घर का काम करती है और मुझे पागल कर देती है।
एक शाम की बात है। बारिश हो रही थी, बाहर ठंडी हवा चल रही थी। हम दोनों थके हुए घर आए थे। अनन्या ने लाल रंग की रेशमी साड़ी पहनी हुई थी, ब्लाउज थोड़ा टाइट था जिससे उसके स्तन बाहर निकलने को बेताब लग रहे थे। पल्लू उसके कंधे से फिसलकर नीचे आ गया था और उसकी नाभि साफ दिख रही थी। मैं सोफे पर बैठा एक्सवीडियोज देख रहा था। स्क्रीन पर एक औरत साड़ी में ही चुद रही थी। अनन्या ने देखा तो मुस्कुराई।
"विक्रम, ये क्या देख रहे हो? साड़ी वाली औरतें?" वो बोली और पास आकर बैठ गई। उसकी साड़ी की खुशबू और उसके शरीर की गर्माहट मुझे छू गई।
"हां अनन्या, तुम्हारी साड़ी देखकर मन कर रहा है वैसी ही रोमांस करूं।" मैंने उसका हाथ पकड़ा और स्क्रीन की तरफ इशारा किया।
अनन्या हंस पड़ी। "तो फिर क्या देख रहे हो, खुद ही चालू करो।"
मैंने उसे खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया। उसकी साड़ी की पल्लू हटा दिया। उसके स्तन ब्लाउज से दबे हुए थे। मैंने ब्लाउज के हुक खोले और दोनों स्तन बाहर निकाल लिए। बड़े-बड़े, गोल, निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। अनन्या सिसकारियां लेने लगी। "आह विक्रम, जोर से चूसो… मेरी चूचियां चूसो।"
उसकी साड़ी का पल्लू पूरी तरह गिर चुका था। मैंने उसे सोफे पर लिटा दिया और साड़ी को ऊपर चढ़ाते हुए उसकी जांघों तक पहुंच गया। उसकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। पैंटी गीली थी। मैंने पैंटी हटाई और उसकी चूत को देखा। बालों वाली, मोटी-मोटी लेबिया, ऊपर से रस टपक रहा था। मैंने मुंह लगाया और उसकी चूत चाटने लगा। जीभ से क्लिटoris को रगड़ते हुए अंदर तक चाटा। अनन्या चीखने लगी। "ओह विक्रम, तेरी जीभ से मेरी चूत पिघल रही है… और जोर से चाटो, मेरी चूत खा लो!"
मैंने उसकी चूत में दो उंगलियां डाल दीं और अंदर-बाहर करने लगा। रस निकल रहा था, मेरी उंगलियां गीली हो गईं। अनन्या की सांसें तेज हो गईं। "विक्रम, अब लंड दो… मुझे चोदो।"
मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड खड़ा हो चुका था, सात इंच लंबा, मोटा, नसें उभरी हुई। अनन्या ने उसे हाथ में लिया और मसलने लगी। "कितना गर्म है तेरा लंड… मेरी चूत में डाल दे।"
मैंने उसकी साड़ी पूरी तरह खोल दी, सिर्फ पेटीकोट रह गया। पेटीकोट ऊपर चढ़ाया और उसकी टांगें फैलाईं। लंड की नोक उसकी चूत पर रखी और धीरे से दबाया। लंड आधा अंदर घुस गया। अनन्या चीख पड़ी। "आह… पूरा डाल दे विक्रम, मेरी चूत फाड़ दे!"
मैंने जोर लगाया। पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया। चूत गर्म और तंग थी। मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। हर धक्के पर उसकी गांड हिल रही थी। साड़ी का कपड़ा उसके शरीर से चिपक रहा था। पसीना निकल रहा था। अनन्या बोल रही थी। "हां विक्रम, जोर-जोर से चोदो… मेरी चूत का रस निकाल दो।"
हमने पोजीशन बदली। अनन्या ने साड़ी समेटकर कुत्ते वाली पोजीशन ली। मैं पीछे से उसके पास आया। गांड को थपथपाते हुए लंड चूत में डाला। अब जोर-जोर से धक्के मार रहा था। थप-थप की आवाजें आ रही थीं। उसकी गांड के दोनों गाल लाल हो रहे थे। मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारे। "ले ले अनन्या, मेरी रंडी…

साड़ी पहनकर भी कितनी चुदासी है तू।"
वो और उत्तेजित हो गई। "हां, मैं तेरी रंडी हूं… मेरी चूत और गांड दोनों मार।"
मैंने लंड निकाला और उसकी गांड पर लगाया। थोड़ा सा दबाया तो सिर घुस गया। अनन्या दर्द से चीखी लेकिन फिर बोली। "धीरे से… लेकिन डाल दे।"
मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड उसकी गांड में डाला। गांड बहुत तंग थी। मैं चोदने लगा। अनन्या की चूत से रस टपक रहा था। हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे।
करीब आधा घंटा चोदने के बाद मैंने कहा। "अनन्या, मैं झड़ने वाला हूं।"
"मेरे मुंह में डाल… मैं पी लूंगी।"
मैंने लंड निकाला और उसके मुंह में ठूंस दिया। वो चूसने लगी। मैं झड़ गया। गरम-गरम वीर्य उसके मुंह में भर गया। वो सब निगल गई और लंड साफ किया।
फिर हमने दोबारा शुरू किया। इस बार अनन्या ऊपर चढ़ी। साड़ी का पल्लू फिर से पहनकर वो मेरे लंड पर बैठ गई। लंड चूत में घुसा और वो ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे। मैं उन्हें दबा रहा था। रात भर चुदाई चली। सुबह तक हम थक चुके थे।
अनन्या ने कहा। "विक्रम, अगली बार फिर एक्सवीडियोज देखकर साड़ी में ही चुदवाऊंगी।"
मैंने उसे चूम लिया। हमारी साड़ी वाली रोमांस यहीं खत्म नहीं हुई, बल्कि और भी गंदी कहानियां आगे बढ़ीं।