नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम रोहन है। मैं दिल्ली में एक छोटी सी जॉब करता हूँ, लेकिन हर साल गर्मियों में अपने गांव जाता हूँ। गांव का नाम है बड़ौदा, उत्तर प्रदेश में। पिछले साल जब मैं गया तो मेरी जिंदगी बदल गई। गांव में मेरी बचपन की दोस्त प्रिया रहती है। अब वो बीस साल की हो चुकी है, गोरी चमड़ी, मोटी-मोटी जांघें, भारी-भारी स्तन और गोल-गोल गांड। उसकी मम्मियां इतनी बड़ी थीं कि चोली में समा ही नहीं पाती थीं।
मैं गांव पहुंचा तो बारिश शुरू हो गई थी। प्रिया मेरे घर आई पानी लेने। वो अकेली थी, उसके माता-पिता खेत में गए थे। हम दोनों पुराने दोस्त थे लेकिन अब कुछ और ही महसूस हो रहा था। उसने कहा, "रोहन, कितने साल बाद आया है।" मैंने उसकी तरफ देखा, उसकी साड़ी भीग गई थी, चोली से उसके स्तन साफ दिख रहे थे। निप्पल्स खड़े हो गए थे। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया।
मैंने कहा, "प्रिया, तू तो और भी खूबसूरत हो गई है।" वो शरमा गई लेकिन मुस्कुरा दी। मैंने उसे अंदर बुलाया। बारिश जोरों से पड़ रही थी। हम दोनों अकेले थे। मैंने उसका हाथ पकड़ा और कहा, "प्रिया, मुझे तू बहुत पसंद है।" वो चुप रही। मैंने आगे बढ़कर उसके होंठों पर किस किया। वो भी गर्म हो गई।
हमने जोर से किस करना शुरू किया। मेरी जीभ उसकी जीभ से लड़ रही थी। मैंने उसकी साड़ी खींची और चोली के बटन खोले। उसके स्तन बाहर आ गए, बड़े-बड़े, गोल, निप्पल्स गुलाबी। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। प्रिया चीखी, "आह्ह्ह रोहन… चूस ले मेरे स्तन… मेरा दूध पी ले…" मैं जोर-जोर से चूस रहा था, दांतों से काट रहा था। वो मेरा सिर दबा रही थी।
फिर मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट उतारा। वो सिर्फ चड्डी में थी। चड्डी गीली हो चुकी थी। मैंने चड्डी खींची तो उसकी गुलाबी चूत सामने आ गई, बालों से भरी, रस टपक रहा था। मैंने उंगली डाली तो वो चीख पड़ी, "उफ्फ्फ… रोहन…

मेरी चूत में उंगली मत डाल… जल्दी अपना लंड डाल…" मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड सात इंच का खड़ा हो गया था, मोटा और नसों से भरा। प्रिया ने उसे हाथ में लिया और बोली, "कितना बड़ा लंड है तेरा… आज मेरी चूत फाड़ दे…"
मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। पहले मैंने उसकी चूत चाटी। जीभ से उसके क्लिटोरिस को चाटा, रस पीया। प्रिया पागल हो रही थी, "आह्ह्ह… चाट ले मेरी चूत… तेरी जीभ से मेरी चूत जल रही है…" मैंने दो उंगलियां डालकर अंदर-बाहर किया। वो झड़ने लगी, "मैं झड़ रही हूं रोहन… आह्ह्ह…" उसका रस मेरे मुंह में आया।
फिर मैं ऊपर आया। मेरा लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा। धीरे से दबाया। लंड का सिरा अंदर घुसा। प्रिया चीखी, "आह्ह्ह… धीरे… तेरा लंड बहुत मोटा है…" मैंने जोर लगाया। आधा लंड अंदर चला गया। फिर पूरा। प्रिया की आंखें फट गईं, "मर गई… फट गई मेरी चूत…" मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। "थाप-थाप" की आवाज आ रही थी। प्रिया बोली, "जोर से चोद… मेरी चूत को फाड़ दे… गांड भी मार लेना…"
मैंने रफ्तार बढ़ाई। लंड पूरा बाहर निकालकर जोर से घुसा रहा था। प्रिया के स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें हाथों में लिया और निचोड़ रहा था। "तेरी चूत कितनी टाइट है प्रिया… मेरा लंड चूस रही है…" वो बोली, "तेरा लंड मेरी चूत का राजा है… और जोर से…" हम दोनों पसीने से तर हो गए थे।
मैंने उसे घुमाया, कुत्ते वाली स्टाइल में। गांड ऊपर करके। मैंने पीछे से लंड डाला। गांड के छेद को भी उंगली से दबाया। प्रिया बोली, "मेरी गांड मत मार अभी… पहले चूत ही फाड़…" लेकिन बाद में मैंने गांड में भी उंगली डाली। वो और जोर से चीख रही थी।
हमने घंटों चोदा। कई पोजीशन में – मिशनरी, डॉगी, राइडिंग। प्रिया मेरे ऊपर चढ़ी तो उसके स्तन मेरे मुंह में थे। वो ऊपर-नीचे हो रही थी, "लंड ले रही हूं… पूरा ले रही हूं…" आखिर में मैं झड़ने लगा। "प्रिया… मैं झड़ रहा हूं…" उसने कहा, "अंदर ही झड़… मेरी चूत में अपना माल भर दे…" मैंने जोर से झटके मारे और गरम-गरम माल उसकी चूत में भर दिया। वो भी झड़ गई।
हम दोनों थककर गिर पड़े। लेकिन रात भर चोदा। सुबह फिर शुरू किया। गांव की वो याद अब भी मुझे हिला देती है। प्रिया अब मेरी गांव वाली पत्नी जैसी है।
(शेष कहानी विस्तार से: अगले दिन हम खेत में गए। बारिश में नंगे होकर चोदा। प्रिया की चूत से रस बह रहा था। मैंने उसकी गांड भी मारी, पहले उंगली फिर लंड। वो चीखती रही, "गांड फाड़ दी… लेकिन मजा आ रहा है…" हमने कई बार सेक्स किया, हर बार नई पोजीशन, हर बार गंदी बातें। प्रिया बोली, "रोहन तू मेरा पति बन जा, रोज चोदना मुझे।" मैंने वादा किया। गांव की हवा, बारिश, और प्रिया की गर्म चूत ने मुझे पागल कर दिया। अब हर महीने गांव जाता हूं सिर्फ उसकी चूत चोदने। उसकी चूत का स्वाद अब भी जीभ पर है।)