
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विक्रम है। मैं दिल्ली के करोलबाग इलाके में रहता हूँ। उम्र मेरी 28 साल है और मैं एक छोटी सी ऑटो पार्ट्स की दुकान चलाता हूँ। जिंदगी में सब कुछ नॉर्मल चल रहा था जब तक मेरी पड़ोस में नई बिल्डिंग में प्रिया भाभी नहीं आईं। प्रिया भाभी की उम्र करीब 32 साल थी, शादी को पाँच साल हो चुके थे लेकिन उनके पति ज्यादातर बाहर रहते थे। वो बहुत गोरी, मोटी गोल मोटी गांड वाली और भारी भारी स्तन वाली औरत थी। उनके स्तन इतने बड़े थे कि ब्लाउज में समा ही नहीं पाते थे और गांड इतनी मोटी कि चलते वक्त हिलती हुई लगती थी।
पहली बार जब मैंने उन्हें देखा तो मेरे लंड में हलचल हो गई। धीरे धीरे हमारी दोस्ती बढ़ी। एक दिन बारिश में वो मेरे फ्लैट आ गईं और कहा कि बिजली नहीं है। हम दोनों अकेले थे। बातें करते करते बात सेक्स पर आ गई। प्रिया भाभी ने कहा, “विक्रम, मेरे पति मुझे ठीक से चोदते ही नहीं।” मैंने हिम्मत करके उनका हाथ पकड़ा और कहा, “भाभी, आज मैं आपको ऐसा चोदूंगा कि आप भूल जाएंगी।”
उन्होंने मुझे चूमा। हम दोनों के कपड़े उतर गए। प्रिया भाभी के नंगे स्तन मेरे सामने थे, बड़े बड़े काले निप्पल वाले। मैंने उनके एक स्तन को मुंह में लिया और चूसने लगा। दूसरे हाथ से उनकी चूत पर हाथ फेरा। चूत पहले से ही गीली थी। “आह विक्रम, मेरी चूत को छूओ, उंगलियां डालो,” वो चिल्लाई। मैंने दो उंगलियां उनकी चूत में डालीं। चूत बहुत टाइट थी। रस बह रहा था। मैंने उंगलियां अंदर बाहर कीं और भाभी की चूत से छप छप की आवाज आने लगी।
फिर भाभी ने मेरे लंड को हाथ में लिया। मेरा लंड सात इंच का मोटा लंड था। उन्होंने कहा, “वाह, ये तो असली देशी कट्टा है।” और मुंह में ले लिया। उन्होंने लंड को चूसा, जीभ से चाटा और अंडों को भी चूसा। मैंने उनके बालों में हाथ डाला और मुंह में चोदने लगा। “भाभी, और गहरा लो, हां ऐसे ही,” मैं बोलता रहा।
थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें बेड पर लिटाया। उनकी टांगें फैलाईं। चूत बालों वाली थी लेकिन गीली। मैंने अपना लंड उनकी चूत पर रखा और धीरे से दबाया। “आह विक्रम, धीरे, मेरा लंड डालो,” भाभी चीखी। लंड आधा अंदर गया। चूत बहुत टाइट थी। मैंने जोर लगाया और पूरा लंड अंदर घुसा दिया। भाभी चीख पड़ी, “मर गई रे, लंड फट गई मेरी चूत!”
मैंने तेजी से चोदना शुरू किया। लंड अंदर बाहर होता रहा। चूत का रस लंड पर चिपक रहा था। “चोदो मुझे विक्रम, मेरी चूत फाड़ दो,” भाभी बोल रही थीं। मैंने उनकी गांड के नीचे हाथ डाला और गांड दबाते हुए चोदता रहा। स्तन उछल रहे थे। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसते हुए चोदता रहा।
पोजीशन बदली। भाभी को कुत्ते वाली पोजीशन में किया। उनकी मोटी गांड मेरे सामने थी। मैंने लंड पीछे से डाला। गांड के छेद को देखकर मन हुआ लेकिन पहले चूत ही चोदी। लंड तेजी से अंदर बाहर हो रहा था। भाभी की गांड हिल रही थी। “आह हां, गांड दबाओ, चोदो मेरी चूत,” वो चिल्ला रही थीं। मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारे। थप थप की आवाजें आ रही थीं।
फिर मैंने लंड निकाला और भाभी की गांड में उंगली डाली। “नहीं विक्रम, गांड मत मारो,” भाभी बोलीं लेकिन उनकी आवाज में मस्ती थी। मैंने थूक लगाकर लंड गांड में डालने की कोशिश की। थोड़ा सा अंदर गया तो भाभी चीख उठीं। “आह दर्द हो रहा है, लेकिन और डालो।” लंड आधा अंदर घुसा। गांड टाइट थी। मैंने धीरे धीरे चोदना शुरू किया। भाभी का सिर बिस्तर में दबा हुआ था। “मेरी गांड फाड़ दो विक्रम, तुम्हारा देशी कट्टा मेरी गांड में घुसा दो,” वो गंदी गंदी बातें बोल रही थीं।
हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे। मैंने भाभी को पीठ के बल लिटाया और फिर चूत में लंड डाला। इस बार तेजी से चोदा। “मैं झड़ने वाली हूँ विक्रम,” भाभी बोलीं। उनकी चूत सिकुड़ गई और गरम गरम रस निकला। मैं भी झड़ने लगा। “भाभी, मैं झड़ रहा हूँ,” मैंने कहा। “मेरी चूत में ही झड़ो,” भाभी ने कहा। मैंने लंड अंदर ही छोड़ दिया। गरम गरम माल चूत में भर गया।
हम दोनों थककर लेट गए। लेकिन थोड़ी देर बाद फिर शुरू हो गया। इस बार भाभी ने मेरे ऊपर चढ़कर लंड अपनी चूत में लिया। वो ऊपर नीचे हो रही थीं। उनके स्तन उछल रहे थे। मैंने उनके स्तन दबाए। “चोदो मुझे विक्रम, तुम्हारा लंड बहुत मोटा है,” वो बोल रही थीं। हमने पूरी रात चोदाई की। कई बार पोजीशन बदली। सुबह तक भाभी की चूत और गांड दोनों लाल हो चुकी थीं।
ये थी मेरी प्रिया भाभी के साथ देशी कट्टा वाली चुदाई की कहानी। अब भी जब भी मौका मिलता है हम चोदते हैं।