नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं दिल्ली से आया था लेकिन गर्मियों की छुट्टियों में अपने नाना के गांव में रहने चला गया था। गांव का नाम था लालपुर, छोटा सा, चारों तरफ खेत, कच्ची सड़कें और दोपहर में चिलचिलाती धूप। उम्र मेरी 28 साल की थी और गांव में आते ही एक लड़की ने मेरा ध्यान खींच लिया। उसका नाम था मीरा, 24 साल की, गोरी चमड़ी, भरे हुए स्तन और चौड़ी कमर वाली। वो रोज सुबह कुएं के पास पानी भरने आती थी। पहले दिन ही उसकी नजर मुझ पर पड़ी और मुस्कुरा कर देखा।
मैंने भी हिम्मत करके बात की। “मीरा, पानी भरने में मदद करूं?” उसने शरमाते हुए कहा, “अर्जुन भाई, तुम शहर वाले हो, हाथ गंदे क्यों करोगे?” लेकिन उसकी आवाज में कुछ और ही इशारा था। दो-तीन दिन बातें बढ़ीं। वो बताती कि उसका पति शहर में काम करता है, महीने में एक बार आता है। मैं समझ गया कि उसकी चूत को लंबे समय से असली मर्द का लंड नहीं मिला है।
एक शाम बारिश शुरू हो गई। मैं उसके घर के पास खेत में घूम रहा था। मीरा ने मुझे अंदर बुलाया। “अर्जुन, भीग जाओगे, अंदर आ जाओ।” घर में कोई नहीं था। उसने दरवाजा बंद किया। हम दोनों गीले थे। उसकी साड़ी शरीर से चिपक गई थी, स्तन साफ दिख रहे थे। मैंने कहा, “मीरा, तुम बहुत सेक्सी लग रही हो।” वो मुस्कुराई और बोली, “तुम भी तो देखो, लंड खड़ा हो गया है।”
मैंने उसे दीवार से लगाकर चूम लिया। उसकी जुबान मेरी जुबान से लिपट गई। हम दोनों सांस लेते हुए चूम रहे थे। मैंने उसकी साड़ी खींची, ब्लाउज खोला। उसके स्तन बाहर निकल आए, गुलाबी निप्पल्स खड़े हो चुके थे। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। “आह्ह्ह… अर्जुन, जोर से चूसो मेरे मम्मे!” वो चीखी। मैं दूसरा स्तन भी चूसता रहा, दांतों से निप्पल काटता। उसकी सांस तेज हो गई।
फिर मैंने उसकी पेटीकोट खोला। अंदर पैंटी गीली थी। मैंने उंगली डाली तो उसकी चूत से रस निकल रहा था। “मीरा, तेरी चूत कितनी गीली है!” मैंने कहा। उसने मेरा लंड पकड़ लिया, पैंट खोली और बोली, “अर्जुन, अपना मोटा लंड निकालो, मुझे चोदो।” उसका हाथ मेरे 7 इंच लंड पर घूम रहा था। वो घुटनों पर बैठ गई और लंड मुंह में ले लिया। “चलो, चूसो मेरे लंड को!” मैंने कहा। उसने जीभ से लंड चाटा, मुंह में पूरा लिया और चूसने लगी। “उम्म्म… कितना गरम है!” वो बोल रही थी।
मैंने उसे उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया। उसकी टांगें फैलाईं। चूत गुलाबी, बालों से भरी, रस बह रहा था। मैंने मुंह लगाया और चूत चाटने लगा। “आह्ह्ह… अर्जुन, चूत चाटो, जीभ डालो अंदर!” वो चीख रही थी। मैंने जीभ डाली, चूत के रस पीता रहा। उसका शरीर कांप रहा था। फिर मैंने अपना लंड चूत पर रखा और एक जोरदार झटका मारा। “आह्ह्ह…

माँ… लंड घुस गया!” मीरा चीखी। लंड उसकी चूत में पूरा घुस गया। मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। “तेरी चूत कितनी टाइट है, मीरा!” मैं बोलता रहा।
हम दोनों पसीने से तर हो गए। मैंने उसकी टांगें कंधों पर रखीं और जोर-जोर से चोदता रहा। “चोदो मुझे, गांव वाली चूत फाड़ दो!” वो गंदी बातें कर रही थी। लंड अंदर-बाहर हो रहा था, चूत का रस लंड पर चिपक रहा था। 10 मिनट बाद वो झड़ गई। “आह्ह्ह… आ गया!” उसका शरीर कांप उठा। लेकिन मैंने रुकना नहीं, उल्टा और तेज चोदा।
फिर मैंने उसे कुत्ते वाली पोजीशन में कर दिया। पीछे से लंड डाला। उसकी गोल गोल गांड थपथपाती रही। “गांड मारो, अर्जुन!” वो बोली। मैंने गांड पर थप्पड़ मारे और लंड चूत में घुसाया। “थप थप” की आवाजें आ रही थीं। पसीना टपक रहा था। मैंने उसके बाल पकड़े और जोर से चोदा। “ले, ले मेरा लंड!”
दूसरे राउंड में वो ऊपर चढ़ गई। मेरे लंड पर बैठकर ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें दबाया। “मीरा, तेरे मम्मे कितने नरम हैं!” वो बोली, “चूसो उन्हें!” हम घंटे भर चोदते रहे। अलग-अलग पोजीशन में। मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल। हर बार वो चीखती, “जोर से चोदो, लंड फाड़ दो चूत!”
आखिर में मैं भी झड़ने लगा। “मीरा, लंड से निकालूं?” वो बोली, “अंदर ही छोड़ दो, रस भर दो चूत में!” मैंने जोर से झटका मारा और गर्म रस उसकी चूत में भर दिया। वो भी एक बार फिर झड़ गई। हम दोनों थककर गिर गए।
रात भर हम चोदते रहे। सुबह तक तीन बार और चुदाई हुई। गांव की हवा में हमारी सांसें, चूत-लंड की आवाजें और गंदी बातें गूंजती रहीं। मीरा बोली, “अर्जुन, तुम शहर लौटोगे तो मुझे क्या करोगे?” मैंने कहा, “हर छुट्टी में आऊंगा, तेरी चूत चोदने।”
इस तरह हमारी गांव वाली चुदाई शुरू हुई। Village Love 5&6 का असली मजा यही था।