नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में रहता हूँ, एक साधारण फ्लैट में। उम्र मेरी पच्चीस साल है और जॉब एक छोटी सी कंपनी में करता हूँ। बात उस basic indian girl friend की है जिसका नाम प्रिया है। प्रिया मेरी कॉलेज की सहेली थी, लेकिन असली दोस्ती शुरू हुई जब हम दोनों एक ही ऑफिस वाले एरिया में जॉब करने लगे। प्रिया बिल्कुल बेसिक टाइप की लड़की है – सादी सलवार सूट या जींस टीशर्ट पहनती, मेकअप कम, बाल हमेशा खुला या चोटी में, लेकिन शरीर ऐसा कि देखते ही लंड खड़ा हो जाए। उसकी छाती मीडियम साइज की लेकिन गोल-गोल और भारी, कमर पतली, गांड थोड़ी चौड़ी और नरम, जांघें मोटी और मुलायम। चेहरा साधारण लेकिन आँखें बड़ी और चाल में एक अजीब सी मासूमियत।
एक शाम बारिश में हम दोनों स्कूटर पर लौट रहे थे। प्रिया पीछे बैठी थी और उसकी छाती मेरी पीठ से सटी हुई थी। बारिश तेज हो गई तो हम एक पेड़ के नीचे रुके। प्रिया ठंड से काँप रही थी, उसकी टीशर्ट भीग चुकी थी और ब्रा का निशान साफ दिख रहा था। मैंने कहा, “प्रिया, ठंड लग रही है ना?” उसने सिर हिलाया। अचानक उसकी नजर मेरे जांघ पर पड़ी जहां मेरा लंड आधा खड़ा हो चुका था। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “राहुल, तू क्या सोच रहा है?” मैंने हिम्मत करके कहा, “तेरी गांड और छाती देखकर लंड खड़ा हो गया है।” प्रिया शरमा गई लेकिन हँसी नहीं रोकी। उसने धीरे से कहा, “सच में? मुझे भी कुछ हो रहा है।”
हम दोनों उसके PG के पास वाले खाली फ्लैट में घुस गए जो उसके दोस्त का था। अंदर जाते ही मैंने उसे दीवार से लगाकर चूम लिया। उसके होंठ नरम थे, जीभ से जीभ लड़ाने लगे। मैंने उसकी टीशर्ट ऊपर उठाई और ब्रा के ऊपर से उसकी छाती दबाई। प्रिया साँस तेज करके बोली, “राहुल, धीरे से… अभी तक कभी किसी ने छुआ भी नहीं।” मैंने ब्रा का हुक खोला और उसकी नंगी छाती बाहर निकाल ली। दूधिया रंग की, निप्पल गुलाबी और खड़े। मैंने एक चूची मुंह में ली और चूसने लगा, दूसरी हाथ से मसलता रहा। प्रिया चीखने लगी, “आह्ह… राहुल, चूस ले, मेरा दूध निकाल दे!”
मैंने उसके पैंट का बटन खोला और हाथ अंदर डाल दिया। उसकी चूत पूरी गीली थी। उंगलियां फिसल गईं। प्रिया की चूत बिल्कुल बेसिक टाइप की थी – बाल हल्के, होठ मोटे, अंदर से गर्म और चिपचिपी। मैंने दो उंगलियां अंदर डालीं और घुमाने लगा। प्रिया की कमर हिलने लगी, “हाँ… उंगली डाल, मेरी चूत फाड़ दे!” मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया, उसके पैंट और पैंटी उतार दी। उसकी गांड नंगी और सफेद दिख रही थी। मैंने उसके पैर फैलाए और चूत को चाटने लगा। जीभ से क्लिटोरिस को चाटता, होठों को चूसता, अंदर जीभ घुसाता। प्रिया पागल हो रही थी, “राहुल, और जोर से चाट, मेरी चूत का रस पी ले!”
फिर मैंने अपना लंड निकाला। मेरा लंड सात इंच का, मोटा, नसें उभरी हुई। प्रिया ने पहली बार लंड देखा तो डर गई, “इतना बड़ा? मेरी चूत में कैसे जाएगा?” मैंने कहा, “धीरे-धीरे घुसाएंगे, तू चिंता मत कर।” प्रिया ने खुद मेरे लंड को हाथ में लिया और सहलाने लगी। उसने मुंह में लिया और चूसने लगी। उसकी जीभ लंड के नीचे घूम रही थी, लार टपक रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर मुंह में और गहराई तक ठेला। प्रिया गले तक ले रही थी, “ग्लुक… ग्लुक” की आवाज आ रही थी।
मैंने उसे उल्टा कर दिया, गांड ऊपर करके। उसकी चूत पीछे से और भी ज्यादा खुल गई। मैंने लंड की नोक चूत पर रखी और धीरे से दबाया। प्रिया चीख पड़ी, “आह्ह्ह… दर्द हो रहा है!” लेकिन मैं रुका नहीं। आधा लंड अंदर घुस गया। उसकी चूत बहुत टाइट थी, दीवारें लंड को कस रही थीं। मैंने धीरे-धीरे आगे बढ़ाया जब तक पूरा लंड अंदर न चला गया। प्रिया की आँखों से आंसू आ गए लेकिन वह बोली, “चोद मुझे, पूरा लंड अंदर डाल!”
अब मैं जोर-जोर से चोदने लगा। लंड अंदर-बाहर हो रहा था, चूत का रस लंड पर चिपक रहा था। हर धक्के पर प्रिया चीख रही थी, “हाँ…

और जोर से, मेरी चूत फाड़ डाल! लंड का मजा दे!” मैंने उसकी छाती पकड़ी और निप्पल मसलते हुए चोदता रहा। फिर पोजीशन बदली, प्रिया ऊपर बैठी। उसने खुद लंड चूत में डाला और ऊपर-नीचे होने लगी। उसकी गांड मेरे सामने लहरा रही थी। मैंने उसकी गांड थपथपाई, “तेरी गांड कितनी नरम है, बेसिक गर्लफ्रेंड की गांड भी इतनी मस्त!” प्रिया हँसते हुए बोली, “चोद ले मेरी गांड भी बाद में!”
हम घंटे भर चोदते रहे। मैंने उसे डॉगी स्टाइल में चोदा, फिर मिशनरी में। हर बार लंड निकालकर फिर घुसाता, चूत का रस निकलता। प्रिया का पहला ऑर्गेज्म आया तो वह काँपने लगी, “आह्ह्ह… मैं झड़ रही हूँ!” उसकी चूत ने लंड को और कस लिया। मैं भी झड़ने लगा, “प्रिया, लंड का माल तेरी चूत में डाल दूं?” उसने हाँ कहा। मैंने जोर से धक्का मारा और पूरा माल अंदर छोड़ दिया। गर्म-गर्म वीर्य उसकी चूत भर गया, बाहर निकलने लगा।
थोड़ी देर बाद फिर शुरू किया। इस बार मैंने उसकी गांड चोदी। पहले उंगली डाली, फिर लंड। प्रिया दर्द से चीखी लेकिन मजा भी ले रही थी। “राहुल, मेरी गांड फाड़, बेसिक गर्लफ्रेंड की गांड भी तेरे लंड की गुलाम!” लंड गांड में घुसता, बाहर निकलता, उसकी गांड लाल हो गई। हम दोनों थक गए लेकिन रात भर चोदते रहे। सुबह तक प्रिया की चूत और गांड दोनों लंड से फूल चुकी थीं।
प्रिया अब मेरी रेगुलर basic indian girl friend बन गई। ऑफिस के बाद, बारिश में, या जब भी मौका मिलता, हम चोदते। उसकी सादी पोशाक के अंदर छिपी हुई गंदी चूत और गांड अब मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी है। हर बार नई पोजीशन, नया मजा, नया रस। प्रिया कहती है, “राहुल, तू मुझे इतना गंदा बोलकर चोदता है कि मुझे और उत्तेजना होती है।” और मैं चोदता हूँ – जोर से, गंदे शब्दों से, पूरा लंड अंदर डालकर।
(कहानी यहीं खत्म नहीं होती, दोस्तों। प्रिया और मैं अभी भी दिल्ली के छोटे फ्लैट में, बारिश की रातों में, या ऑफिस के बाद पार्क में छुपकर, एक-दूसरे की चूत-लंड की भूख मिटाते रहते हैं। उसकी बेसिक लुक, सादी बातें, लेकिन बिस्तर पर पूरी रंडी बन जाती है। लंड चूसना, चूत चाटना, गांड मारना – सब कुछ हम रोज नया करते हैं। प्रिया की चूत अब मेरे लंड की आदत पड़ चुकी है, और मेरा लंड उसकी गर्म चूत के बिना अधूरा लगता है। यही है असली basic indian girl friend की चुदाई – कच्ची, गंदी, और कभी खत्म न होने वाली।)