नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली से हूँ लेकिन मेरे पापा का पुराना मकान हमारे गाँव में है, उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में। पिछले साल जब मैं वहाँ छुट्टियों में गया तो जिंदगी ही बदल गई। गाँव में हमारी फैमिली के पास काफी जमीन है, खेत और बाग-बगीचे। वहाँ नौकर-चाकर भी रखे हुए हैं। उनमें से एक थी राधा, बीस साल की गाँव की लड़की, काली-गोरी नहीं बल्कि साँवली, मोटी-तगड़ी, बड़ी-बड़ी छातियाँ और मोटी गांड वाली। वो हमारे घर में बरसों से नौकरानी का काम करती थी, झाड़ू-पोछा, खाना बनाना, कपड़े धोना सब करती।
मैं जब गाँव पहुँचा तो सबसे पहले उसकी शक्ल देखकर मन में कुछ गंदे ख्याल आने लगे। वो हमेशा साड़ी में रहती, पीछे से देखो तो गांड हिलती हुई लगती, आगे से छातियाँ उभरी हुई। पहले दो-तीन दिन तो बस बातें कीं, चाय पिलाई, लेकिन मन में फिक्र चल रही थी कि कैसे इसको हाथ लगाऊँ। एक शाम बारिश हो रही थी, तेज मॉनसून की बारिश। बिजली चली गई थी। घर में सिर्फ मैं और राधा थे, बाकी सब खेतों में गए हुए थे।
मैंने उसे बुलाया, “राधा, यहाँ आ, मोमबत्ती जला के ला।” वो आई, हाथ में मोमबत्ती लिए। अंधेरे में उसकी साँवली कमर और छातियाँ साफ दिख रही थीं। मैंने अचानक उसका हाथ पकड़ लिया। वो डर गई, “साहब जी, क्या कर रहे हो? छोड़ दो!” मैंने जोर से खींचा और उसे दीवार से लगा दिया। “चुप रह, आज तुझे मजा चखाऊँगा।” उसने विरोध किया, हाथ-पैर मारने लगी लेकिन मैं मर्द था, उसको पकड़ के रखा।
उसकी साड़ी का पल्लू खींचा, ब्लाउज के हुक खोले। उसकी बड़ी-बड़ी छातियाँ बाहर आ गईं, काले-काले निप्पल, पसीने से भीगी हुई। मैंने एक चूची मुंह में ले ली और चूसने लगा। राधा चीख रही थी, “नहीं साहब, ये गलत है, छोड़ दो मुझे!” लेकिन मैं नहीं रुका। दूसरी चूची को हाथ से दबाया, निप्पल को उंगलियों से मरोड़ा। उसका शरीर काँप रहा था।
फिर मैंने उसकी साड़ी ऊपर उठाई, पेटीकोट का नाड़ा खोला। उसकी मोटी जांघें और काली-घनी जांघों के बीच वाली चूत सामने आ गई। बालों वाली, गीली चूत, होंठ फूले हुए। मैंने उंगली डाली तो वो चीख पड़ी, “आह्ह्ह… मत करो!” लेकिन चूत में रस बह रहा था। मैंने दो उंगलियाँ अंदर डालकर तेजी से आंदोलन किया। राधा की साँसें तेज हो गईं, वो रो रही थी लेकिन शरीर का रिएक्शन कुछ और बता रहा था।
मैंने अपनी पैंट उतारी, लंड निकाला। मोटा, सात इंच का लंड, नसें फूली हुई, सिरे पर पानी की बूंद। मैंने उसको घुटनों के बल बैठाया और मुंह में लंड ठूंस दिया। “चूस, रंधी की तरह!” वो मना कर रही थी लेकिन मैंने बाल पकड़ के जबरदस्ती मुंह में डाला। गला दबा के चूसने लगा वो। थूक और लार से लंड चमक रहा था।
फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। टाँगें फैलाईं और लंड उसकी चूत पर रखा। “नहीं… साहब…

मुझे दर्द होगा!” वो चिल्ला रही थी। लेकिन मैंने जोर लगाया और आधा लंड अंदर घुसा दिया। चूत बहुत टाइट थी, जैसे कुंवारी हो। धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डाला। राधा चीख रही थी, “आह्ह्ह… फट गई… निकालो!” मैंने जोर-जोर से धक्के मारे। चूत से “प्लच-प्लच” की आवाजें आ रही थीं। उसकी छातियाँ उछल रही थीं, मैं उन्हें दबा रहा था।
मैंने पोजीशन बदली, उसे कुत्ते वाली स्टाइल में कर दिया। गांड ऊपर, चूत पीछे से। लंड फिर से अंदर मारा। इस बार और गहराई तक। राधा की गांड पर थप्पड़ मार रहा था, लाल निशान पड़ रहे थे। “ले, ले मेरी रंडी, तेरी चूत आज फाड़ दूंगा!” वो रो रही थी लेकिन चूत का रस मेरे लंड पर बह रहा था।
मैंने उसे पीठ के बल लिटाया, टाँगें कंधों पर रखीं और जोर-जोर से चोदने लगा। लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था। चूत फूल गई थी, होंठ बाहर निकल आए थे। राधा की आँखें बंद थीं, मुंह खुला, साँसें भारी। मैंने उसके मुंह में उंगलियाँ डालीं, “चूस!” वो चूसने लगी।
लगभग बीस मिनट तक चोदा। फिर मैंने लंड निकाला और गांड में डालने की कोशिश की। “नहीं, गांड मत मारो!” वो चीखी। लेकिन मैंने थूक लगाकर लंड गांड में घुसा दिया। गांड बहुत टाइट, दर्द से वो मर रही थी लेकिन मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे पूरा लंड गांड में डाला और चोदने लगा। गांड की चुदाई से उसकी चूत और ज्यादा गीली हो रही थी।
आखिर में मैंने लंड निकाला और उसकी छातियों पर झड़ गया। गरम-गरम माल छातियों पर फैल गया। राधा साँस ले रही थी, थकी हुई, आँखों में आँसू। लेकिन मैंने उसे फिर से चूमा, छातियाँ चूसी और कहा, “अब से तू मेरी है।”
इसके बाद कई दिन तक यही सिलसिला चला। बारिश के दिनों में, खेतों में, घर के पिछवाड़े में जबरदस्ती चोदता रहा। राधा पहले तो रोती, लेकिन बाद में खुद ही चूत फैलाने लगी। वो कहने लगी, “साहब, आज गांड मारो।”
एक दिन यूट्यूब पर वीडियो बनाते हुए भी चोदा। मोबाइल कैमरा ऑन करके, वो नंगी, मैं लंड घुसाते हुए। “देखो दोस्तों, गाँव की नौकरानी कैसे चूदती है।” वीडियो बनाया और बाद में देखा।
राधा अब मेरी गुलाम बन गई। जब भी मौका मिलता, चूत, गांड, मुंह सब चोदता। उसकी चूत का स्वाद, लंड पर चिपका रस, सब याद है। गाँव की वो रातें, जबरदस्ती का मजा, आज भी याद आता है।
(कहानी यहीं खत्म नहीं होती, आगे भी बहुत कुछ हुआ लेकिन इतना ही काफी है दोस्तों। राधा की मोटी गांड और चूत का मजा लेते हुए मैंने कई बार झड़ चुका हूँ।)