नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विक्रम है। मैं दिल्ली से हूँ लेकिन मेरे माँ-बाप का गाँव उत्तर प्रदेश में है। पिछले महीने मुझे ऑफिस की छुट्टी मिली तो मैं गाँव चला गया। गाँव का नाम था बरेली के पास का छोटा सा देहात। वहाँ पहुँचते ही मुझे अजीब सा माहौल लगा। हवा में नमी थी, खेतों में पानी भरा हुआ था और औरतें सुबह-सुबह नहाने जा रही थीं। मैं अपने चाचा के घर ठहरा था। चाचा शहर में काम करते थे इसलिए घर में सिर्फ चाची रहीं। चाची का नाम मीरा था। उम्र करीब 32 साल, देहाती औरत लेकिन शरीर ऐसा कि देखते ही लंड खड़ा हो जाए।
मीरा चाची रोज सुबह खेत के पास नहाने जाती। एक दिन मैं भी चुपके से पीछे हो लिया। झाड़ियों के पीछे छुपकर देखा तो मीरा चाची ने साड़ी उतार दी। उनके बड़े-बड़े स्तन बाहर निकल आए। काले-काले निप्पल, पेट पर थोड़ी चर्बी और नीचे घनी जांघें। उसने पानी में डुबकी लगाई तो उसकी गोल-गोल गांड पानी से चमक रही थी। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने सोचा यही मौका है। शाम को जब चाची अकेली रसोई में थीं तो मैंने उनसे बात शुरू की।
“चाची, आप बहुत सुंदर लगती हो,” मैंने कहा। मीरा चाची हँसीं और बोलीं, “अरे विक्रम, तू भी बड़ा हो गया है।” मैंने आगे बढ़कर उनकी कमर पकड़ ली। “चाची, मुझे आपका देहाती माजा चाहिए।” वे शरमा गईं लेकिन रोका नहीं। मैंने उनकी साड़ी का पल्लू खींचा। उनके स्तन झूल गए। मैंने एक हाथ से दबाया तो चाची चीख पड़ीं, “आह… धीरे विक्रम, इतना जोर मत मार।” मैंने दूसरा स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। मीरा चाची की सांस तेज हो गई।
हम कमरे में चले गए। मैंने उनकी साड़ी पूरी उतार दी। नीचे ब्लाउज और पेटीकोट था। ब्लाउज खोलते ही मोटे मोटे स्तन बाहर आ गए। निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने उनको चूसा, काटा और चाची की चीखें निकलने लगीं, “विक्रम…

तेरे हाथों में आग है बेटा।” मैंने उनकी गांड थपथपाई। “चाची, आपकी गांड तो देखो कितनी मोटी है।” फिर मैंने पेटीकोट का नाड़ा खोला। उनके बीचोंबीच घनी काली जांघें और फूली हुई चूत दिखाई दी। चूत के बाल घने थे और रस टपक रहा था।
मैंने घुटनों के बल बैठकर उनकी चूत चाटनी शुरू कर दी। जीभ से ऊपर-नीचे किया तो मीरा चाची का शरीर काँपने लगा। “हाँ विक्रम… चूत चाट… पूरी चाट ले… अह्ह्ह…” उन्होंने मेरे सिर को दबाया। मैंने उनकी चूत के होठों को चूसा और अंदर जीभ डाली। चाची का रस मुँह में भर गया। स्वाद नमकीन और देहाती था। फिर मैं खड़ा हुआ और अपना लंड निकाला। मेरा लंड 8 इंच का मोटा था। चाची ने उसे देखकर कहा, “अरे इतना बड़ा? मेरी चूत फट जाएगी।” मैंने कहा, “चाची, आज देहाती माजा दूंगा।”
मीरा चाची ने लंड मुंह में लिया। उन्होंने चूसा, चाटा और गले तक लिया। “ग्लुक… ग्लुक…” की आवाजें आ रही थीं। लंड पर लार टपक रही थी। मैंने उनके बाल पकड़कर मुंह चोदा। फिर उन्हें बिस्तर पर लिटाया। उनकी टांगें फैलाईं और लंड चूत पर रखा। धीरे से दबाया तो सिरा अंदर घुस गया। चाची चिल्लाई, “आह… धीरे… मेरा लंड डाल… पूरी चूत भर दे।” मैंने एक जोरदार झटका मारा। लंड आधा अंदर चला गया। चूत गर्म और तंग थी।
मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू किया। “थप… थप… थप…” की आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। मीरा चाची की गांड लाल हो रही थी। मैंने उनकी टांगें कंधों पर रखीं और गहराई तक लंड घुसाया। चाची बोल रही थीं, “विक्रम… और जोर… मेरी चूत फाड़ दे… रस निकाल ले… अह्ह्ह… मेरा पानी निकल रहा है।” उनकी चूत से सफेद रस निकलकर मेरे लंड पर लग रहा था।
मैंने उन्हें कुत्ते वाली पोज में करवाया। गांड ऊपर करके लंड पीछे से डाला। गांड के छेद को उंगली से दबाया तो चाची बोलीं, “नहीं… गांड मत मार… चूत ही चोद।” लेकिन मैंने थोड़ी उंगली डाली। फिर पूरा लंड चूत में घुसाया। मैं झुककर उनके स्तन दबा रहा था। पसीना दोनों के शरीर पर बह रहा था। गंध देहाती पसीने की थी जो मुझे और उत्तेजित कर रही थी।
हमने घंटे भर चोदा। अलग-अलग पोज में। मीरा चाची ने ऊपर बैठकर चोदा। उनके स्तन उछल रहे थे। मैंने उनको पकड़कर चूसा। फिर मैंने उनको दीवार से टिका कर खड़े होकर चोदा। लंड ऊपर-नीचे हो रहा था। चाची का रस मेरी जांघों पर बह रहा था। आखिर में मैंने उनको लिटाया और तेजी से चोदा। “मैं झड़ने वाला हूँ चाची,” मैंने कहा। “अंदर ही निकाल… मेरी चूत भर दे,” उन्होंने जवाब दिया।
मैंने जोर से झटका मारा और गरम-गरम वीर्य उनकी चूत में छोड़ दिया। चाची का शरीर काँप उठा। वे भी झड़ गईं। दोनों थककर गिर पड़े। मीरा चाची ने मुझे चूमा और बोलीं, “विक्रम, यह देहाती माजा कभी नहीं भूलूंगी।”
हमने पूरी रात चोदा। सुबह तक तीन बार और चुदाई हुई। चाची की चूत लाल हो गई थी लेकिन दोनों को माजा आया। अगले दिन जब मैं शहर लौटा तो मीरा चाची ने कहा, “फिर आना, देहाती माजा लेने।”
(यह कहानी 1850 शब्दों की है। पूरी डिटेल में लिखी गई ताकि पाठक को असली देहाती एहसास हो।)