
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। दिल्ली के एक छोटे से फ्लैट में रहता हूँ। उम्र 28 साल है। ऑफिस की नौकरी करता हूँ। आज मैं आपको अपनी एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो मेरे जीवन की सबसे गंदी और मस्त चुदाई की है। सब कुछ असली है, कोई झूठ नहीं। बात शुरू हुई जब मेरे दोस्त नक्ष की पत्नी अक्षरा मेरे घर आई। नक्ष का नाम नक्ष था और उसकी बीवी अक्षरा। दोनों का नाम मिलकर अक्षरा नक्ष बनता था लेकिन अक्षरा का पति नक्ष अक्सर बाहर रहता था। नक्ष मेरा कॉलेज फ्रेंड था। अक्षरा 26 साल की थी, गोरी, मोटी गांड और बड़े-बड़े स्तन वाली औरत।
उस दिन शाम को अक्षरा मेरे फ्लैट में आई क्योंकि उसका पति नक्ष तीन महीने के लिए विदेश गया था। वह अकेली बोर हो रही थी। मैंने उसे चाय दी। बातें शुरू हुईं। अक्षरा ने बताया कि नक्ष उसे संतुष्ट नहीं कर पाता। उसकी बातें सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया। अक्षरा ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराई। उसने कहा, “अर्जुन, तुम तो सिंगल हो, कभी किसी को चोदा है?” मैंने सीधा जवाब दिया, “बहुत बार, पर तुम जैसी चूत कभी नहीं मिली।”
अक्षरा ने अपना दुपट्टा हटाया। उसके बड़े स्तन टीशर्ट में फिट नहीं हो रहे थे। निप्पल साफ दिख रहे थे। मैंने उसे खींच लिया और उसके होंठों पर अपना मुंह लगा दिया। हम दोनों गहरा किस करने लगे। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई। मैंने उसके स्तनों को हाथों से दबाया। अक्षरा चीखी, “अर्जुन, जोर से दबा, मेरी चूचियां फट रही हैं।” मैंने टीशर्ट उतार दी। उसके स्तन ब्रा से बाहर निकल आए। मैंने ब्रा का हुक खोला और एक स्तन मुंह में ले लिया। चूसने लगा। अक्षरा का सांस तेज हो गया। वह बोली, “चूस ले, मेरा दूध निकाल ले।”
मैंने उसके दूसरे स्तन को भी चूसा। फिर नीचे उतरा। उसकी साड़ी खोल दी। पेटीकोट उतारा। अंदर पैंटी गीली थी। मैंने पैंटी को साइड में किया और उसकी चूत चाटने लगा। अक्षरा की चूत बालों से भरी थी, गुलाबी और रस से तर। मैंने जीभ घुसाई। अक्षरा चीखी, “हां, चाट मेरी चूत, लंड डालने से पहले चाट ले।” मैंने उसकी चूत चाटी, क्लिट को चूसा। अक्षरा झड़ गई। उसका रस मेरे मुंह में आ गया। स्वाद खारा और मीठा था।
फिर अक्षरा ने मेरा लंड पकड़ा। मेरा लंड 7 इंच का मोटा था। उसने उसे मुंह में लिया। चूसने लगी। “चूस अक्षरा, मेरा लंड चूस,” मैंने कहा। वह बोली, “तुम्हारा लंड तो नक्ष से बड़ा है, पूरा मुंह में नहीं जा रहा।” मैंने उसके सिर को पकड़कर गहरा धक्का दिया। अक्षरा गले तक ले गई। लार टपक रही थी।
मैंने उसे बेड पर लिटाया। उसके पैर फैलाए। लंड उसकी चूत पर रखा। अक्षरा बोली, “धीरे से डाल, मेरी चूत तंग है।” मैंने एक झटका मारा। लंड आधा अंदर गया। अक्षरा चीखी, “आह्ह्ह, मर गई, पूरा डाल।” मैंने जोर लगाया। पूरा लंड अंदर घुस गया। अक्षरा की चूत गर्म और गीली थी। मैं चोदने लगा। थाप-थाप की आवाज आ रही थी। अक्षरा बोली, “चोद मुझे, नक्ष कभी ऐसे नहीं चोदता। मेरी चूत फाड़ डाल।”
मैंने जोर-जोर से चोदा। उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें हाथों से दबाया। अक्षरा का शरीर कांप रहा था। वह बोली, “मैं झड़ रही हूं, अर्जुन, अंदर ही झड़ जा।” मैंने रफ्तार बढ़ाई। लंड की चोटें तेज हो गईं। अक्षरा चीख-च<|eos|>