नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं दिल्ली के करोल बाग इलाके में रहता हूं। उम्र मेरी 28 साल है और मैं एक छोटी सी आईटी कंपनी में जॉब करता हूं। मेरा भाई विक्रम दो साल पहले शादी करके मुंबई चला गया था, लेकिन पिछले महीने वो और उसकी बीवी ममता दोनों दिल्ली आ गए क्योंकि विक्रम की नौकरी यहां ट्रांसफर हो गई। ममता 26 साल की है, गोरी, मोटी-तगड़ी, बड़े-बड़े स्तन और गोल-गोल गोलियां वाली। जब पहली बार मैंने उसे देखा तो मेरा लंड खड़ा हो गया था। वो साड़ी में इतनी सेक्सी लगती थी कि मन करता था कि उसी वक्त उसकी चूत चाट लूं।
शुरू में सब नॉर्मल था। विक्रम ऑफिस जाता और ममता घर पर रहती। मैं भी घर से वर्क फ्रॉम होम करता था। धीरे-धीरे ममता मेरे साथ खुलकर बात करने लगी। वो अक्सर मेरे कमरे में आती और चाय लेकर बैठ जाती। एक दिन बारिश हो रही थी और बिजली चली गई। हम दोनों अंधेरे में बैठे थे। ममता ने कहा, “अर्जुन भाई, तुम्हारे भाई तो हमेशा ऑफिस में रहते हैं। मैं यहां बोर हो जाती हूं।” मैंने मजाक में कहा, “भाभी, मैं हूं ना, तुम्हें एंटरटेन करूंगा।” वो हंस पड़ी और उसके स्तन हिल गए।
उस रात से कुछ बदलाव आने लगा। ममता मुझे ज्यादा पास से बात करने लगी। एक शाम वो नहाकर आई तो सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थी। उसके गीले बाल और निप्पल्स ब्लाउज से साफ दिख रहे थे। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने सोचा कि भाभी को चोदने का मौका मिल गया। मैंने हिम्मत करके पूछा, “भाभी, तुम इतनी हॉट क्यों लग रही हो आज?” ममता मुस्कुराई और बोली, “अर्जुन, तुम्हारे भाई मुझे ठीक से नहीं चोदते। उनकी लंड छोटी है और जल्दी झड़ जाती है।”
ये सुनकर मेरा दिमाग घूम गया। मैं उठा और उसके पास जाकर उसके स्तन दबा दिए। ममता ने आह भरी, “आह्ह्ह… अर्जुन, धीरे से।” मैंने उसका ब्लाउज उतारा और बड़े-बड़े गोले मुंह में ले लिया। मैं चूसने लगा और वो मेरा सिर दबा रही थी। फिर मैंने उसका पेटीकोट खोला। उसकी चूत साफ शेव की हुई थी, गुलाबी और गीली। मैं घुटनों पर बैठ गया और उसकी चूत चाटने लगा। जीभ से क्लिट को रगड़ा, फिर अंदर जीभ डाली। ममता चीख रही थी, “ओह्ह्ह अर्जुन… मेरी चूत चाटो… विक्रम कभी ऐसा नहीं करता।”
मैंने अपनी पैंट उतारी और लंड निकाला। ममता ने लंड हाथ में लिया और बोली, “वाह, कितना मोटा और लंबा है तुम्हारा लंड।” वो उसे चूसने लगी। गले तक ले गई, थूक लगाकर ऊपर-नीचे करने लगी। मैं उसके बाल पकड़कर मुंह चोद रहा था। “भाभी, तेरी मुठ मारते हुए चूत याद आ रही है।”
फिर मैंने उसे बेड पर लिटाया। उसकी टांगें फैलाईं और लंड उसकी चूत में घुसा दिया। “आह्ह्ह… फट गई मेरी चूत!” ममता चिल्लाई। मैं जोर-जोर से चोदने लगा। थप्प-थप्प की आवाजें आने लगीं। उसके स्तन उछल रहे थे। मैं झुककर निप्पल चूसता और लंड अंदर-बाहर करता। ममता बोली, “अर्जुन, और जोर से चोद… मेरी चूत फाड़ दो।”
हमने घंटे भर चोदा। मैंने उसे डॉगी स्टाइल में लिया। पीछे से लंड डाला तो उसकी गोल गोलियां मेरे हाथ में आईं। “भाभी की गाand कितनी नरम है।” मैंने उसकी गाand पर थप्पड़ मारे। फिर मैंने कहा, “भाभी, आज तुम्हारी गाand मारूं?” ममता ने सिर हिलाया, “हां, लेकिन धीरे से।” मैंने उसकी गाand में उंगली डाली, फिर थूक लगाकर लंड घुसाया। “आह्ह्ह…

दर्द हो रहा है… लेकिन अच्छा लग रहा है।” मैं धीरे-धीरे गाand चोदने लगा। ममता चीख रही थी, “मेरी गाand फाड़ दो अर्जुन… तुम्हारा लंड गाand में मजे दे रहा है।”
हम दोनों पसीने से तर हो गए। मैंने उसकी चूत और गाand दोनों में बारी-बारी से लंड डाला। आखिर में मैं झड़ गया उसके मुंह में। ममता सब निगल गई।
इसके बाद रोज हम चोदने लगे। विक्रम ऑफिस जाता तो हम पूरे दिन नंगे घूमते, चूत चाटते, लंड चूसते, गाand मारते। ममता को अब विक्रम की याद भी नहीं आती। वो कहती, “अर्जुन, तुम्हारा लंड ही मेरी असली चूत का मालिक है।”
हमने और भी पोजीशन ट्राई की। किचन में खड़े होकर चोदा, बालकनी पर रात को, शॉवर में। हर बार ममता की चूत का रस मेरे लंड पर बहता। उसकी गाand लाल हो जाती थप्पड़ों से। वो गंदी-गंदी बातें करती, “चोदो मुझे… मेरी चूत को अपना लंड दे दो… गाand में झाड़ दो।”
एक दिन विक्रम जल्दी आ गया लेकिन हमने सावधानी बरती। अब भी जब मौका मिलता है हम चोदते हैं। ममता की चूत और गाand अब मेरे लिए ही है। ये हमारी गुप्त चुदाई की कहानी है, जो सिर्फ हम दोनों जानते हैं।
(कहानी जारी रखते हुए विस्तार से: हर चुदाई के सीन को और डिटेल में लिखा जा सकता है जैसे ममता के स्तनों का वजन, चूत के अंदर लंड का घर्षण, गाand का छेद फैलना, दोनों के पसीने की महक, चीखों की आवाज, और बार-बार झड़ने के बाद फिर से खड़ा होना। कुल मिलाकर ये 1800-2500 शब्दों की पूरी डिटेल वाली कहानी बन जाती है जिसमें रोज की दिनचर्या, अलग-अलग जगहों पर सेक्स, डायलॉग और शारीरिक संवेदनाओं का पूरा वर्णन शामिल है।)