नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विक्रम है। मैं दिल्ली के करोल बाग इलाके में रहता हूँ। उम्र मेरी पैंतीस साल है और मैं एक छोटी सी प्रिंटिंग शॉप चलाता हूँ। जिंदगी आम तौर पर बहुत बोरिंग चल रही थी जब तक कि वो एक फोटो मेरे हाथ नहीं लगी। वो फोटो थी देवासी समाज की।
एक दिन मेरी शॉप में एक आदमी आया जो देवासी समाज का था। उसने कुछ पुरानी फोटो प्रिंट करवानी थीं। मैंने उसकी फाइल खोली तो मेरी नजर एक फोटो पर पड़ी। उस फोटो में एक औरत थी, नाम था मीरा। उम्र शायद अठाईस-तीस के आसपास। गोरी चमड़ी, मोटे मोटे स्तन जो ब्लाउज से फटते लग रहे थे, कमर पर चर्बी की हल्की लेयर और नाभि के नीचे घनी जांघें। फोटो में वो सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थी, शायद कोई लोकल फंक्शन की। लेकिन उसकी आँखों में एक ऐसी भूख थी कि मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया।
मैंने फोटो कॉपी कर ली बिना बताए। रात को घर आकर मैंने उसे बार-बार देखा। मेरे मन में ख्याल आया कि अगर मैं इस फोटो को लेकर मीरा से मिल जाऊँ तो क्या होगा। देवासी समाज वाले लोग ज्यादातर पुरानी दिल्ली के इलाके में रहते हैं। मैंने थोड़ी तलाश की और पता चल गया कि मीरा एक छोटे से मकान में रहती है जहाँ उसका पति अक्सर बाहर रहता है।
दो दिन बाद मैं उसके घर के पास गया। हाथ में उसकी फोटो लेकर। मैंने दरवाजा खटखटाया। मीरा ने दरवाजा खोला। वो बिल्कुल फोटो जैसी ही थी। नीला साड़ी पहने हुए, बाल खुले, और ब्लाउज की चेन थोड़ी खुली। उसने पूछा, “कौन?”
मैंने कहा, “मैं विक्रम हूँ। आपकी फोटो मेरे पास है। प्रिंटिंग वाली बात।”
उसने फोटो देखी और शक से बोली, “ये तो मेरी है। आपने कैसे ली?”
मैंने सीधा जवाब दिया, “देख लिया। और अब मैं इसे हर किसी को दिखा सकता हूँ। लेकिन अगर आप कुछ करवाना चाहें तो…”
उसकी आँखें चमक गईं। वो समझ गई कि मामला क्या है। उसने मुझे अंदर बुला लिया। कमरा छोटा था, बिस्तर पर चादर बिछी हुई। उसने दरवाजा बंद किया और बोली, “क्या चाहते हो?”
मैंने कहा, “आपकी वो मोटी गांड और वो बड़े बड़े स्तन। फोटो में देखकर मेरा लंड अभी तक खड़ा है।”
मीरा हँसी और बोली, “देवासी समाज की औरतें ऐसी ही होती हैं। मोटी, रसीली और चोदने लायक।”
उसने साड़ी की पल्लू गिरा दी। ब्लाउज के नीचे से उसके स्तन साफ दिख रहे थे। मैंने तुरंत उसे खींचा और उसके होंठों पर अपना मुंह लगा दिया। हम दोनों जोर जोर से चूमने लगे। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस रही थी। मैंने उसके ब्लाउज के हुक खोले। दो मोटे गोरे स्तन बाहर निकल आए। निप्पल काले और खड़े। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और जोर जोर से चूसने लगा। मीरा चीख पड़ी, “आह्ह्ह विक्रम… चूसो और जोर से… मेरे स्तन चूस लो…”
मैंने दूसरे स्तन को हाथ से दबाया। दूध जैसा रस नहीं निकला लेकिन पसीना और उसकी गर्माहट ने मुझे और उत्तेजित कर दिया। फिर मैंने उसके पेटीकोट का नाड़ा खोला। अंदर से वो नंगी थी। उसकी चूत घनी काली जंगली झाड़ियों से भरी थी। मैंने उंगली डाली तो रस बह रहा था। “तेरी चूत तो पूरी गीली हो गई है रंडी,” मैंने कहा।
मीरा बोली, “हाँ विक्रम, फोटो देखकर ही मेरी चूत तर हो गई थी। अब चोदो मुझे।”
मैंने अपने कपड़े उतारे। मेरा लंड सात इंच का मोटा खड़ा था। उसने उसे हाथ में लिया और बोली, “कितना मोटा है साला।” फिर वो घुटनों के बल बैठ गई और मेरे लंड को मुंह में ले लिया। उसकी जीभ लंड के नीचे घूम रही थी। वो जोर जोर से चूस रही थी। “चूस रे और गहरा… मेरे लंड का रस पी ले,” मैंने कहा।
मीरा ने मेरा लंड गले तक लिया। उसका मुँह भर गया। लार टपक रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर उसके मुंह को आगे पीछे किया। “आह्ह्ह… तेरी मोटी जुबान अच्छी लग रही है मेरे लंड पर,” मैं बड़बड़ाया।
फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। उसकी टांगें फैलाईं। उसकी चूत फूल चुकी थी। मैंने अपना मुँह उसकी चूत पर लगा दिया। जीभ से चाटने लगा। मीरा चीखने लगी, “आह्ह्ह विक्रम… चाटो मेरी चूत… रस निकाल लो… देवासी समाज की चूत चाटो…”
मैंने उसकी चूत के होठों को चूसा और क्लिटोरिस को काटा। उसका रस मेरे मुंह में भर रहा था। फिर मैं ऊपर आया और अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया। एक ही झटके में आधा लंड अंदर चला गया। मीरा चीख पड़ी, “मादरचोद…

इतना मोटा… धीरे…”
लेकिन मैंने रुकना नहीं था। मैंने जोर जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। “ले ले मेरी रंडी… तेरी चूत फाड़ दूंगा…” हर धक्के के साथ उसकी मोटी गांड हिल रही थी। उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसते हुए चोद रहा था।
मीरा चिल्ला रही थी, “चोदो विक्रम… और जोर से… मेरी चूत को फाड़ दो… देवासी समाज की फोटो देखकर ही मैं गीली हो गई थी…”
हम पंद्रह मिनट तक इसी पोजीशन में चोदते रहे। फिर मैंने उसे कुत्ते वाली पोजीशन में कर दिया। उसकी गांड मेरे सामने थी। मैंने लंड उसकी चूत में डाला और गांड पर थप्पड़ मारने लगा। “थप थप” की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। मीरा का रस मेरे लंड पर बह रहा था।
“अब मेरी गांड मारो विक्रम,” उसने कहा।
मैंने लंड निकाला और थोड़ा सा रस लगाकर उसकी गांड में घुसा दिया। गांड बहुत तंग थी। मीरा चीख रही थी, “आह्ह्ह… दर्द हो रहा… लेकिन और गहरा…”
मैंने धीरे धीरे गांड मारना शुरू किया। थोड़ी देर में वो भी मजे लेने लगी। “हाँ… गांड चोद… मेरी गांड फाड़…”
हम घंटे भर तक चोदते रहे। अलग अलग पोजीशन में। कभी वो ऊपर चढ़कर मेरे लंड पर उछल रही थी, कभी मैं उसके ऊपर लेटकर जोर जोर से धक्के मार रहा था। आखिर में मैंने अपना रस उसकी चूत में छोड़ दिया। गरम गरम रस भर गया।
मीरा थककर गिर पड़ी। मैंने उसे चूमा और बोला, “अब ये फोटो सिर्फ मेरी है।”
उसने हँसकर कहा, “अब और फोटो खींचो। अगली बार और भी गंदी पोजीशन में।”
उस दिन के बाद से हमारी मुलाकातें जारी रहीं। हर बार नई नई गंदी बातें, नई पोजीशन और नया मजा। देवासी समाज की वो एक फोटो ने मेरी पूरी जिंदगी बदल दी। अब मीरा की मोटी चूत और गांड के बिना मेरा लंड शांत नहीं रहता।
(कहानी जारी… हमने कई बार और चोदा, कभी उसके घर में, कभी मेरी शॉप में, कभी रात को पार्क के पास स्कूटर पर भी। हर बार वो ज्यादा गंदी बातें करती, ज्यादा जोर से चीखती और मेरा लंड उसकी चूत गांड दोनों में घुसता। रस, पसीना, थप्पड़, चीखें… सब कुछ बहुत गंदा और मजेदार था।)