नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ, लेकिन पिछले साल गर्मियों में मुझे अपने नाना के गाँव जाना पड़ा। गाँव का नाम था बिजौरा, उत्तर प्रदेश के एक छोटे से इलाके में। वहाँ खेत, कच्चे रास्ते और घने पेड़ थे। मैं शहर का लड़का था, लेकिन वहाँ पहुँचकर कुछ अलग ही महसूस हुआ। खासकर जब मैंने पहली बार उस गाँव वाली लड़की को देखा। उसका नाम था मीरा। उम्र शायद उन्नीस-बीस के आसपास, गोरी-चिट्टी त्वचा, काले लंबे बाल, और शरीर ऐसा कि देखते ही लंड खड़ा हो जाए। वो रोज सुबह पानी भरने नदी किनारे आती थी।
पहली मुलाकात में ही उसकी आँखों में कुछ शरारत भरी नजर आई। मैं स्कूटर पर गाँव घूम रहा था जब उसने मुझे देखा और मुस्कुरा दी। “भैया, आप शहर से आए हो ना?” उसकी आवाज़ मीठी थी, लेकिन उसकी कमीज में से उभरी हुई उसकी मोटी-मोटी छातियाँ मेरी निगाहें खींच रही थीं। मैंने हाँ कहा और बात आगे बढ़ी। धीरे-धीरे हम दोस्त जैसे हो गए। वो मुझे अपने घर के पास के खेत में बुलाती, जहाँ कोई नहीं आता था।
एक शाम बारिश शुरू हो गई। हम दोनों एक पुराने खलिहान में छिप गए। बारिश की बूंदें छत पर टपक रही थीं। मीरा भीग गई थी, उसकी साड़ी उसके शरीर से चिपक गई थी। उसके स्तन साफ दिख रहे थे, निप्पल्स कड़े हो चुके थे। मैंने कहा, “मीरा, तू भीग गई है, कपड़े उतार ले।” वो शरमा गई लेकिन हँस पड़ी। “राहुल भैया, तुम भी तो भीगे हो।”
मैंने उसका हाथ पकड़ा और खींचा। “मीरा, तू बहुत सुंदर है। तेरा ये शरीर देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता है।” उसने मेरी तरफ देखा, उसकी साँस तेज हो गई। “सच में? दिखाओ ना अपना लंड।” मैंने तुरंत अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड खड़ा होकर फड़क रहा था, सात इंच लंबा, मोटा, और सिरे पर पानी की बूंद लगी हुई। मीरा की आँखें फटी की फटी रह गईं। “अरे वाह, इतना बड़ा! गाँव में तो किसी का ऐसा नहीं होता।”
उसने हाथ बढ़ाया और मेरे लंड को छुआ। उसकी नरम उँगलियाँ लंड के ऊपर फिरने लगीं। “इसे चूसूँ क्या?” मैंने सिर हिलाया। वो घुटनों के बल बैठ गई और मेरे लंड को मुँह में ले लिया। उसकी गर्म, गीली जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी। “आह्ह्ह, मीरा… तेरी जुबान बहुत मस्त है। चूस, पूरा चूस ले।” वो जोर-जोर से चूस रही थी, “चुप-चुप” की आवाजें खलिहान में गूँज रही थीं। लार उसके मुँह से निकलकर मेरे अंडों पर टपक रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर उसका मुँह आगे-पीछे किया। “हाँ, गला लगाकर चूस, तेरी ये गाँव वाली रंडी वाली चूसने की स्टाइल मस्त है।”
बारिश और तेज हो गई। मैंने उसे खड़ा किया और उसकी साड़ी उतार दी। उसके स्तन आजाद हो गए, बड़े-बड़े, गोल, निप्पल्स गुलाबी। मैंने एक स्तन मुँह में लिया और चूसने लगा। “राहुल…

आह्ह्ह, मेरी छातियाँ चूसो, काटो।” मैंने निप्पल को दाँतों से हल्का काटा, वो चीख पड़ी। “दर्द हो रहा है, लेकिन अच्छा लग रहा है।” मैंने दूसरा स्तन भी चूसा, फिर नीचे उतरा। उसकी साड़ी के नीचे से उसकी चूत की गंध आ रही थी, मीठी-सी, गीली।
मैंने उसकी पेटीकोट उतारा। उसकी चूत बिल्कुल साफ, बाल कटे हुए, और मोटी-मोटी लेबिया बाहर निकली हुई। चूत के होठ गीले थे, रस टपक रहा था। “मीरा, तेरी चूत कितनी सुंदर है।” मैंने उँगली डाली, वो गरम और तंग थी। “आह्ह्ह, उँगली मत डालो, लंड डालो।” मैंने उसकी टाँगें फैलाईं और अपना लंड उसके चूत के मुँह पर रखा। “बोल, चोदूँ तुझे?” “हाँ, चोदो मुझे, पूरा लंड अंदर डाल दो।”
मैंने एक जोर का झटका मारा। लंड आधा अंदर घुस गया। “आह्ह्ह्ह!” मीरा चीखी। “दर्द हो रहा है, लेकिन और जोर से।” मैंने और जोर लगाया, पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया। “तेरी चूत कितनी तंग है, जैसे कोई कुँवारी हो।” “मैं कुँवारी हूँ राहुल, पहली बार चुद रही हूँ।” ये सुनकर मेरा लंड और सख्त हो गया। मैं धीरे-धीरे चोदने लगा, “थप-थप” की आवाजें बारिश की आवाज में मिल रही थीं। उसकी चूत का रस मेरे लंड पर लग रहा था, सफेद-सा झाग बन रहा था।
मैंने उसको कुत्ते वाली स्टाइल में करवाया। उसकी गाँड ऊपर उठी हुई, मैं पीछे से लंड घुसा रहा था। “देख, तेरी गाँड कितनी मोटी है।” मैंने उसकी गाँड पर थप्पड़ मारा, “थप्प” की आवाज हुई। “आह्ह्ह, मारो और, चोदो मेरी चूत को फाड़ दो।” मैं जोर-जोर से चोद रहा था, उसके स्तन लटक रहे थे, मैं उन्हें पकड़कर निचोड़ रहा था। “तेरी चूत का रस निकाल दूँगा, पूरी रात चोदूँगा।”
हम घंटों चोदते रहे। एक बार मैंने उसको अपनी गोद में बैठाया, वो ऊपर-नीचे होने लगी। “राहुल, मेरा पानी निकल रहा है।” उसकी चूत सिकुड़ रही थी, गरम-गरम रस मेरे लंड पर छूटा। मैं भी झड़ने वाला था। “मीरा, मैं झड़ने वाला हूँ।” “अंदर ही झड़ जाओ, गर्भवती कर दो।” मैंने जोर से झटका मारा और अंदर ही झड़ गया। गरम-गरम वीर्य उसकी चूत में भर गया, बाहर निकलकर टपकने लगा।
बारिश रुकी तो हम कपड़े पहनकर निकले। लेकिन ये शुरूआत थी। अगले दिनों में हम खेतों में, नदी किनारे, और उसके घर की छत पर भी चोदते रहे। हर बार नई स्टाइल, नया मजा। मीरा की चूत अब मेरे लंड की आदी हो गई थी। वो कहती, “राहुल, तू शहर चला जाएगा तो क्या करूँगी? तेरा लंड रोज चाहिए।” मैंने वादा किया कि आता रहूँगा।
ये कहानी सच है दोस्तों। गाँव की वो लड़की अब भी याद आती है, उसकी चूत की गर्माहट, उसके स्तनों का स्वाद, और वो गंदी-गंदी बातें जो वो बोलती थी। अगर तुम्हें और डिटेल चाहिए तो बताना, अगली बार और लंबी कहानी सुनाऊँगा।