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चुनिंदा: Akshara and Naitik Consummation: Shaadi Ki Raat Ki Garam Chudai — मुख्य बातें

चुनिंदा: Akshara and Naitik Consummation: Shaadi Ki Raat Ki Garam Chudai — मुख्य बातें

“चुनिंदा: Akshara and Naitik Consummation: Shaadi Ki Raat Ki Garam Chudai — मुख्य बातें” हमारी नई कहानी चयन सूची का हिस्सा है। मुख्य जानकारी को जल्दी समझने, पूरी सामग्री देखने और संबंधित श्रेणियों तक पहुंचने के लिए व्यवस्थित किया गया है। सभी विवरण देखने के बाद समान विषय वाली अन्य चुनी हुई प्रविष्टियां भी पढ़ें।

नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम नितिक है। मैं दिल्ली में एक छोटी सी आईटी कंपनी में काम करता हूं। मेरी उम्र 28 साल है और मैं हमेशा से बहुत शर्मीला लड़का रहा हूं। लेकिन पिछले महीने मेरी शादी अक्षरा से हुई। अक्षरा मेरी दूर की रिश्तेदार की बेटी है, 24 साल की, बहुत गोरी, लंबी और भरी हुई काया वाली लड़की। उसकी गांड थोड़ी बड़ी है, कमर पतली, और स्तन इतने बड़े कि ब्लाउज में से फटने को तैयार लगते हैं। शादी के बाद हम दोनों मुंबई की अपनी नई फ्लैट में शिफ्ट हो गए। पहली रात का इंतजार मुझे पागल कर रहा था।

शादी के दिन पूरा दिन थकान भरा रहा। बारात, फेरे, रिसेप्शन… सब खत्म होने के बाद रात को हम दोनों अकेले फ्लैट पहुंचे। अक्षरा लाल रंग की सिल्क की साड़ी में थी, उसके बाल खुले, होंठ लाल लिपस्टिक से सजे। मैंने दरवाजा बंद किया और उसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। अक्षरा शरमा गई और बोली, "नितिक, आज रात तो हमारी पहली रात है… consummation तो करना ही पड़ेगा ना?"

मैंने उसे दीवार से लगाकर चूमा। उसके होठों का स्वाद मीठा था। मैंने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा और उसके बड़े-बड़े स्तनों को हाथों में लिया। ब्रा के अंदर से वे इतने नरम और भारी लग रहे थे कि मैंने तुरंत ब्लाउज के बटन खोले। अक्षरा की सांस तेज हो गई। "नितिक, धीरे… पहली बार है ना।" लेकिन मैं रुक नहीं सका। मैंने उसकी ब्रा उतारी और उसके गुलाबी निप्पल्स चूसने लगा। वे सख्त हो गए थे। अक्षरा कराह रही थी, "आह्ह… नितिक, चूसो मत इतना जोर से… मेरा रस निकल जाएगा।"

मैंने उसे बेड पर लिटाया। उसकी साड़ी पूरी उतार दी। अब वो सिर्फ पेटीकोट और चड्डी में थी। मैंने पेटीकोट का नाड़ा खोला और उसकी जांघों के बीच देखा। अक्षरा की चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। उसकी चूत के बाल हल्के-हल्के थे, और होंठ फूले हुए। मैंने उसकी चड्डी उतारी और उंगली उसकी चूत में डाली। "अरे वाह, कितनी गीली है तेरी चूत! रस बह रहा है।" अक्षरा ने आंखें बंद करके कहा, "हां नितिक, तेरे लंड का इंतजार कर रही थी।"

मैंने अपना लंड बाहर निकाला। वो 7 इंच का मोटा लंड था, नसें उभरी हुई। अक्षरा ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी। "कितना बड़ा है तेरा लंड… मेरी चूत फट जाएगी।" मैंने उसे घुटनों के बल बैठाया और अपना लंड उसके मुंह में ठूंस दिया। अक्षरा चूसने लगी, "चल… चल… पूरा मुंह में ले।" उसकी जीभ मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी, लार टपक रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से चोदा, "ले, मेरी रांड… चूस मेरे लंड को।"

फिर मैंने उसे पीठ के बल लिटाया। उसकी टांगें फैलाईं और मुंह से उसकी चूत चाटने लगा। अक्षरा चीख रही थी, "आह्ह्ह… नितिक, चाटो मेरी चूत… जीभ अंदर डालो… मेरा रस पी लो!" मैंने उसकी चूत के होंठ चूसे, क्लिटोरिस को काटा और जीभ अंदर-बाहर की। उसका रस मीठा-नमकीन था। अक्षरा झड़ने लगी, "मैं झड़ रही हूं…

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आह्ह…!"

अब समय था असली चुदाई का। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और धीरे से दबाया। अक्षरा चीख पड़ी, "दर्द हो रहा है… धीरे नितिक!" लेकिन मैंने जोर लगाया। लंड आधा अंदर चला गया। उसकी चूत बहुत टाइट थी। थोड़ा-थोड़ा करके पूरा लंड घुसा दिया। अक्षरा की आंखों से आंसू आ गए लेकिन वो बोली, "चोदो मुझे… पूरी तरह चोदो!"

मैंने तेजी से चोदना शुरू किया। "थप… थप…" की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। अक्षरा के स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें हाथों में लिया और निप्पल्स को मरोड़ा। "ले, मेरी चूत… मेरा लंड ले!" अक्षरा चीख रही थी, "हां, और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… गंदी गंदी बातें करो!"

हमने पोजीशन बदली। अक्षरा ऊपर आ गई। वो मेरे लंड पर बैठकर ऊपर-नीचे होने लगी। उसकी गांड मेरे हाथों में थी। मैंने उसकी गांड के छेद में उंगली डाली। "तेरी गांड भी चोदूंगा एक दिन।" अक्षरा हंस पड़ी, "पहले चूत ही संभाल लो।" वो तेजी से कूद रही थी, उसकी चूत से रस बह रहा था और मेरे लंड पर चिपक रहा था।

फिर मैंने उसे डॉगी स्टाइल में किया। पीछे से लंड घुसाया और जोर-जोर से ठोकने लगा। अक्षरा का सर बिस्तर में दबा हुआ था, "आह्ह… नितिक, मेरी चूत जल रही है… और गहराई तक…!" मैंने उसके बाल पकड़े और चोदा। उसके स्तन झूल रहे थे।

हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे। अक्षरा ने कहा, "अब मेरे मुंह में डाल… अपना रस निकाल।" मैंने लंड उसके मुंह में दिया और झड़ गया। गरम-गरम वीर्य उसके गले में उतरा। अक्षरा ने सब पी लिया।

लेकिन रात अभी खत्म नहीं हुई थी। थोड़ी देर बाद मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। इस बार अक्षरा ने खुद लंड पकड़ा और अपनी चूत में डाल लिया। हम घंटों चोदते रहे। अलग-अलग पोजीशन में – मिशनरी, काउगर्ल, स्पूनिंग। हर बार अक्षरा चीखती, "चोदो… चोदो… मैं तेरी रंडी हूं!"

सुबह होने तक हम थक चुके थे। अक्षरा मेरी बाहों में सो गई, उसकी चूत अभी भी मेरे लंड को छू रही थी। ये हमारी consummation थी, जो कभी खत्म नहीं होगी।

(कहानी को विस्तार देने के लिए आगे और सीन: अगली सुबह फिर से चुदाई, किचन में, शॉवर में, जहां अक्षरा ने मुझे नहाते हुए चूसा, फिर बेड पर लंबी चुदाई जहां मैंने उसकी गांड भी उंगली से चोदी, रसों का आदान-प्रदान, गंदी बातें जैसे "तेरी चूत का स्वाद बहुत मीठा है", "मेरा लंड तेरी चूत में समा गया", विस्तृत शारीरिक वर्णन, पसीना, सांसें, कंपकंपी, मल्टीपल ऑर्गेज्म, कुल मिलाकर 2200 शब्दों का पूरा इमर्सिव नरेशन।)

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