नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर हूं। उम्र 32 साल, शादीशुदा लेकिन बीवी अक्सर बाहर रहती है। ऑफिस में सब कुछ नॉर्मल चल रहा था जब तक एक नई बिजनेसवुमन ने एंट्री नहीं ली। उसका नाम था प्रिया मल्होत्रा। 38 साल की, divorced, लंबी कद, गोरी चमड़ी, भारी-भरी छाती और गोल-गोल गांड। वो हमारी कंपनी की नई पार्टनर बनी थी। पहली मीटिंग में ही उसकी आंखों में कुछ खास चमक थी। वो सिल्क की साड़ी पहनती, ब्लाउज टाइट, जिससे उसकी बड़ी-बड़ी मम्मियां साफ दिखतीं।
पहले हफ्ते में ही प्रिया ने मुझे अपने केबिन बुलाया। “राहुल, ये प्रोजेक्ट हैंडल करोगे?” उसकी आवाज़ में मिठास थी। मैंने हां कहा। धीरे-धीरे हम बातें करने लगे। वो बताती कि उसका पति छोड़कर चला गया, अब वो अकेली रहती है। एक दिन बारिश में ऑफिस लेट हो गया। सब चले गए थे। सिर्फ हम दोनों। प्रिया ने कहा, “राहुल, मुझे घर छोड़ दो।” मैंने अपनी कार में बैठाया। रास्ते में उसका हाथ मेरे जांघ पर पड़ गया। मैंने कुछ नहीं कहा।
घर पहुंचकर वो बोली, “अंदर आओ, चाय पी लो।” फ्लैट में घुसते ही उसने दरवाजा बंद किया और मुझे दीवार से लगा लिया। “राहुल, मुझे पता है तुम मुझे देखते हो। मेरी छाती, मेरी गांड। आज चोद दो मुझे।” मैं हैरान रह गया लेकिन लंड पहले से खड़ा हो चुका था। प्रिया ने अपनी साड़ी उतारी। नीचे ब्लैक ब्रा और पैंटी। उसकी मम्मियां इतनी बड़ी थीं कि ब्रा से बाहर निकलने को बेताब थीं। मैंने ब्रा का हुक खोला। दोनों मम्मियां झूल गईं, गुलाबी निप्पल्स खड़े। मैंने एक मम्मी मुंह में ली और चूसने लगा। प्रिया चीखी, “हां राहुल, जोर से चूस, मेरे रस पी ले।”
मैंने दूसरी मम्मी दबाई, उंगलियां उसके निप्पल पर घुमाई। प्रिया ने मेरी पैंट खोली। मेरा लंड फर्राटे से बाहर आया, 7 इंच का मोटा लंड। वो घुटनों पर बैठ गई और लंड मुंह में ले लिया। “उम्म्म… कितना गरम है तेरा लंड।” वो चूसने लगी, जीभ से लंड के नीचे वाला हिस्सा चाटती, अंडकोष चूसती। लार टपक रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर मुंह में जोर-जोर से ठोकना शुरू किया। “ले प्रिया, मेरा लंड चूस, तेरी चूत की प्यास बुझा दूंगा।”
उसके बाद मैंने उसे बेड पर लिटाया। साड़ी पूरी उतार दी। उसकी चूत साफ शेव की हुई थी, होंठ फूले हुए, रस बह रहा था। मैंने चूत चाटना शुरू किया। जीभ अंदर डाली, क्लिटोरिस चूसा। प्रिया चीख रही थी, “आह्ह…

राहुल, तेरी जीभ से मेरी चूत जल रही है। और जोर से चाट, मेरे रस निकाल ले।” उसका रस मीठा था, मैं पीता रहा। उंगलियां अंदर डाली, एक, दो, तीन उंगलियां। वो मचल रही थी।
फिर मैंने लंड उसकी चूत पर रखा। सिर घुमाया, धीरे से धक्का दिया। “आह्ह… धीरे राहुल, तेरा लंड मोटा है।” लेकिन वो और अंदर लेने लगी। पूरा लंड घुस गया। मैं जोर-जोर से चोदने लगा। “चोद रहा हूं तेरी चूत प्रिया, तेरी गंदी चूत को फाड़ दूंगा।” प्रिया चीख रही थी, “हां चोद, जोर से चोद, मेरी चूत फट रही है।” उसके मम्मियां उछल रहे थे। मैंने दोनों हाथों से दबाए, निप्पल्स खींचे।
पोजीशन बदली। वो ऊपर आई, मेरे लंड पर बैठ गई। वो कूद रही थी, “देख कैसे मेरी चूत तेरा लंड निगल रही है।” मैं नीचे से धक्के मार रहा था। उसकी गांड पर थप्पड़ मारता, “तेरी गांड भी मारूं क्या?” वो बोली, “हां, बाद में। पहले चूत भर दे मेरे रस से।”
हम घंटों चोदते रहे। एक बार वो झड़ गई, चूत से रस निकला, मेरे लंड पर बह रहा था। मैंने भी उसके अंदर झड़ दिया। गर्म-गर्म वीर्य भर दिया। लेकिन रुकने का नाम नहीं। प्रिया ने मुंह साफ किया और फिर लंड चूसा, दूसरा राउंड शुरू। इस बार पीछे से। गांड ऊपर करके। मैंने लंड गांड के छेद पर रखा। “नहीं राहुल, पहले चूत फिर गांड।” लेकिन थोड़ी देर बाद वो मानी। लंड अंदर घुसा, वो चीखी, “आह्ह… दर्द हो रहा, लेकिन अच्छा लग रहा। जोर से मार।”
हम पूरी रात चोदते रहे। सुबह ऑफिस गए लेकिन नजरें मिलते ही याद आता। अगले हफ्तों में ऑफिस में भी कभी-कभी केबिन में चुदाई। प्रिया की चूत हमेशा गीली रहती मेरे लिए। वो कहती, “राहुल तू मेरा बिजनेस पार्टनर नहीं, मेरा लंड पार्टनर है।”
हमारी ये romance चली, ऑफिस में प्रोफेशनल, बाहर पूरी गंदी चुदाई। प्रिया की मम्मियां, चूत, गांड सब मेरी हो गई। और मैं हर बार नया तरीका आजमाता, कभी टेबल पर, कभी कार में, कभी उसके फ्लैट की बालकनी में। हर बार वो चीखती, “चोद मुझे राहुल, तेरी Indian businesswoman को अपनी रंडी बना ले।”
ये कहानी जारी है, लेकिन आज के लिए इतना ही।