नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अनन्या है। मैं दिल्ली की एक २८ साल की लड़की हूं, जो जॉब के सिलसिले में अक्सर गांवों का चक्कर लगाती रहती हूं। पिछले साल की बात है जब मेरी कंपनी ने मुझे उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में सर्वे के लिए भेजा। वहां का नाम था बरुआ। मैं सोच रही थी कि दो-चार दिन रहकर काम निपटा लूंगी, लेकिन जो हुआ वो मेरी जिंदगी बदल गया। वहां मिला मुझे एक गांव का मर्द, विक्रम। वो ३५ साल का, तगड़ा, काले बालों वाला, मूंछों वाला किसान था। उसकी हाइट ६ फीट, चौड़ी छाती, मोटी बांहें और गांव की मेहनत से तनी हुई कमर। पहले दिन जब वो मुझे खेत दिखाने आया तो उसकी आंखों में कुछ ऐसा था कि मेरी चूत में हील लग गई।
विक्रम बहुत सीधा सादा आदमी था लेकिन उसकी बातों में एक कच्चा आकर्षण था। वो मुझे “मेमसाब” कहकर बुलाता लेकिन धीरे-धीरे हम बातें करने लगे। एक शाम बारिश में फंस गए। हम दोनों उसके छोटे से कच्चे मकान में शरण लिए। वो बारिश में भीगकर आया था, उसकी शर्ट चिपक गई थी शरीर से। मैं देख रही थी उसके सीने के बाल और नीचे की तरफ उभार। मेरी साड़ी भी भीग गई थी, मेरे स्तन साफ दिख रहे थे। विक्रम ने कहा, “अनन्या जी, आप ठंड लग जाएगी।” मैंने कहा, “तुम भी तो भीगे हो विक्रम, कपड़े बदल लो।”
उसने शर्ट उतारी तो मैं देखकर हैरान रह गई। उसकी छाती पर घने बाल, पेट पर मांसल मसल्स और नीचे पतलून में मोटा सा उभार। मैंने पूछा, “विक्रम, तुम शादीशुदा हो?” उसने कहा, “हां लेकिन बीवी शहर में है।” फिर उसकी आंखें मेरी तरफ घूम गईं। “तुम्हारा शरीर तो शहर जैसा नाजुक है लेकिन आंखों में गांव वाली आग है।” मैं शरमा गई लेकिन मेरी चूत गीली हो चुकी थी।
बारिश तेज हो गई। बिजली चमकी तो मैं उसके पास जा बैठी। विक्रम ने मेरी साड़ी का पल्लू संभाला और बोला, “अनन्या, तुम्हारे स्तन देखकर मन करता है चूस लूं।” मैंने कोई विरोध नहीं किया। उसने मेरी साड़ी खींची और मेरी ब्लाउज के बटन खोले। मेरे ३६ इंच के भारी स्तन बाहर आ गए, निप्पल्स खड़े हो चुके थे। विक्रम ने दोनों हाथों से दबाए और बोला, “कितने मुलायम और बड़े हैं तेरे मम्मे। गांव की औरतों जैसे नहीं, शहर वाली मलाई जैसी।” उसने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। मैं सिसकने लगी, “आह्ह विक्रम, धीरे… चूस ले मेरे स्तनों को।”
वो जोर से चूस रहा था, जीभ घुमाकर निप्पल को काट रहा था। मेरी चूत से रस बहने लगा। विक्रम ने मेरी पेटीकोट का नाड़ा खोला और हाथ अंदर डाला। उसकी मोटी उंगलियां मेरी चूत पर घूमने लगीं। “अरे वाह, कितनी गीली है तेरी चूत। शहर वाली लड़कियों की चूत भी गांव जैसी रसदार होती है क्या?” मैंने कहा, “चोदो मुझे विक्रम, तुम्हारा लंड चाहिए।”
उसने पतलून उतारी। उसका लंड निकला – काला, मोटा, ८ इंच लंबा, नसों से भरा और सिरा गोल। लंड की नोक से प्री-कम टपक रहा था। मैंने हाथ में लिया, “कितना गरम और मोटा है तेरा गांव वाला लंड।” मैंने मुंह में लिया और चूसने लगी। विक्रम का लंड मेरे गले तक जा रहा था। वो मेरे बाल पकड़कर धक्के मार रहा था, “ले ले मेरी रांड, चूस मेरे लंड को। तेरी शहर वाली जुबान पर मेरा लंड अच्छा लग रहा है।”
फिर विक्रम ने मुझे बिस्तर पर लिटाया। उसने मेरी टांगें फैलाईं और चूत चाटने लगा। उसकी जीभ मेरी चूत के अंदर घुस रही थी, क्लिट को चूस रहा था। मैं चीख रही थी, “आह्ह विक्रम… तेरी जीभ से मेरी चूत जल रही है। और जोर से चाट, मेरा रस पी ले।” वो मेरी चूत चूस रहा था जैसे आम चूस रहा हो। फिर उसने अपना लंड मेरी चूत पर रखा और एक झटके में अंदर घुसा दिया। “आह्हह…

विक्रम… मेरा फट जाएगा… तेरा मोटा लंड मेरी तंग चूत फाड़ रहा है।”
वो धीरे-धीरे चोदने लगा। हर धक्के पर उसका लंड पूरा अंदर जाता, मेरी चूत का रस निकल रहा था। विक्रम बोला, “देख ले अनन्या, गांव के लंड से शहर वाली चूत कैसे चुदती है। तेरी चूत मेरा लंड निगल रही है।” मैंने टांगें उसकी कमर में लपेट लीं और बोली, “चोदो मुझे जोर से… मेरी चूत तेरे लंड की गुलाम हो गई।”
हम घंटों चुदते रहे। विक्रम ने मुझे कुत्ते वाली स्टाइल में चोदा, मेरी गांद थपथपाते हुए। “तेरी गांद भी कितनी नरम है, कल मैं तेरी गांद भी मारूंगा।” मैं चीख रही थी, “हां विक्रम, मेरी गांद मारो, मुझे अपना बनाओ।” फिर वो सामने से चोदने लगा, मेरे स्तनों को दबाते हुए। उसका लंड मेरी चूत में घुस-घुसकर रस निकाल रहा था। आखिर में वो बोला, “अनन्या, मैं झड़ने वाला हूं।” मैंने कहा, “अंदर डाल दो, मेरी चूत भर दो अपने रस से।”
वो जोर से झड़ गया, गर्म-गर्म वीर्य मेरी चूत में भर दिया। मैं भी झड़ गई, पूरी तरह कांपते हुए। उसके बाद हम गले मिले। विक्रम ने कहा, “अनन्या, मैं तुमसे प्यार कर बैठा हूं।” मैंने भी कहा, “मैं भी, तुम्हारे गांव वाले लंड और प्यार दोनों से।”
हमने पूरी रात चोदा। सुबह तक मेरी चूत सूज गई थी लेकिन मुझे और चाहिए था। अगले दिन से मैं गांव में रुक गई। विक्रम के साथ रोज चुदाई, कभी खेत में, कभी नहर के किनारे, कभी उसके मकान में। वो मुझे “मेरी रांड” कहता और मैं उसे “मेरा देहाती लंड”। धीरे-धीरे प्यार हो गया। अब मैं शहर छोड़कर गांव में रहने लगी हूं। विक्रम का लंड मेरी चूत का मालिक बन चुका है और मैं उसकी।
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