नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विकास है। मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव का रहने वाला हूं। आज मैं आपको अपनी एक बेहद गंदी और रसीली कहानी सुनाने जा रहा हूं जो भर्तिया देहाती लोकगीत से शुरू हुई। वो लोकगीत सुनते-सुनते कैसे मेरी जिंदगी की सबसे हॉट चुदाई में बदल गई, ये सब विस्तार से बताता हूं।
गांव में होली का त्योहार था। हर तरफ रंग, गुलाल और ढोल की थाप। मैं अपने खेत के पास बैठा था जब पास के घर से एक तेज आवाज आई। “अरे विकास भाई, आओ ना, लोकगीत गा रहे हैं!” ये आवाज थी मेरी पड़ोसी राधा की। राधा उम्र में पच्चीस साल की, गांव की सबसे सुंदर औरत। उसकी छाती पर दो बड़े-बड़े स्तन लटकते थे जैसे पके आम। उसकी कमर पतली और गांड गोल-गोल, चूत की फांक जब वो चलती तो कपड़े में साफ दिखती।
मैं उसके घर गया। अंदर चार-पांच औरतें और मर्द लोकगीत गा रहे थे। राधा के पति शहर में मजदूरी करने गए थे, इसलिए वो अकेली रहती थी। लोकगीत शुरू हुआ – “मेरी चुनरी में लगे रंग, तू छेड़े मोहे संग…” राधा गा रही थी, उसकी आवाज में एक अजीब सी मस्ती थी। वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी।
लोकगीत के बोल धीरे-धीरे गंदे होने लगे। औरतें हंस-हंसकर गंदी-गंदी बातें करने लगीं। राधा ने मुझे पास बुलाया और कान में फुसफुसाई, “विकास, तू भी गा ना, तेरी आवाज सुनकर मेरा मन करता है कुछ और…” मैंने भी गाना शुरू किया। गाने के दौरान राधा ने अपनी जांघ मेरी जांघ से रगड़ दी। उसका शरीर गरम हो रहा था।
जब सब लोग चले गए तो राधा ने दरवाजा बंद किया। “विकास, आज रात तू मेरे साथ रह, लोकगीत का असली मजा लेते हैं।” मैंने पूछा, “कैसा मजा?” उसने सीधा जवाब दिया, “तेरा लंड मेरी चूत में डालकर लोकगीत गाते हुए चोदना।”
राधा ने अपना साड़ी का पल्लू गिरा दिया। उसके दो मोटे स्तन बाहर निकल आए, निप्पल सख्त और काले। मैंने तुरंत उनको हाथ में लिया और दबाने लगा। “अरे राधा, कितने बड़े-बड़े हैं तेरे बोब्बे, चूसू क्या?” “हां चूस ले, पूरा मूंह में भर ले।” मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा, दूसरा हाथ से मसल रहा था। राधा की सांस तेज हो गई, “आह्ह… विकास, और जोर से चूस, मेरा दूध निकाल दे।”
फिर उसने मेरी पैंट खोली। मेरा लंड पहले से ही खड़ा हो चुका था, सात इंच का मोटा लंड। राधा ने उसे हाथ में लिया, “वाah, कितना मोटा लंड है तेरा, आज मेरी चूत फाड़ देगा।” उसने घुटनों के बल बैठकर मेरा लंड मुंह में ले लिया। “चलो, लोकगीत गाते हुए चूसती हूं।” वो गाने लगी, “तेरा लंड मेरे मुंह में, रस चूसूं मैं…” उसके मुंह की गर्मी और जीभ का घुमाव मुझे पागल कर रहा था। वो लंड को पूरा निगल रही थी, गले तक ले जा रही थी, लार टपक रही थी।
मैंने भी उसकी साड़ी उठाई। उसकी चूत पूरी तरह गीली थी, बाल कटे हुए, फांकों से रस बह रहा था। मैंने उंगली डाली, “राधा, तेरी चूत कितनी गर्म और गीली है, लोकगीत सुनते हुए चोदूंगा तुझे।” “हां, उंगली और डाल, दो उंगली डाल।” मैंने दो उंगली डाली और अंदर-बाहर करने लगा। राधा चीखने लगी, “आह्ह…

उंगली से फाड़ दे, अब लंड डाल।”
मैंने उसे खाट पर लिटाया। लोकगीत का गाना अभी भी चल रहा था, राधा खुद गा रही थी, “चोद मुझे, तेरे लंड से चोद…” मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और धीरे से दबाया। सिरा अंदर घुसा, “आह्ह… कितनी टाइट चूत है तेरी!” राधा ने कमर उठाई, “पूरा डाल, गहरा घुसा दे!” मैंने जोर लगाया, पूरा लंड अंदर चला गया। चूत का रस निकल रहा था, मेरे लंड पर चिपक रहा था।
हम दोनों लोकगीत गाते हुए चोदने लगे। “मेरी चूत में लंड डाल, रस निकाल…” राधा चिल्ला रही थी। मैं तेज-तेज धक्के लगा रहा था, “थप-थप” की आवाज आ रही थी। उसके स्तन उछल रहे थे, मैं उनको हाथ से दबा रहा था। पसीना निकल रहा था दोनों के शरीर से। चूत का रस मेरे लंड पर और खाट पर फैल रहा था।
मैंने पोजीशन बदली। राधा को कुत्ते वाली स्टाइल में कर दिया। उसकी गांड ऊपर, चूत पीछे से साफ दिख रही थी। मैंने पीछे से लंड डाला, “अब गांड भी मारूंगा!” “हां, पहले चूत फाड़, फिर गांड में डाल।” मैंने गांड के छेद पर उंगली डाली, वो भी गीली थी। लोकगीत गाते हुए मैं चूत चोद रहा था और उंगली गांड में घुसा रहा था। राधा का शरीर कांप रहा था, “आह्ह… मेरा निकलने वाला है!”
उसका पहला झड़ना हुआ, चूत से गरम रस निकला और मेरे लंड पर बह गया। मैंने और तेज चोदा। “अब मेरी बारी, तेरी चूत में झड़ूंगा।” राधा बोली, “हां, पूरा रस अंदर डाल, लोकगीत के साथ गर्भवती कर दे।” मैंने आखिरी जोरदार धक्का मारा और पूरा वीर्य उसकी चूत में छोड़ दिया। वीर्य भर गया, बाहर निकल रहा था।
लेकिन राधा ने कहा, “अभी खत्म नहीं हुआ, अब गांड मार।” उसने खुद अपनी गांड फैलाई। मैंने लंड पर थूक लगाया और गांड के छेद में घुसाया। “आह्ह… दर्द हो रहा, लेकिन मजा आ रहा!” धीरे-धीरे पूरा लंड गांड में घुस गया। अब गांड चोदने लगा, “थप-थप” की आवाज। राधा फिर गाने लगी, “गांड में लंड, चोद मुझे…”
दूसरी बार झड़ने से पहले मैंने उसे सामने से चोदा, उसके पैर कंधों पर। चूत और गांड दोनों रस से तर। हम घंटों चोदते रहे, लोकगीत गाते रहे। आखिर में मैंने उसकी चूत में फिर झड़ दिया।
सुबह तक हम थक चुके थे। राधा बोली, “विकास, अब रोज लोकगीत गाएंगे और चोदेंगे।” ये थी मेरी भर्तिया देहाती लोकगीत वाली चुदाई की कहानी।
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