नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली में रहता हूँ, २३ साल का हूँ। कॉलेज खत्म करके जॉब कर रहा हूँ। मेरी गर्लफ्रेंड प्रिया भी २२ साल की है, बहुत ही सुंदर और सेक्सी। उसकी गोरापन, मोटी-मोटी जांघें, भारी स्तन और गोल-गोल गांड देखकर कोई भी लड़का पागल हो जाए। हम दोनों पिछले छह महीने से डेट कर रहे थे लेकिन आज तक सिर्फ किसिंग और थोड़ा सा टचिंग तक ही सीमित थे। प्रिया का परिवार काफी स्ट्रिक्ट है, इसलिए हम कभी अकेले नहीं मिल पाते थे। लेकिन कल रात का प्लान बन गया। उसके माता-पिता शादी में बाहर गए थे और वो अकेली फ्लैट में थी। मैंने उसे मैसेज किया और वो तैयार हो गई।
मैं शाम को उसके फ्लैट पहुंचा। दरवाजा खोला तो प्रिया ने लाल कलर की शॉर्ट ड्रेस पहनी हुई थी। उसकी छाती के ऊपर कपड़ा इतना टाइट था कि उसके निप्पल्स साफ दिख रहे थे। मैं अंदर आया और दरवाजा बंद करते ही उसने मुझे गले लगा लिया। हम दोनों का सांस तेज हो गया। मैंने उसके होंठों पर अपना मुंह रखा और जोर से किस करने लगा। उसकी जीभ मेरी जीभ से लड़ रही थी। मैंने उसके बालों में हाथ फेरा और उसे और पास खींच लिया। उसकी सांसों में हल्की खुशबू थी।
हम बेडरूम में चले गए। बेड पर लेटते ही प्रिया मेरे ऊपर चढ़ गई। उसने मेरी टी-शर्ट उतार दी और मेरी छाती पर किस करने लगी। मैंने उसकी ड्रेस के स्ट्रैप नीचे खींचे और उसके दोनों स्तन बाहर निकाल लिए। उसके स्तन बड़े और मुलायम थे, निप्पल्स गुलाबी रंग के और खड़े हो चुके थे। मैंने एक स्तन को मुंह में लिया और चूसने लगा जबकि हाथ से दूसरे को दबा रहा था। प्रिया चीखने लगी, “आह्ह राहुल… चूसो और जोर से… मेरे स्तन तुम्हारे हैं आज…” मैं और जोर से चूसता गया, कभी काटता, कभी चाटता। उसकी सांसें भारी हो गईं।
फिर मैंने उसकी ड्रेस पूरी उतार दी। वो सिर्फ पैंटी में थी। मैंने उसकी जांघों को अलग किया और पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को रगड़ने लगा। पैं्टी गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी उतारी और पहली बार उसकी नंगी चूत देखी। बाल कटे हुए थे, होंठ गुलाबी और अंदर से गुलाबी मांस चमक रहा था। मैंने उंगली डाली तो चिकना रस निकला। प्रिया कराह रही थी, “राहुल… मेरी चूत चाटो ना… बहुत दिनों से प्यासी है…” मैं उसके बीच में बैठ गया और जीभ से उसकी चूत चाटने लगा। ऊपर से नीचे तक, क्लिटोरिस को चूसता, अंदर जीभ डालता। उसका रस मीठा-नमकीन था। वो मेरे सिर को दबा रही थी, “हाँ… और अंदर… चोदो मेरी चूत जीभ से…” मैंने दो उंगलियां अंदर डाल दीं और तेजी से आंदोलन करने लगा। प्रिया चीख रही थी, “आह्ह्ह… मर गई… और जोर… लंड चाहिए अब…”
मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड खड़ा हो चुका था, ७ इंच का मोटा लंड, नसें उभरी हुई, सिरा लाल। प्रिया ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी। “कितना बड़ा है तेरा लंड… मेरी चूत फाड़ देगा…” उसने मुंह में लिया और चूसने लगी। उसकी जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी, अंडकोष चाट रही थी। मैं उसके बाल पकड़कर उसके मुंह में धक्के मारने लगा। “हाँ प्रिया… चूस मेरे लंड को… पूरा अंदर ले…” वो गला दबाकर ले रही थी, आंसू आ रहे थे लेकिन रुक नहीं रही थी।
फिर मैंने उसे बेड पर लिटाया। उसके दोनों पैर कंधों पर रखे और लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा। धीरे से दबाया। सिरा अंदर घुसा तो प्रिया चीख पड़ी, “आह्ह… धीरे… फट रही है चूत…” मैंने थोड़ा और दबाया। आधा लंड अंदर चला गया। उसकी चूत बहुत टाइट थी, गरम और गीली। मैंने जोर लगाया और पूरा लंड अंदर घुसा दिया। प्रिया की आंखें बंद हो गईं, “मर गई रे… पूरा भर गया अंदर…” मैं धीरे-धीरे आंदोलन करने लगा। “थप… थप…” की आवाज आ रही थी। उसकी चूत मेरा लंड निगल रही थी। मैं झुककर उसके स्तन चूसता, गर्दन काटता और जोर-जोर से चोदता। प्रिया बोल रही थी, “चोदो मुझे… मेरी चूत की प्यास बुझाओ… गांड भी मारना…”
मैंने उसे घुमाया, कुत्ते वाली स्टाइल में। उसकी गांड ऊपर उठी हुई, चूत पीछे से साफ दिख रही थी। मैंने लंड पीछे से डाला और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। उसकी गांड के दो टुकड़े लहरा रहे थे। मैंने हाथ मार दिया, “थप्पड़” की आवाज। प्रिया चीखी, “और मार… चोद मेरी गांड और चूत दोनों…” मैंने उंगली उसकी गांड में डाली और लंड चूत में चलाता रहा। रस निकल रहा था, मेरे लंड पर सफेद झाग बन गया था।
हमने कई पोजीशन लीं। वो मेरे ऊपर चढ़ी, लंड पर बैठकर ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे। मैं उन्हें पकड़कर दबाता। “राहुल… मैं झड़ने वाली हूँ…” वो जोर से कांप गई, उसकी चूत ने मेरे लंड को निचोड़ लिया। मैंने भी रस छोड़ा, उसकी चूत के अंदर गरम-गरम वीर्य भर दिया। वो लेट गई मेरे ऊपर, दोनों सांस ले रहे थे।
लेकिन रात अभी खत्म नहीं हुई। थोड़ी देर बाद फिर शुरू किया। इस बार मुंह से चूसकर लंड खड़ा किया और पीछे से गांड में डालने की कोशिश की। प्रिया ने मना किया पहले लेकिन फिर मानी। थोड़ा तेल लगाकर धीरे से अंदर डाला। गांड बहुत टाइट थी। वो चीख रही थी लेकिन मजे भी ले रही थी। “आह्ह… गांड फट रही… लेकिन अच्छा लग रहा…” मैं धीरे-धीरे चोदता रहा, फिर तेज।
पूरी रात हम चोदते रहे। सुबह तक चार बार चोदा। प्रिया की चूत, गांड, मुंह सब मेरे लंड से भर गए। रस, पसीना, चीखें, गंदी बातें…

सब कुछ हुआ। सुबह उठकर हमने नहाया साथ में, फिर से बाथरूम में चोदा।
दोस्तों, वो रात यादगार थी। प्रिया अब मेरी जान है। हम अक्सर मिलते हैं और वही मस्ती करते हैं। अगर आपको ये कहानी पसंद आई तो कमेंट करना। अगली कहानी में और भी गंदी बातें होंगी।