
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है और मैं दिल्ली में रहता हूं। मैं एक साधारण सी नौकरी करता हूं और ज्यादातर शाम को अकेला रहता हूं। मेरे पास एक छोटा सा फ्लैट है जहां मैं अक्सर यूट्यूब या डेलीमोशन पर पुरानी टीवी सीरियल्स देखता हूं। एक दिन मैंने डेलीमोशन पर अक्षरा ड्रामा सर्च किया। अक्षरा नाम की वो हीरोइन मुझे बहुत पसंद थी – उसकी गोरी त्वचा, बड़े-बड़े स्तन और वो पतली कमर वाली फिगर। ड्रामा में वो अक्सर साड़ी में दिखती थी और उसकी गांड की शेप देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता था। मैंने पूरी सीरीज डेलीमोशन पर डाउनलोड करके देखनी शुरू की। रात के दो बजे तक मैं अकेला फ्लैट में लेटा हुआ था, लंड हाथ में लेकर अक्षरा की सीन देख रहा था।
अचानक मेरे फोन पर एक मैसेज आया। वो मेरी पुरानी कॉलेज फ्रेंड थी – प्रिया। प्रिया भी दिल्ली में ही रहती थी और उसका फिगर अक्षरा जैसा ही था। उसने लिखा, “राहुल, क्या कर रहा है? अकेला है क्या?” मैंने जवाब दिया, “हां, डेलीमोशन पर अक्षरा ड्रामा देख रहा हूं।” प्रिया ने तुरंत रिप्लाई किया, “ओह, वो वाली? मुझे भी अच्छी लगती है। आ जा मेरे घर, साथ में देखते हैं।”
मैंने सोचा क्यों ना जाऊं। प्रिया का फ्लैट पास ही था। मैं स्कूटर लेकर उसके घर पहुंचा। प्रिया ने दरवाजा खोला। वो रात के कपड़ों में थी – एक पतली सी नाइट suit जिसमें उसकी बड़ी-बड़ी छातियां साफ दिख रही थीं। “आ जा अंदर,” उसने कहा और मुझे सोफे पर बैठाया। हम दोनों डेलीमोशन पर अक्षरा ड्रामा चला दिए। सीरीज में अक्षरा का वो सीन आया जहां वो नहा रही थी। प्रिया हंस पड़ी, “ये तो बहुत हॉट है ना?” मैंने कहा, “हां, अक्षरा की गांड देख के मेरा लंड खड़ा हो जाता है।” प्रिया ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराई, “सच में? दिखा अपना लंड?”
मैं हैरान हुआ लेकिन प्रिया ने खुद मेरी जिप खोल दी। मेरा लंड बाहर निकल आया – सात इंच का मोटा, नसों से भरा और ऊपर से चमक रहा था। प्रिया ने कहा, “वाह, इतना बड़ा? अक्षरा वाले ड्रामा से ज्यादा हॉट है।” उसने अपना हाथ मेरे लंड पर रखा और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी। “तेरा लंड देख के मेरी चूत गीली हो गई है,” उसने कहा। मैंने प्रिया की नाइट suit उतार दी। उसके स्तन बिल्कुल अक्षरा जैसे बड़े और गोरे थे, निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने एक स्तन मुंह में लिया और चूसने लगा। प्रिया चीख पड़ी, “आह्ह्ह, राहुल, चूस ले मेरे मम्मे, चूत में आग लग रही है।”
मैंने उसे सोफे पर लिटा दिया और उसकी जांघें खोल दीं। उसकी चूत पूरी तरह गंजी थी, होंठ फूल चुके थे और अंदर से रस टपक रहा था। मैंने उंगली डाली – “तेरी चूत कितनी गर्म है प्रिया!” प्रिया बोली, “चोद दे मुझे, अक्षरा ड्रामा की तरह हार्ड चोद।” मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा। लंड की नोक से उसकी चूत के होंठ अलग किए और एक जोरदार झटके में पूरा लंड अंदर घुसा दिया। प्रिया चीखी, “आह्ह्ह्ह फट गई मेरी चूत! लंड इतना मोटा है!” मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू किया। थप्प-थप्प की आवाजें पूरे फ्लैट में गूंज रही थीं। प्रिया की गांड हिल रही थी, उसके स्तन उछल रहे थे। “और जोर से चोद, मेरी चूत का रस निकाल दे!”
हमने पोजीशन बदली। प्रिया ने घुटनों के बल बैठकर गांड ऊपर उठा दी। मैंने पीछे से लंड घुसाया। अब गांड की चुदाई शुरू हुई। लंड का पूरा हिस्सा अंदर-बाहर हो रहा था, प्रिया का चूत का रस मेरे लंड पर चिपक रहा था। “गांड मार, राहुल, अक्षरा की तरह मेरी गांड चोद!” मैंने उसकी गांड के दोनों हिस्से फैलाए और लंड और गहराई तक मारा। प्रिया का शरीर कांप रहा था। हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे।
मैंने उसे उठाया और दीवार से टिका कर चोदा। प्रिया की टांगें मेरी कमर में लिपटी थीं। लंड ऊपर-नीचे हो रहा था, उसकी चूत से “चपक-चपक” की आवाजें आ रही थीं। “मेरा रस निकाल, प्रिया, तेरी चूत में झाड़ दूंगा!” प्रिया बोली, “हां, अंदर ही निकाल, मेरी चूत भर दे!” आखिरकार मैं झड़ गया – गरम-गरम वीर्य प्रिया की चूत में भर गया। प्रिया भी झड़ गई, उसकी चूत ने मेरे लंड को निचोड़ लिया।
हम दोनों फर्श पर गिर गए। लेकिन प्रिया ने कहा, “अभी खत्म नहीं हुआ।” उसने मेरा लंड मुंह में लिया और चूसने लगी। लंड फिर खड़ा हो गया। हमने पूरी रात डेलीमोशन पर अक्षरा ड्रामा चलाए रखा और बीच-बीच में चुदाई की। प्रिया की चूत, गांड, मम्मे – सब कुछ चूसा और चोदा। सुबह होते-होते हम थक चुके थे लेकिन संतुष्ट।
ये डेलीमोशन अक्षरा ड्रामा वाली रात मेरी जिंदगी की सबसे गंदी और मजेदार रात थी। अब जब भी प्रिया मिलती है हम अक्षरा ड्रामा का नाम लेते हैं और चुदाई शुरू हो जाती है।