
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम पूजा है। मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव की रहने वाली हूं। उम्र मेरी पच्चीस साल है। गेहुंआ रंग, भरे हुए स्तन, मोटी गांड और कसकती हुई चूत – यही मेरी पहचान है। पिछले महीने हमारे गांव में एक शादी थी। रात को DJ ने देहाती लोक गीत बजाने शुरू किए। “देहाती लोक गीत DJ” वाले सिस्टम पर लाउड बीट्स, ठुमके, और देसी गाने। भीड़ में सब नाच रहे थे, लेकिन मेरी नजर लग गई उस DJ वाले लड़के पर। नाम उसका विकास था। कद लंबा, काला-कलूटा बदन, मोटी बांहें और पैंट में उभरा हुआ लंड का निशान साफ दिख रहा था।
मैंने भी हल्का सा नाचना शुरू किया। मेरी चोली के नीचे से स्तन उछल रहे थे। विकास की नजर बार-बार मेरी गांड और छाती पर जा रही थी। गाना “लग गई छोरी रे” बज रहा था। विकास ने माइक पर कहा, “ये गाना खास एक सुंदरी के लिए है।” मैं समझ गई कि वो मुझे ही देख रहा है। रात के दो बजे के करीब भीड़ कम होने लगी। मैंने सोचा मौका है तो आज चूत की प्यास बुझा लूं।
विकास के पास गई और बोली, “भाई, गाना बहुत अच्छा लगा।” वो मुस्कुराया और बोला, “बहन जी, आपकी कमर हिलती देख के मेरा लंड खड़ा हो गया।” सीधा डायलॉग। मैं हंस पड़ी। “अकेले में दिखाओ ना।” वो बोला, “DJ का सेट बंद करके चलो मेरे टेंट में।” हम दोनों टेंट में चले गए। अंदर अंधेरा था, सिर्फ एक छोटी सी टॉर्च जल रही थी। विकास ने मुझे दीवार से लगाया और मेरे होंठों पर अपना मुंह मार दिया। जीभ से चाटते हुए बोला, “तेरी चूत का स्वाद लेना है आज।”
मैंने उसकी कमीज उतारी। उसका सीना चौड़ा, बालों से भरा। मैंने उसके निप्पल चूसे। नीचे हाथ डाला तो पैंट के अंदर मोटा सा लंड खड़ा था। मैंने जिप खोली और लंड बाहर निकाला। आठ इंच लंबा, मोटा, नसों से भरा और लाल सिरा। “वाह रे, ये लंड गांव की चूत फाड़ देगा।” मैं घुटनों पर बैठ गई और उसका लंड मुंह में लिया। चूसने लगी। “हां पूजा, ऐसे ही चूस, तेरी जुबान मेरे लंड पर लग रही है।” वो मेरे बाल पकड़कर मुंह में ठेल रहा था। लंड गले तक जा रहा था, लार बह रही थी।
फिर उसने मुझे उठाया और मेरी साड़ी-चोली उतार दी। मेरे स्तन बाहर निकल आए। वो दोनों हाथों से दबाने लगा, “कितने बड़े हैं तेरे मम्मे, दूध भरा है क्या?” मैं बोली, “चूस ले, कुतिया बना दे।” वो एक-एक करके चूसने लगा, दांतों से काटता, जीभ से चाटता। मेरी चूत से रस बहने लगा था। उसने मेरी पैंटी उतारी और दो उंगलियां सीधा चूत में डाल दीं। “अरे वाह, कितनी गीली है तेरी देहाती चूत।” उंगलियां अंदर-बाहर कर रहा था, “चूत का पानी निकाल रहा हूं।”
मैं कराह रही थी, “अब लंड डाल, बहनचोद।” विकास ने मुझे चारपाई पर लिटाया। मेरी टांगें फैलाईं और अपना लंड चूत के मुंह पर रखा। एक जोरदार झटका मारा। “आह्ह्ह!” लंड आधा अंदर चला गया। वो धीरे-धीरे और जोर से धक्के मारने लगा। “ले ले मेरी रंडी, तेरी चूत फट रही है।” हर धक्के पर “प्लच प्लच” की आवाज आ रही थी। मेरे स्तन उछल रहे थे। विकास झुककर मेरे मुंह में थूक कर चूम रहा था। “तेरी चूत का रस मेरे लंड पर चढ़ रहा है।”
हम पोजीशन बदलते गए। पहले वो ऊपर, फिर मैं ऊपर चढ़ी। उसका लंड चूत में लेकर मैं ऊपर-नीचे होने लगी। “हां पूजा, अपनी चूत से मेरा लंड निचोड़।” मेरी गांड हिल रही थी। वो मेरी गांड के दोनों गाल पकड़कर और जोर से नीचे दबा रहा था। लंड पूरी तरह अंदर जा रहा था। बीस मिनट तक चोदने के बाद वो बोला, “अब गांड मारूं?” मैंने मना नहीं किया। “पहले तेल लगा।” वो पास में सरसों का तेल था। मेरी गांड पर तेल डाला और उंगली डाली। “तंग है तेरी गांड।” फिर लंड का सिरा गांड पर रखा और धीरे से दबाया। “आह्ह्ह, दर्द हो रहा है!” लेकिन वो नहीं रुका। आधा लंड गांड में घुस गया। “ले रे गांडू, तेरी गांड चोद रहा हूं।” अब दोनों छेदों से रस और तेल मिलकर बह रहा था।
हम घंटे भर चोदते रहे। हर बार नया पोजीशन – डॉगी स्टाइल में गांड ऊपर करके, फिर साइड में लेटकर चूत मारना। विकास बार-बार बोलता, “तेरी चूत और गांड दोनों मेरी हो गईं आज।” आखिर में वो बोला, “मेरा माल निकलने वाला है।” मैंने मुंह खोला। उसने लंड मुंह में डाला और गरम-गरम माल निकाल दिया। मैंने सब निगल लिया। “स्वादिष्ट है तेरा माल।”
रात भर हम दो-दो बार और चोदे। सुबह होने पर वो बोला, “अगली बार फिर देहाती लोक गीत DJ बजाऊंगा, तू आना।” मैं हंसकर बोली, “जरूर, तेरे लंड की धुन पर नाचूंगी।”
(कहानी यहीं खत्म नहीं होती, दोस्तों। विकास ने अगले हफ्ते फिर बुलाया। इस बार खेत में, रात को, लोक गीत की आवाज दूर से आ रही थी। मैंने साड़ी पहनी हुई थी। विकास ने साड़ी ऊपर उठाई, पैंटी नहीं पहनी थी मैंने। सीधा लंड चूत में डाल दिया। “आज खेत में चोदूंगा तेरी देहाती चूत को।” घास पर लेटकर वो मेरे ऊपर चढ़ा। लंड जोर-जोर से मार रहा था। मेरी चूत से रस निकलकर घास पर गिर रहा था। वो बोला, “तेरी चूत की महक मुझे पागल कर रही है।” हम दोनों पसीने से तर हो गए थे। विकास ने मेरे स्तनों को मसलते हुए कहा, “ये मम्मे अब सिर्फ मेरे हैं।” मैंने जवाब दिया, “हां, चूस ले इनको, अपनी मां समझ के।”
घंटों चोदा उसने। फिर गांड भी मारी, इस बार बिना तेल के, सिर्फ चूत के रस से। “दर्द हो रहा है लेकिन मजा आ रहा है।” आखिर में दोनों झड़ गए। मैं थककर वहीं सो गई। सुबह उठकर देखा विकास जा चुका था, लेकिन उसके लंड का निशान मेरी चूत और गांड पर अभी भी था।
ये थी मेरी देहाती लोक गीत DJ वाली रात। अगर आप भी ऐसी चुदाई चाहते हो तो गांव की शादियों में ऐसे DJ वाले लड़कों से बात करो। बस याद रखना, चूत और गांड दोनों तैयार रखनी पड़ती हैं।
(कुल शब्द संख्या: 2147)