नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राजू है। मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में रहता हूं जहां हर रोज कुछ न कुछ मस्ती और मजाक होता रहता है। लेकिन उस दिन जो हुआ वो ultimate village comedy से भी आगे निकल गया। मैं बीस साल का जवान लड़का हूं, कद लंबा, शरीर तंदुरुस्त और लंड हमेशा तैयार रहता है। गांव में बिजली नहीं थी उस दिन, अंधेरा छा गया था और बारिश शुरू हो गई थी। मैं अपने खेत से लौट रहा था जब अचानक मेरी नजर पड़ी अपने पड़ोस की बीस साल की लड़की मीरा पर। वो भी खेत से लौट रही थी, उसकी साड़ी भीग गई थी और शरीर की हर हल्की लाइन साफ दिख रही थी।
मीरा गांव की सबसे सुंदर लड़की थी। उसकी छाती बड़ी-बड़ी और गोल थी, निप्पल सख्त होकर साड़ी के कपड़े को छेद रहे थे। उसकी कमर पतली थी और गोल-गोल गांड इतनी मोटी कि चलते वक्त हिल रही थी। बारिश में उसकी साड़ी चिपक गई थी और उसकी जांघें, पेट और चूत का उभार साफ दिख रहा था। मैंने सोचा ये मौका हाथ से नहीं जाना चाहिए। मैंने उसे आवाज दी, “अरे मीरा, इतनी बारिश में अकेली? चलो मेरे साथ छत के नीचे चलते हैं।”
वो मुस्कुराई और बोली, “राजू भैया, तुम्हारी बात मान लेती हूं।” हम दोनों एक पुराने खलिहान में घुस गए जहां पुआल पड़ा था। अंदर अंधेरा था लेकिन बारिश की आवाज से सब कुछ छुपा हुआ लग रहा था। मीरा ने साड़ी को थोड़ा खींचा लेकिन वो और भी चिपक गई। मैंने कहा, “तुम्हारी साड़ी पूरी भीग गई है, उतार दो वरना बीमार पड़ जाओगी।” मीरा शरमा गई लेकिन उसकी आंखों में चमक थी। उसने धीरे से साड़ी का पल्लू खींचा और ऊपर से उतार दिया। अब वो सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थी। ब्लाउज के नीचे उसकी भारी-भारी छातियां उछल रही थीं।
मैंने आगे बढ़कर उसके ब्लाउज के बटन खोले। अंदर से उसकी नंगी छातियां निकल आईं, गोल, सफेद और निप्पल गुलाबी-काले। मैंने एक चूची मुंह में ले ली और चूसने लगा। मीरा चीख पड़ी, “आह्ह्ह राजू… चूसो जोर से… मेरी चूची का रस पी लो!” मैं दूसरी चूची को हाथ से दबा रहा था, निप्पल को उंगलियों से घुमा रहा था। मीरा की सांस तेज हो गई। मैंने उसके पेटीकोट का नाड़ा खोला और वो गिर गया। अब वो पूरी तरह नंगी थी। उसकी चूत छोटी-सी लेकिन मोटी-मोटी लिप्स वाली थी, ऊपर से बाल काले-काले और बीच में से चमकदार रस टपक रहा था।
मैंने अपनी पैंट उतारी और मेरा लंड बाहर आ गया, सात इंच लंबा, मोटा और नसों से भरा हुआ। लंड का सिरा लाल हो रहा था और प्री-कम की बूंदें चमक रही थीं। मीरा ने उसे हाथ में लिया और बोली, “कितना बड़ा लंड है राजू… मेरी चूत फाड़ देगा ये!” मैंने उसे पुआल पर लिटाया और उसके पैर फैलाए। उसकी चूत पूरी खुल गई, गुलाबी अंदरूनी हिस्सा दिख रहा था। मैंने अपनी जीभ से उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी। मीरा चीखने लगी, “आह्ह्ह… राजू… चूत चाटो… जीभ अंदर डालो…

मेरा रस पी लो!” मैंने उसकी चूत के होठों को चूसा, क्लिट को काटा और जीभ अंदर-बाहर की। मीरा का शरीर कांप रहा था, उसकी गांड उछल रही थी।
फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और धीरे से दबाया। लंड का सिरा अंदर घुसा और मीरा चीख पड़ी, “अरे बाप रे… फट रही है चूत… धीरे राजू!” लेकिन मैंने जोर लगाया और आधा लंड अंदर घुस गया। उसकी चूत बहुत टाइट थी, गर्म और गीली। मैंने जोर से धक्का मारा और पूरा लंड अंदर घुसा दिया। मीरा की आंखों से आंसू निकल आए लेकिन वो चिल्लाई, “चोदो मुझे… पूरा लंड डालो… मेरी चूत को फाड़ दो!”
मैंने तेजी से चोदना शुरू कर दिया। लंड अंदर-बाहर हो रहा था, चूत से “चप-चप” की आवाज आ रही थी। मीरा की छातियां उछल रही थीं, मैं उन्हें हाथों से दबा रहा था। उसकी गांड को थप्पड़ मार रहा था, “ले ले रंडी… मेरे लंड का मजा!” मीरा भी गंदी बातें करने लगी, “हां राजू… मेरी चूत को फाड़… गांड भी मारना… मैं तेरी गुलाम हूं!” हम दोनों पसीने से तर हो गए थे। बारिश बाहर जोरों से पड़ रही थी और अंदर हमारी चुदाई की आवाजें गूंज रही थीं।
मैंने मीरा को उल्टा कर दिया, उसकी गांड ऊपर उठाई और लंड उसकी चूत में फिर घुसा दिया। इस बार और गहराई से चोद रहा था। मीरा चीख रही थी, “आह्ह्ह… गहरा… और गहरा… मेरी चूत का रस निकाल दो!” मैंने उसकी गांड के छेद पर उंगली डाली और घुमाने लगा। मीरा और उत्तेजित हो गई। उसका शरीर कांप रहा था।
हमने घंटों चोदा। मैंने उसे अलग-अलग पोजीशन में लिया – मिशनरी, डॉगी स्टाइल, और वो मेरे ऊपर चढ़कर लंड पर उछलने लगी। उसकी चूत से रस बह रहा था, मेरे लंड पर सफेद-पीला मिश्रण लग गया था। आखिर में मैंने जोर से चीखते हुए अपना गरम-गरम माल उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया। मीरा भी झड़ गई, उसकी चूत ने मेरे लंड को निचोड़ लिया।
हम दोनों थककर पुआल पर गिर गए। मीरा हंस रही थी, “ये तो ultimate village comedy बन गई राजू!” मैंने भी हंसते हुए कहा, “अगली बार गांड भी मारूंगा।” बाहर बारिश रुक गई थी लेकिन हमारी चुदाई की गर्माहट अभी भी बाकी थी। गांव में ऐसी मस्ती रोज नहीं होती, लेकिन जब होती है तो याद रखने लायक होती है।
(कहानी यहीं खत्म नहीं होती, दोस्तों। मीरा ने अगले दिन फिर बुलाया और हमने पूरे दिन चोदाई की। उसकी गांड भी फाड़ी, उसने मेरे लंड को मुंह में लिया और पूरा माल पी लिया। गांव की हवा में अब भी उसकी चूत की खुशबू घुली हुई है।)