
Akshara Naitik Daughter – Ghar Mein Chhupi Chudai
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम विक्रम है। मैं दिल्ली के करोल बाग इलाके में रहता हूँ। मेरी उम्र 42 साल है और मैं एक छोटी सी फैक्ट्री चलाता हूँ। मेरी बीवी दो साल पहले गुजर चुकी है। घर में सिर्फ मैं और मेरी इकलौती बेटी अक्षरा रहती है। अक्षरा उम्र 23 साल की है, कॉलेज में पढ़ती है और घर पर ही रहती है। वो बहुत गोरी, गोल-गोल चेहरा, भारी-भारी स्तन, चौड़ी कमर और मोटी-मोटी जांघों वाली लड़की है। उसके स्तन इतने बड़े हैं कि टी-शर्ट में भी फिट नहीं होते, और जब वो चलती है तो उसकी गोल-गोल गांड हिलती हुई लगती है।
अक्षरा को नहाने के बाद सिर्फ टॉवल में घूमते देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता था। एक दिन शाम को वो नहाकर निकली तो टॉवल ढीला हो गया और नीचे गिर गया। उसकी नंगी चुच्चियां और गुलाबी चूत मेरी आंखों के सामने थी। अक्षरा शर्मा गई लेकिन मैंने उसे रोक लिया। “बेटा, शर्म मत कर, पापा देख रहे हैं।” उसने मुस्कुराते हुए कहा, “पापा, आप भी तो नंगी देख रहे हो मुझे।”
उस रात से कुछ बदल गया। अक्षरा अब मेरे पास ज्यादा बैठने लगी। एक रात वो मेरे बेड पर आकर लेट गई। उसने पतला नाइट सूट पहना था जिससे उसके स्तन साफ दिख रहे थे। मैंने हिम्मत करके उसके स्तन पर हाथ रखा। अक्षरा ने आंखें बंद करके कहा, “पापा, दबाओ ना… अच्छा लग रहा है।” मैंने उसके दोनों स्तनों को जोर से दबाया, निप्पल को उंगलियों से घुमाया। अक्षरा की सांस तेज हो गई। “पापा, चूसो ना… मेरे मम्मे चूसो।”
मैंने उसका सूट ऊपर किया और एक स्तन मुंह में ले लिया। चूसते-चूसते दूसरा हाथ उसकी जांघों पर ले गया। उसकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने उंगली डाली तो “आह्ह्ह…” की आवाज निकली। “पापा, उंगली और अंदर डालो… मेरी चूत फाड़ दो।” मैंने दो उंगलियां अंदर डालीं और तेजी से आंदोलन करने लगा। अक्षरा की चूत से रस निकल रहा था, मेरी उंगलियां पूरी गीली हो गई थीं।
“पापा, अब अपना लंड निकालो… मुझे दिखाओ।” मैंने अपना लंड बाहर निकाला। अक्षरा ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी। “वाह पापा, इतना मोटा और लंबा… मेरी चूत में कैसे जाएगा?” उसने झुककर मेरे लंड को मुंह में लिया। उसकी गर्म सांस और गीली जुबान ने मेरा लंड और सख्त कर दिया। वो चूस रही थी जैसे आइसक्रीम चूस रही हो। “पापा, आपका लंड स्वादिष्ट है… और जोर से चूसूं?”
मैंने उसे पलटकर लिटाया और उसकी टांगें फैलाईं। उसकी गुलाबी चूत पूरी तरह खुल गई थी। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा। “बेटा, तैयार हो?” “हां पापा, अब चोदो मुझे… अपनी बेटी की चूत फाड़ दो।” मैंने एक जोरदार झटका मारा। लंड आधा अंदर घुस गया। अक्षरा चीख पड़ी, “आह्ह्ह… पापा धीरे… बहुत मोटा है।” मैंने धीरे-धीरे और जोर लगाया। पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया। अक्षरा की आंखों से आंसू निकल आए लेकिन वो मुस्कुरा रही थी।
“पापा, जोर-जोर से चोदो… मेरी चूत को अपना बना लो।” मैंने रफ चोदना शुरू किया। हर झटके में लंड पूरा बाहर निकालकर फिर जोर से अंदर घुसा रहा था। अक्षरा की चूत से “छप-छप” की आवाज आ रही थी। उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें हाथों से दबाया और चोदता रहा। “बेटा, तेरी चूत कितनी टाइट है… पापा का लंड फंस गया है।” “हां पापा, आपकी बेटी की चूत आपकी है… रोज चोदना मुझे।”
हम घंटे भर चोदते रहे। मैंने उसे कुत्ते वाली पोजीशन में किया। उसकी मोटी गांड सामने थी। मैंने लंड उसकी चूत में डाला और पीछे से जोर-जोर से धक्के मारे। अक्षरा चीख रही थी, “पापा, गांड भी मारो… मेरी गांड में लंड डालो।” मैंने उसकी गांड पर थूक लगाया और एक उंगली डाली। फिर लंड निकालकर गांड में घुसाने लगा। अक्षरा चीखी, “आह्ह्ह… धीरे पापा, गांड फट जाएगी।” लेकिन मैंने जोर लगाया और लंड उसकी गांड में घुसा दिया।
अब मैं उसकी गांड मार रहा था। अक्षरा का शरीर कांप रहा था। “पापा, और जोर… मुझे और मारो… मैं झड़ने वाली हूं।” कुछ देर बाद अक्षरा का शरीर अकड़ गया और उसकी चूत से रस निकलने लगा। मैं भी रुक नहीं सका। “बेटा, पापा झड़ रहा है… कहां निकालूं?” “अंदर ही निकालो पापा… अपनी बेटी की चूत में अपना माल भर दो।” मैंने जोरदार झटका मारा और पूरा माल उसकी चूत में छोड़ दिया।
हम दोनों थककर लेट गए। अक्षरा ने मुझे चूमा और कहा, “पापा, अब रोज रात को ऐसा ही करना… मैं आपकी पूरी हूँ।” उसके बाद से हर रात हम चोदते हैं। कभी बेड पर, कभी सोफे पर, कभी किचन में। अक्षरा अब मेरे सामने नंगी ही घूमती है। मैं उसके स्तन चूसता हूं, चूत चाटता हूं और लंड डालकर जोर-जोर से चोदता हूं।
एक बार बारिश के दिन हम बालकनी में नंगे होकर चोद रहे थे। पानी गिर रहा था और हम एक-दूसरे को भिगो रहे थे। अक्षरा ने कहा, “पापा, बारिश में चोदना कितना मजा आता है… आपका लंड और भी सख्त लग रहा है।” मैंने उसे दीवार से टिका कर चोदा। उसकी चूत से पानी और रस मिलकर गिर रहा था।
अक्षरा अब कॉलेज से छुट्टी लेकर घर पर ही रहती है ताकि पापा उसकी चूत भर सकें। मैं भी ऑफिस जल्दी आ जाता हूं। हम दिन में भी चोद लेते हैं। अक्षरा की चूत अब मेरे लंड की आदि हो चुकी है। वो कहती है, “पापा, आपकी बेटी की चूत बिना आपके लंड के अधूरी है।”
हम दोनों खुश हैं। कोई नहीं जानता कि पिता और बेटी के बीच क्या चल रहा है। लेकिन हमें परवाह नहीं। अक्षरा की गांड, चूत और मम्मे अब सिर्फ मेरे हैं। और मैं रोज उसकी चूत में अपना माल भरता हूं।
(कहानी यहीं खत्म नहीं होती… रोज नई-नई पोजीशन, नई-नई जगहों पर हम चोदते रहते हैं। अक्षरा अब और भी ज्यादा गंदी बातें करती है – “पापा, मेरी चूत चाटो… अपना लंड मेरे मुंह में डालो… मुझे अपनी रंडी बना लो।” और मैं हर बार उसकी हर इच्छा पूरी करता हूं।)